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कारगिल दिवस: कारगिल के दो शहीदों के घर भेजे गए आखिर खत, क्या थी उनकी ख्‍वाहिश

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नई दिल्‍ली। कारगिल की जंग को आज 19 वर्ष पूरे हो गए हैं और जब-जब यह तारीख आती है, उन तमाम शहीदों की याद भी आती है जिन्‍होंने छोटी सी उम्र में ही अपनी जिंदगी देश के नाम पर कुर्बान कर दी। इन नामों में से ही दो नाम थे, कैप्‍टन विक्रम बत्रा और कैप्‍टन विजयंत थापर का। जिस समय जंग हुई उस समय न तो सोशल मीडिया था और न ही फोन इतना पॉपुलर था। दोनों ऑफिसर्स ने शहीद होने से पहले अपने-अपने घर एक चिट्ठी भेजी थी और इस चिट्ठी में उन्‍होंने अपनी अंतिम इच्छा अपने घरवालों को बताई थी। जहां कैप्‍टन बत्रा की उम्र शहादत के समय सिर्फ 24 वर्ष थी तो वहीं कैप्‍टन थापर की उम्र सिर्फ 22 वर्ष ही थी। दोनों ने ही अपने अदम्य साहस और वीरता का परिचय देकर मातृभूमि की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था।

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भाई विशाल को लिखी चिट्ठी

श्रीनगर-लेह मार्ग के ठीक ऊपर सबसे महत्त्वपूर्ण 5,140 चोटी को पाक सेना से मुक्त करवाने का जिम्मा भी कैप्टन विक्रम बत्रा को दिया गया। बेहद दुर्गम क्षेत्र होने के बावजूद विक्रम बत्रा ने अपने साथियों के साथ 20 जून 1999 को सुबह तीन बजकर 30 मिनट पर इस चोटी को अपने कब्जे में ले लिया। इससे पहले 16 जून को कैप्टन ने अपने जुड़वा भाई विशाल को द्रास सेक्टर से चिट्ठी में लिखा- 'प्रिय कुशु, मैं पाकिस्तानियों से लड़ रहा हूं, जिंदगी खतरे में है। यहां कुछ भी हो सकता है। गोलियां चल रही हैं। मेरी बटालियन के एक अफसर आज शहीद हो गए। नार्दन कमांड में सभी की छुट्टी कैंसिल हो गई है। पता नहीं कब वापस आऊंगा। तुम मां और पिताजी का ख्याल रखना यहां कुछ भी हो सकता है।'

क्‍या लिखा था कैप्‍टन थापर ने

22 राजपूताना राइफल्स में दिसंबर 1998 में कैप्‍टन थापर को कमीशन मिला और विजयंत को देश सेवा का मौका मिला। विजयंत की यूनिट कुपवाड़ा में आतंक विरोधी अभियान चला रही थी, घुसपैठियों को भगाने तोलोलिंग की ओर द्रास भेजी गई। विजयंत ने अपनी आखिर चिट्ठी में लिखा था, 'प्रिय पापा, मम्मी, बिरदी और ग्रैनी, जबतक आपको ये खत मिलेगा तबतक मैं आप लोगों को आसमान से देख रहा होऊंगा और अप्सराओं की मेहमान नवाजी का लुत्फ उठा रहा होऊंगा। मुझे कोई पछतावा नहीं है। यहां तक की अगर मैं कभी दोबारा इंसान बना, तो मैं सेना में भर्ती होउंगा और देश के लिए लडूंगा। अगर आप आ सकते हैं तो प्लीज आइए और देखिए कि भारतीय सेना आपके बेहतर कल के लिए किन दुर्गम जगहों पर दुश्मनों से लड़ाई लड़ रही है। जहां तक यूनिट का संबंध है तो इस बलिदान को सेना में भर्ती हुए नए जवानों को जरूर बताया जाना चाहिए। मेरे शरीर का जो भी हिस्सा निकालकर प्रयोग किया जा सकता है उसे निकाल लिया जाना चाहिए। अनाथालयों में दान करते रहिएगा और रुखसाना को हर महीने 50 रूपए जरूर भेज दीजिएगा और योगी बाबा से मिलते रहिएगा,' बेस्ट ऑफ लक टू यू ऑल। लिव लाइफ किंग साइज, रॉबिन। कैप्‍टन थापर को प्‍यार से सब रॉबिन बुलाते थे।

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English summary
Kargil Diwas: the last letters of 2 martyrs lost their life while fighting in Kargil against Pakistan.
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