Iran: महसा अमिनी की शहादत, ईरान में नया सवेरा की आहट
ईरान में ठीक एक साल पहले 16 सितंबर 2022 को 22 साल की महसा अमिनी को पुलिस हिरासत में पीट पीट कर मार डाला गया था। अमिनी का कसूर सिर्फ इतना था कि वह ईरान की महिलाओं के लिए पहनावे की आजादी चाहती थी और उन पर जबरन हिजाब थोपे जाने का विरोध कर रही थी। अब उनकी मौत के एक साल बाद ईरान में एक नया सवेरा देखा जा रहा है। अमिनी ने जो अलख जगाया था वह अब हजारों लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया है।

अब ईरान की महिलाएं अधिक मुखर होकर, बिना डरे ईरान की मोरल पुलिसिंग का विरोध कर पा रही हैं और अब खुलेआम हिजाब को उतार फेंक अमिनी को श्रद्धांजलि दे रही हैं। दुनिया भर में औरतों के हक के लिए उठ रही आवाज में अमिनी की कुर्बानी एक नये मशाल की तरह है, जो मध्य एशिया की महिलाओं को लड़कर अपने हक की मांग का रास्ता दिखा रही है।
16 सितंबर 2023 को मीडिया में आए वीडियो में साफ दिखाई दे रहा था कि ईरान की महिलाएं अपने स्वतंत्र जीवन के अधिकार की मांग कर रही थीं, ईरानी तानाशाह अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की दुआएं मांग रही थीं। सार्वजनिक रूप से अपने स्कार्फ को आग के हवाले कर रहीं थीं और अपने बाल सबके सामने काट रहीं थीं। कुछ स्कूली लड़कियों ने खेल के मैदानों और सड़कों पर भी प्रदर्शन किया।
अमिनी की शहादत के दिन ईरान के युवा सड़कों पर थे और उन्होंने जी भर कर विरोध प्रदर्शन किया। पुलिस के साथ झड़प से भी वह नहीं डरे और अमिनी के समर्थन की तख्तियां लहराते रहे। हिजाब को जबरन पहनने वाले फरमान का अब खुलेआम उल्लंघन होने लगा है।
जुलाई की शुरुआत में ईरान की राजधानी तेहरान में एक सांस्कृतिक उत्सव हो रहा था, जैसे ही थोड़ी रोशनी वहां कम हुई, दर्शकों में महिलाएं ऐतिहासिक मिलाद टॉवर पर संगीत के साथ नाचने लगीं, गाने लगीं और जोर जोर से तालियां बजाने लगीं। वे अपने हिजाब भी हवा में लहरा रही थी।
वे ईरान के इस्लामी कानून में अपने लिए लगाई गईं सभी पाबंदियों को नकार रही थीं। ईरान की महिलाओं में तो हिम्मत उसी दिन आ गई थी जब ईरान के पश्चिमी शहर सक़क़ेज़ में अमिनी को दफनाया जा रहा था और उनकी कब्र के पास महिलाओं ने एकजुटता दिखाते हुए अपने सिर के स्कार्फ उतार फेंके थे।
ईरान के हुक्मरान इस बदलाव से वाकिफ हैं और उनके मन में डर भी घर कर रहा है कि अमिनी के समर्थकों की हिम्मत कहीं इतनी न बढ़ जाए कि लोग सरकार के खिलाफ विद्रोह की स्थिति तक पहुंच जाएं। इसी डर के मारे अमिनी के पिता अमजद को ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने पिछले हफ्ते हिरासत में लिया था, ताकि वह अपनी बेटी की मृत्यु की सालगिरह मनाने वालों के साथ खड़े होकर सरकार को चुनौती ना दे सकें, लेकिन जब नॉर्वे स्थित ईरान मानवाधिकार समूहों ने इस पर आवाज उठाई तो ईरानी पुलिस को उन्हें रिहा करना पड़ा।
ईरान के इस्लामी गणतंत्र में महिलाओं के लिए घर से निकलने के बाद हिजाब पहनने की अनिवार्यता तो है ही साथ ही एक खास मोरल पुलिस की भी तैनाती की गई है जो सिर्फ यही देखती है कि कोई महिला बिना हिजाब के तो सड़कों पर नहीं है। यदि कोई महिला बिना हिजाब के पायी जाती है तो पुलिस उसे गिरफ्तार कर सकती है, उस पर फाइन कर सकती है, बार बार उल्लंघन के आरोप में उसे जेल भी भेज सकती है। यानि अनिवार्य ड्रेस कोड का उल्लंघन करने वाली महिलाओं को कड़ी सजा का सामना करना पड़ सकता है।
अब ईरान की सरकार अपनी झेंप मिटाने के लिए इस आंदोलन को अपने कट्टर दुश्मन अमेरिका और इज़राइल द्वारा दंगे कराने की साजिश रचने का आरोप लगा रही है। बीबीसी और अन्य स्वतंत्र मीडिया पर ईरान के अंदर से रिपोर्टिंग करने पर रोक लगा दी गई है। सोशल मीडिया और मानवाधिकार समूह भी चोरी छिपे ही काम कर रहे हैं। अधिकारियों ने इंटरनेट और फोन सेवाएं बाधित कर दी थीं।
हिजाब के खिलाफ उठ खड़े लोगों पर पुलिस अत्याचार भी खूब हुआ है। बीबीसी ने ईरान की मानवाधिकार कार्यकर्ता समाचार एजेंसी (एचआरएएनए) के हवाले से यह दावा किया है कि अब तक सुरक्षा बलों ने कम से कम 530 प्रदर्शनकारियों को मार डाला है और लगभग 20000 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है, जिनमें पत्रकार, फिल्मी सितारे और फुटबॉल खिलाड़ी शामिल हैं। इस आंदोलन को कुचलने के लिए ईरान की संसद के जरिए एक कानून लाया जा रहा है जिसके तहत ड्रेस कोड का पालन नहीं करने वालों पर 10 साल तक की जेल सहित कई गंभीर दंड का प्रावधान किया गया है।
इसके बावजूद ईरान की लड़कियां अपने ही देश की शिक्षिका सेपिदेह के इस आह्वान के साथ जूझने का प्रण कर रहीं हैं कि -हम एक दूसरे से कहेंगे जागते रहो, हार मत मानो, हमें आज़ादी मिलेगी और हमें अगली पीढ़ी के बारे में सोचने की ज़रूरत है। यह सभी के लिए बुरा समय है, हार मत मानो।' सेपिदेह विरोध प्रदर्शनों पर रोक लगने के बाद देश छोड़कर चली गई हैं। ईरान में यह जद्दोजेहद जारी है, एक नये बदलाव के लिए।
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