Sukhoi Fighter Planes: जानिए, भारत के सबसे ‘ताकतवर विमान’ सुखोई-30MKI की पूरी कहानी
साल 2017 की तत्कालीन रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का वायुसेना के मुख्य लड़ाकू विमान सुखोई-30 से पहली बार सफल परीक्षण किया गया।

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वैसे तो भारतीय वायु सेना के बेड़े में कई टॉप लड़ाकू विमान हैं- उनमें सुखोई Su-30MKI, राफेल, मिराज, MiG-29 और तेजस का नाम शामिल हैं। इसके अलावा वायुसेना के पास अन्य कई मालवाहक विमान, अटैक हेलीकॉप्टर, अवॉक्स विमान भी शामिल हैं। इन सभी में सबसे ज्यादा चर्चा देश में आज 'राफेल' को लेकर होती है उसके कारण कई हैं। लेकिन, सच ये है कि राफेल से पहले और अब भी सुखोई लड़ाकू विमान दुश्मन देशों के बीच सबसे बड़ा चर्चा का केंद्र रहा है। आज हम आपको सुखोई की पूरी कहानी बताएंगे कि कैसे यह लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना का हिस्सा बना, क्या है इसकी खासियत और देश में कब इस पर भी हुई थी राजनीति।
क्यों चर्चा में है 'Su-30MKI'
भारतीय वायुसेना लगातार अपने लड़ाकू विमानों को अपग्रेड कर रही है। इसी दिशा में सुखोई (SU-30MKI) के विमानों को भी नई मिसाइल से लैस किया जा रहा है। जिससे इनकी मारक क्षमता और ज्यादा बढ़ जाएगी।
रूसी रक्षा उद्योग का एक प्रतिनिधिमंडल भारतीय वायु सेना के सुखोई-30MKI बेड़े को अपग्रेड किए जाने के लिए लंबे समय से चली आ रही बातचीत को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से जल्द ही भारत की यात्रा करेगा। इस प्रस्तावित अपग्रेड में और बेहतर राडार, अधिक शक्तिशाली हथियारों का पैकेज, एक नया कॉकपिट सिस्टम और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध क्षमताओं का इंटीग्रेशन शामिल होगा।
दूसरी तरफ बीते दिनों ही वियतनाम डिफेंस एक्सपो में शामिल हुए ब्रह्मोस एयरोस्पेस के मॉर्केटिंग, प्रोमोशन और एक्सपोर्ट डिपार्टमेंट के प्रमुख प्रवीण पाठक ने एक विदेशी अखबार को बताया था कि वियतनामी वायु सेना में कई सुखोई-30 लड़ाकू विमान शामिल हैं। इस विमान के लिए ब्रह्मोस मिसाइल का एयर लॉन्च वेरिएंट उपयुक्त हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मिसाइल का एयर लॉन्च वेरिएंट Su-30MKI से ऑपरेट किया जा रहा है, जो सिर्फ भारत के पास है। यह रूस के पास भी नहीं है।
इन सभी वजहों से भारतीय वायुसेना के ताकतवर लड़ाकू विमान सुखोई-30MKI चर्चा में हैं।
Su-30MKI में MKI का मतलब क्या है?
