Election of CM: कैसे चुना जाता है मुख्यमंत्री, जानें क्या है संवैधानिक प्रक्रिया?
कर्नाटक चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद अब इस बात पर चर्चा शुरू हो गई है कि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा। जानें क्या है मुख्यमंत्री चुनने की प्रक्रिया।

Election of CM: 224 विधानसभा सीटों वाले कर्नाटक राज्य में कांग्रेस पार्टी 135 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने जा रही है। लेकिन, अब मामला नये मुख्यमंत्री बनाने को लेकर अटक गया है। हालांकि, इस सवाल का जवाब भी जल्दी मिल जायेगा, लेकिन इस बीच आपको यह मालूम होना चाहिए कि चुनावों के बाद मुख्यमंत्री का चयन कैसे होता है?
Recommended Video

फिलहाल, कर्नाटक के सीएम पद की रेस में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डी.के. शिवकुमार सबसे आगे चल रहे हैं। डी.के. शिवकुमार अभी कर्नाटक के प्रदेश अध्यक्ष हैं तो सिद्धारमैया कर्नाटक कांग्रेस के बड़े नेताओं में शुमार है। ऐसे में दोनों में से किसी एक को चुनना कांग्रेस के लिए मुश्किल की घड़ी है। वहीं विधायक दल की बैठक में यह प्रस्ताव पास हुआ कि कर्नाटक सीएम का चुनाव अब पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे करेंगे।
क्या है संवैधानिक प्रक्रिया?
भारत के संविधान के अनुसार किसी भी राज्य का प्रमुख राज्यपाल होता है, लेकिन वास्तविक कार्यकारी शक्तियां मुख्यमंत्री के पास होती हैं। विधानसभा चुनावों में जिस पार्टी को बहुमत मिलता है, उसके निर्वाचित विधायक अपना एक नेता चुनते हैं। इसे विधायक दल का नेता कहा जाता है। जिसके बाद राज्य के राज्यपाल उन्हें सरकार गठित करने के लिए आमंत्रित करते है। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164(1) के अंतर्गत मुख्यमंत्री की नियुक्ति राज्यपाल द्वारा की जाती है। राज्यपाल से अनुमति लेकर ही मुख्यमंत्री अपने मंत्रिमंडल का गठन करते हैं।
आपको बता दें कि 91वें संविधान संशोधन अधिनियम, 2003 के अनुसार मुख्यमंत्री सहित संपूर्ण मंत्रिमंडल का आकार राज्य की विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए।
अगर किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिले?
विधानसभा चुनावों के नतीजों के बाद अगर किसी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलता है तो राज्यपाल अपने विवेक के आधार पर सबसे बड़े दल (जिसकी विधानसभा सीट ज्यादा हो) को सरकार बनाने के लिए न्यौता देते हैं। उस दल अथवा नेता को एक निश्चित अवधि के अन्दर विधानसभा में बहुमत (कुल सीटों की संख्या के आधे से ज्यादा) साबित करना होता है। चाहे वह अन्य दलों से गठबंधन करके ही क्यों न हो। मगर यदि वह बहुमत साबित नहीं कर पाता है तो उस स्थिति में कार्यकारी शक्तियां राज्यपाल के अधीन आ जाती हैं। फिर राज्य में दोबारा चुनाव करवाए जाते हैं। तब तक राज्य में राष्ट्रपति शासन रहता है और राज्यपाल ही प्रशासन चलाते हैं।
बिना विधायक बने मुख्यमंत्री बन सकते हैं?
कभी-कभी ऐसी स्थिति होती है कि जो पार्टी बहुमत में है, वह ऐसे नेता को अपने विधायक दल का नेता चुनती है जो विधायक ही नहीं होते। संविधान के मुताबिक मुख्यमंत्री को विधानमंडल (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य होना जरूरी होता है। तब ऐसी स्थिति में राज्यपाल उस संबंधित व्यक्ति को मुख्यमंत्री पद पर नियुक्त कर देते हैं। लेकिन, उस पद पर बैठे व्यक्ति को अगले 6 महीनों के अंदर विधानसभा या विधानपरिषद (कुछ राज्यों में है) की सदस्यता प्राप्त करनी जरुरी होती है अन्यथा उसे मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र देना होगा।
विधानसभा और विधानपरिषद में अंतर?
विधानसभा के सदस्यों का निर्वाचन प्रत्यक्ष चुनावों के माध्यम से जनता द्वारा किया जाता है। यह एक अस्थायी निकाय है जिसका कार्यकाल 5 सालों का होता है। अतः हर पांच साल बाद इसे भंग कर चुनावों द्वारा नयी विधानसभा का गठन किया जाता है। यह व्यवस्था भारत के सभी राज्यों में मौजूद है।
जबकि विधानपरिषद ऊपरी सदन होता है, जैसेकि राज्यसभा। विधानपरिषद के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली के माध्यम से चुने जाते हैं। यह एक स्थायी सदन होता है, जो कभी भंग नहीं होता। इसमें प्रत्येक 2 वर्षों में एक तिहाई सदस्य सेवानिवृत्त हो जाते हैं। यह व्यवस्था केवल आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में मौजूद है। आपको बता दें कि विधानपरिषद के सदस्यों की अधिकतम संख्या विधानसभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक तिहाई से अधिक नहीं हो सकती। वहीं सदस्यों की संख्या 40 से कम नहीं होनी चाहिए।
राज्यों से जुड़े कुछ अन्य तथ्य
● छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश और उड़ीसा के राज्यों में जनजातियों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए कम से कम एक मंत्री इस समुदाय से होता है।
● भारत के 8 केंद्र शासित प्रदेशों में से केवल दिल्ली और पुडुचेरी में मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल का प्रावधान किया गया है। बाकी जगह उपराज्यपाल नियुक्त किये जाते हैं।
● सबसे बड़े राज्य, उत्तर प्रदेश की विधानसभा में 403 सदस्य हैं। जबकि गोवा सबसे छोटा राज्य है जिसकी विधान सभा की क्षमता केवल 40 सदस्यों की है।
● ओडिशा के नवीन पटनायक एक मुख्यमंत्री के रूप में 5 मार्च 2000 (23 साल) से सेवा करते आ रहे हैं। वह अभी भी मुख्यमंत्री पद पर हैं।
● वर्तमान में मिजोरम के जोरमथांगा 78 साल के (जन्म 13 जुलाई 1944) सबसे उम्रदराज मुख्यमंत्री हैं।
● वर्तमान में पेमा खांडू सबसे कम उम्र 43 साल (21 अगस्त 1979) में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं।












Click it and Unblock the Notifications