International Payments: अंतरराष्ट्रीय भुगतानों में होता है स्विफ्ट का प्रयोग, जानें कैसे करता है काम
दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय लेनदेन के लिए स्विफ्ट प्रणाली का प्रयोग किया जाता है। फिलहाल 200 से ज्यादा देशों के 11000 बैंक और वित्तीय संस्थान इसके सदस्य हैं।

International Payments: रूस के यूक्रेन पर आक्रमण के बाद से अभी तक रूस के कई बड़े बैंको को स्विफ्ट प्रणाली से बाहर कर दिया गया है। गौरतलब है कि यह कदम यूरोपीय यूनियन और अमेरिका के दबाव में उठाया जा रहा है। इस प्रणाली से बाहर निकाले जाने से रूस के आयात और निर्यात दोनों पर बेहद नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
रूस से पहले ईरान को उसके परमाणु कार्यक्रम के चलते अमेरिका के दबाव में स्विफ्ट से बाहर कर दिया गया था। उसका नतीजा यह हुआ कि कुछ ही समय में ईरान का आयत और निर्यात बुरी तरह से प्रभावित हो गया।
स्विफ्ट क्या है?
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) घरेलू बैंकों को IFSC कोड प्रदान करता है। यदि आप पैसे ट्रांसफर करने के लिये नेट बैंकिंग का उपयोग करते हैं, तो ट्रांसफर करने के लिये IFSC दर्ज करना अनिवार्य होता है। उसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय भुगतानों के लिए स्विफ्ट का प्रयोग किया जाता है। वैसे दुनिया में स्विफ्ट के और भी कई विकल्प मौजूद है। मगर स्विफ्ट का तंत्र अन्य विकल्पों से बड़ा है और इसलिये यह फिलहाल अधिक लोकप्रिय है।
स्विफ्ट यानी 'सोसायटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन' (SWIFT) बेल्जियम की एक सहकारी संस्था है। समय के साथ-साथ यह दुनियाभर के देशों के बीच आर्थिक लेन-देन की रीढ़ बन गया है। इसकी शुरुआत 3 मई 1973 को कार्ल रॉयटर्सकील्ड के नेतृत्व में ब्रुसेल्स, बेल्जियम में की गयी थी। यह G-10 देशों बेल्जियम, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, नीदरलैंड, स्वीडन, स्विट्जरलैंड, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के केंद्रीय बैंकों सहित यूरोपीय सेंट्रल बैंक और नेशनल बैंक ऑफ बेल्जियम द्वारा नियंत्रित होता है।
1977 तक 22 देशों के 518 वित्तीय संस्थान स्विफ्ट से जुड़े थे। फिर 79 देश इसके सदस्य हो गये और 1000 वित्तीय संस्थानों ने इसका प्रयोग करना शुरू कर दिया। इसके बाद 2009 तक 209 देशों के 9,000 वित्तीय संस्थान इससे जुड़ गये। फिलहाल 200 से अधिक देशों के लगभग 11,000 बैंको सहित अन्य वित्तीय संस्थान इस प्रणाली का प्रयोग कर रहे हैं।
स्विफ्ट कितना लोकप्रिय है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 30 नवंबर 2021 को इसके माध्यम से एक दिन में 50.3 मिलियन भुगतान किये गये थे। यह एक वैश्विक रिकार्ड है। इसी प्रकार दिसंबर 2022 में हर दिन औसतन 44.8 मिलियन भुगतानों में स्विफ्ट का प्रयोग किया गया।
साल 2012 में स्विफ्ट ओवरसाइट फोरम की शुरुआत की गयी जिसमें G-10 देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के केंद्रीय बैंको को जोड़ा गया था। इसमें भारत का रिजर्व बैंक भी शामिल था। भारत में 1991 में स्विफ्ट का प्रयोग होना शुरू हुआ था। आज भारतीय स्टेट बैंक और पंजाब नेशनल बैंक सहित सभी बड़े भारतीय बैंक स्विफ्ट प्रणाली के माध्यम से लेनदेन करने की सुविधा प्रदान करते हैं।
स्विफ्ट कैसे काम करता है