दरअसल रूसी विमान का नाम है सुखोई-30 और भारतीय सुखोई-30MKI है। एमकेआई (MKI) का मतलब रूसी भाषा में (Modernizirovannyi Kommercheskiy Indiski - Modernised Commercial Indian) है। Su-30MKI का निर्माण भारत में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) करती है। असल में इसे रूस के सुखोई कॉर्पोरेशन ने 1995 में बनाना शुरू किया था, जिसे 1997 में HAL ने लाइसेंस लेकर भारतीय वायुसेना के हिसाब से बदलना शुरू कर दिया था। असल में सुखोई-30MKI फाइटर जेट सुखोई Su-27 का अपग्रेडेड वर्जन है।
इस लड़ाकू विमान की ताकत
इस लड़ाकू विमान की वैसे तो कई विशेषताएं हैं लेकिन इसकी ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दुनियाभर के 10 खतरनाक लड़ाकू विमानों में इसकी गिनती की जाती है। इस विमान को रूस और भारत ने मिलकर बनाया है। भारत ने अब तक 272 Su-30MKI विमान अपनी वायुसेना के लिए प्राप्त किए हैं। इसे 4.5 जनरेशन का लड़ाकू विमान माना जाता है।
इसकी लंबाई 72 फीट है। विंगस्पैन 48.3 फीट है। ऊंचाई 20.10 फीट है और वजन 18,400 किलोग्राम है। सुखोई-30MKI में लीयुल्का एल-31एफपी आफ्टरबर्निंग टर्बोफैन इंजन लगे हैं, जो उसे 123 किलोन्यूटन की ताकत देता है। इस विमान की अधिकतम गति 2120 किलोमीटर प्रतिघंटा है, जबकि ज्यादा ऊंचाई पर रेंज 3000 किलोमीटर है। वहीं अगर बीच रास्ते में ईंधन भर दिया जाए तो सुखोई-30MKI 8000 किलोमीटर की रेंज तक जा सकता है।
साथ ही यह विमान अधिकतम 56,800 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। सुखोई-30MKI में 30mm की एक ग्रिजेव-शिपुनोव ऑटोकैनन लगी है, जो सिर्फ 1 मिनट में 150 राउंड फायर करती है। इसमें 12 हार्ड प्वाइंट्स हैं जिनमें हथियार लगा सकते हैं। इसमें 4 तरह के रॉकेट्स, 4 तरह की मिसाइल और 10 तरह के बम लगाए जा सकते हैं या फिर इन सबका मिश्रण लगाया जा सकता है।
भारत को कैसे मिले ये विमान
बात साल 1996 की है, जब केंद्र में पी.वी. नरसिम्हा राव की सरकार थी। तभी 1996 में आम चुनाव से पहले नरसिम्हा राव सरकार ने अंतिम दिनों में रूस के साथ सुखोई विमान समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। तब अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई में भाजपा इस डील का विरोध कर रही थी। क्योंकि भाजपा का कहना था कि नरसिम्हा राव की सरकार अपने अंतिम दिनों में जल्दबाजी में ये डील क्यों कर रही है। लेकिन बाद में भाजपा इस सुखोई विमान की डील के विरोध से पीछे हट गई। फिर बाद में अटल बिहारी वाजपेयी से राय मशविरा कर तत्कालीन रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव ने डील को मंजूर दी और भारत में सुखोई-30 लड़ाकू विमान आया।
आखिर क्या राजनीतिक मतभेद थे सुखोई खरीद पर?
'द प्रिंट' में छपे वरिष्ठ पत्रकार शेखर गुप्ता इस डील पर लिखते हैं कि इस मामले को लेकर साल 1996 में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात हुई थी। तत्कालीन विपक्ष के नेता अटल बिहारी वाजपेयी से मिले थे। इस डील को लेकर अटल जी की चिंता थी कि नरसिम्हा राव की सरकार ने बिना अंतिम कीमत तय किए ही 35 करोड़ डॉलर की राशि रूस को क्यों दी? साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि अगर ये एक अच्छा एयरक्राफ्ट है और देश के लिए अच्छा है तो घोटाले जैसी बेबुनियादी बातों से डील को नुकसान नहीं होना चाहिए। तब चुनाव के बाद बीजेपी सत्ता में आई। लेकिन, सुखोई डील पर वह आगे कुछ कर पाती इससे पहले ही वाजपेयी सरकार 13 दिन में गिर गई।
शेखर गुप्ता आगे लिखते हैं कि सरकार गिरने के बाद पूर्व कैबिनेट मंत्री और बीजेपी नेता जसवंत सिंह ने एक फंक्शन के दौरान बताया कि वह डील से जुड़े दस्तावेज देख चुके हैं और इसमें कोई गड़बड़ी नहीं है। वहीं वाजपेयी सरकार गिरने के बाद एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री बने थे। इस दौरान मुलायम रक्षा मंत्री थे।
शेखर गुप्ता बताते हैं कि तत्कालीन रक्षामंत्री मुलायम सिंह यादव ने भी उनसे एक मुलाकात में कहा था कि जसवंत जी और अटल जी उनके पास सुखोई डील के लिए आए थे। वाजपेयी जी और जसवंत जी को साउथ ब्लॉक में बुलाया गया था और डील से जुड़ी पूरी जानकारी दी गई थी। उन्होंने दस्तावेजों में कुछ बदलाव सुझाए थे, जैसे रूस इस बात की गारंटी दे कि इसमें कोई रिश्वत नहीं दी गई और अगर भविष्य में कुछ सामने आता है तो भारत सरकार को इसकी भरपाई की जाएगी। इस तरह मुलायम सिंह ने इस डील को मंजूरी दी।
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