स्विफ्ट को मुख्यतः अमेरिका, नीदरलैंड और स्विटजरलैंड में स्थित डेटा बैकों से संचालित किया जाता है। इसका हांगकांग में भी एक कमांड एंड कंट्रोल सेंटर है। यह सभी ऑपरेटिंग सेंटर एक-दूसरे से जुड़े होते हैं। हरदिन लाखों वैश्विक लेनदेन होते हैं और किसी तकनीकी कमी के चलते अगर कोई सेंटर फैल हो जाये तो दूसरे सेंटर ट्रैफिक का भार वहान कर लेते हैं। इस प्रकार यह प्रक्रिया वैश्विक भुगतानों को सुचारू रूप से सफल बनाती है।
अब बात करते है कि स्विफ्ट कैसे काम करता है? दरअसल, इस प्रणाली के तहत सदस्य देशों के बैंक अथवा अन्य वित्तीय संस्थानों को एक स्विफ्ट कोड यानी बिजनेस आइडेंटिफायर कोड़ प्रदान किया जाता है। जिससे उसे दुनिया में वित्तीय पहचान मिलती है। इस कोड़ के माध्यम से बैंक और बैंक ब्रांच की जानकारी मिलती है। कोड़ में 8 से 11 अक्षर होते हैं जिसमें बैंक, देश, स्थान अथवा शहर की जानकारी शामिल होती है।
स्विफ्ट के विकल्प
वैसे तो स्विफ्ट एक वैश्विक भुगतान प्रणाली है लेकिन इसपर अमेरिका और यूरोपीय यूनियन का अधिक प्रभाव है। इस प्रभाव को कम करने के लिए रूस के केंद्रीय बैंक ने अंतरराष्ट्रीय लेनदेनों के लिए स्विफ्ट जैसी एक प्रणाली एसपीएफएस (SPFS) शुरू किया था। स्विफ्ट के बाद एसपीएफएस दूसरी सबसे बड़ी वैश्विक भुगतान प्रणाली बन गयी है। भारत सहित ईरान, चीन, जर्मनी, कजाकिस्तान, आर्मेनिया, बेलारूस, किर्गिस्तान, और स्विट्जरलैंड के कई बैंक एवं वित्तीय संस्थान इसका उपयोग कर रहे हैं।
इसी प्रकार चीन ने बेल्ट एंड रोड इनिसिएटिव (BRI) योजना में शामिल देशों को अमेरिका पर निर्भरता कम करने के उद्देश्य से क्रॉस बॉर्डर इंटरबैंक पेमेंट सिस्टम (CIPS) शुरू किया था। चीन स्विफ्ट के विकल्प के तौर पर सीआइपीएस को वैश्विक पेमेंट का एक बड़ा साधन बनाने में प्रयासरत है।
यह भी पढ़ेंः Bank Crisis in China: अमेरिका के बाद अब चीन की बैंकिंग व्यवस्था पर संकट?
-
38 साल की फेमस एक्ट्रेस को नहीं मिल रहा काम, बेच रहीं 'ऐसी' Photos-Videos, Ex-विधायक की बेटी का हुआ ऐसा हाल -
Gold Silver Price Today: सोना चांदी धड़ाम, सिल्वर 15,000 और गोल्ड 4000 रुपये सस्ता, अब इतनी रह गई कीमत -
Silver Rate Today: चांदी फिर हुई सस्ती, अचानक 11,000 गिरे दाम, दिल्ली से पटना तक ये है 100 ग्राम सिल्वर का रेट -
3 शादियां कर चुकीं 44 साल की फेमस एक्ट्रेस ने मोहनलाल संग शूट किया ऐसा इंटीमेट सीन, रखी 2 शर्तें और फिर जो हुआ -
साथ की पढ़ाई, साथ बने SDM अब नहीं मिट पा रही 15 किलोमीटर की दूरी! शादी के बाद ऐसा क्या हुआ कि बिखर गया रिश्ता? -
Iran Israel War: 'भारत युद्ध रुकवा सकता है', खामेनेई के दूत ने कही ऐसी बात, टेंशन में ट्रंप -
Khushbu Sundar: इस मुस्लिम नेता के हिंदू पति की राजनीति में एंट्री, कभी लगा था Love Jihad का आरोप -
Gold Rate Today: ईरान जंग के बीच सोना में भारी गिरावट, अबतक 16000 सस्ता! 22k और 18k का अब ये है लेटेस्ट रेट -
Balen Shah Nepal PM: पीएम मोदी के नक्शेकदम पर बालेन शाह, नेपाल में अपनाया बीजेपी का ये फॉर्मूला -
Uttar Pradesh Petrol-Diesel Price: Excise Duty कटौती से आज पेट्रोल-डीजल के दाम क्या? 60 शहरों की रेट-List -
27 की उम्र में सांसद, अब बालेन सरकार में कानून मंत्री, कौन हैं सोबिता गौतम, क्यों हुईं वायरल? -
KBC वाली तहसीलदार गिरफ्तार, कहां और कैसे किया 2.5 करोड़ का घोटाला? अब खाएंगी जेल की हवा












Click it and Unblock the Notifications