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Indian Wheat for Afghanistan: तीन सालों में भारत ने अफगानिस्तान भेजा डेढ़ लाख टन गेहूं

बीते तीन सालों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अफगानिस्तान को अलग अलग किश्तों में कुल 145,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजने का वादा किया है। इसमें से 115,000 मीट्रिक टन गेहूं 2020 और 2022 में वहां भेजा जा चुका है।

India sent 1 5 lakh tonnes of wheat to Afghanistan in three years

भारत सरकार ने ईरान स्थित चाबहार बंदरगाह के जरिए अफगानिस्तान को अतिरिक्त 20,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजने का निर्णय लिया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार अफगानिस्तान में वर्तमान मानवीय स्थिति से निपटने के लिए यह फैसला लिया गया है। 7 मार्च 2023 को नई दिल्ली में अफगानिस्तान से संबंधित भारत-मध्य एशिया संयुक्त कार्य समूह की पहली बैठक में भारत ने अफगानिस्तान की मौजूदा राजनीतिक, सुरक्षा और मानवीय स्थिति के बारे में चर्चा कर यह निर्णय लिया।

भारत की ओर से मिलने वाली यह सहायता बड़े पैमाने पर अफगानिस्तान में लोगों की मदद करेगी। भारत के इस फैसले का तालिबान ने स्वागत किया है। तालिबान की ओर से कहा गया है कि इस तरह का कदम दोनों देशों के बीच विश्वास को बढ़ाएगा।

चाबहार के जरिये पहले भी भेजा गेंहू
बता दें कि ईरान के इस बंदरगाह का इस्तेमाल अतीत में अफगानिस्तान को सहायता भेजने के लिए किया जाता रहा है। हालांकि, तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार ऐसा होगा, जब भारत इस रास्ते से अफगानिस्तान को मदद भेजेगा। दरअसल, साल 2020 में भी भारत ने अफगानिस्तान को मानवीय सहायता के रूप में 75,000 मीट्रिक टन गेहूं चाबहार बंदरगाह के जरिये भेजा था।

पहले भी भारत ने भेजी है मदद
अगस्त 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान का शासन संभाला तो वहां खाद्यान्न का संकट था। तब भारत ने अक्टूबर 2021 में प्रस्ताव दिया था कि वह मानवीय सहायता के तौर पर पाकिस्तान के रास्ते (सड़क मार्ग) से 50,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजने के लिए तैयार है। औपचारिक बातचीत के बाद, पाकिस्तान ने नवंबर 2021 में हरी झंडी दे दी और फरवरी 2022 से भारत से गेहूं से भरे ट्रक कई खेपों में पाकिस्तान के रास्ते अफगानिस्तान पहुंचने लगे।

हालांकि, पाकिस्तान में भीषण बाढ़ आ जाने के कारण भारत निर्धारित अवधि में केवल 40,000 मीट्रिक टन गेहूं ही भेज पाया। इस दौरान भारत ने 10 खेपों में 50 टन दवाई, 5 लाख डोज कोविड वैक्सीन, ठंड के कपड़े और 28 टन राहत सामग्री भी भेजी थी।

इसके बाद भारत सरकार ने बाकी के बचे 10,000 मीट्रिक टन गेहूं भेजने के लिए पाकिस्तान से रास्ता देने का अनुरोध किया। मगर भारत-पाक के बीच तनाव को लेकर पाकिस्तान ने समय सीमा नहीं बढ़ाई। जिसके बाद, अगस्त 2022 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी प्रतिनिधि रुचिरा कंबोज ने कहा कि भारत ने अब तक अफगानिस्तान को पाकिस्तान के रास्ते 40,000 मीट्रिक टन गेहूं, दवाईंयां, वैक्सीन व अन्य जरूरत की चीजों को भेजा है।
पाकिस्तान द्वारा गतिरोध कायम करने के बाद, भारत ने गेहूं सहायता का उचित और न्यायसंगत वितरण सुनिश्चित करने का एक विकल्प तलाशना शुरू किया। अतः भारत सरकार ने अफगानिस्तान के भीतर गेहूं के वितरण के लिए संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (UNWFP) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसी समझौते में 10,000 मीट्रिक टन गेहूं की आपूर्ति भी शामिल की गयी।

संयुक्त राष्ट्र विश्व खाद्य कार्यक्रम (UNWFP) क्या है?
विश्व खाद्य कार्यक्रम एक तरह से खाद्य सहायता के लिए संयुक्त राष्ट्र की शाखा है। जो दुनियाभर में भूख को खत्म करने और खाद्य सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए काम करती है। ये आपातस्थिति में लोगों के जीवन को बचाने हेतु खाद्य सहायता प्रदान करता है, यह पोषण स्तर में सुधार करने हेतु समुदायों के साथ मिलकर कार्य करता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा मानवीय संगठन है। वहीं भारत खाद्य और कृषि संगठन (FAO) और विश्‍व खाद्य सुरक्षा समिति (CFS) का सदस्य है। जो संयुक्त राष्ट्र के ही अंग हैं और इन सभी संगठनों के कार्यों की निगरानी यूएनडब्लूएफपी (UNWFP) ही करता है।

भारत ने कब-कब अफगानिस्तान को भेजा गेहूं
50,000 मीट्रिक टन गेहूं के अलावा, भारत सरकार ने साल 2020 में भारत ने कोविड-19 चुनौती से निपटने के लिये 20 टन से अधिक दवाएं, अन्य उपकरण के साथ-साथ 75,000 मीट्रिक टन गेहूं अफगानिस्तान को भेजा था।
इससे पहले, जनवरी 2009 में जब अफगानिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति हामिद करजई भारत की यात्रा पर थे। तब अफगानिस्तान खाद्यान्न समस्या से जूझ रहा था। तब भारत ने अफगानिस्तान को इससे उबरने के लिए 250,000 मीट्रिक टन गेहूं के उपहार की घोषणा की थी। इसके तहत भारत तब से वहां के 34 प्रांतों के 20 लाख स्कूली बच्चों को विश्व खाद्य कार्यक्रम के तहत खाना उपलब्ध कराता था।

अफगानिस्तान में खाद्य समस्या?
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) ने अफगानिस्तान में भूख और गरीबी को लेकर एक रिपोर्ट जारी की है। जिसके मुताबिक अफगानिस्तान में लगभग 11 मिलियन लोग खाद्य असुरक्षा का सामना कर रहे हैं। देश की 97 प्रतिशत आबादी गरीबी में जीवन यापन कर रही है। हर साल लगभग 250,000 लोग बाढ़, सूखा, हिमस्खलन, भूस्खलन और भूकंप जैसी पर्यावरणीय आपदाओं के विनाशकारी प्रभावों का शिकार होते हैं।

मार्च 2022 में संयुक्त राष्ट्र रेजिडेंट कोऑर्डिनेटर डॉ. रमीज अलकबरोव, जो संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन के उप प्रमुख भी हैं। उनके अनुसार 95 प्रतिशत अफगान नागरिकों को खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं मिल रहा है। वहीं जहां महिला प्रधान परिवार है, वहां यह संख्या लगभग 100 प्रतिशत तक बढ़ गयी है। साल 2022 में जारी ग्लोबल हंगर इंडेक्स के मुताबिक अफगानिस्तान वैश्विक भुखमरी में 121 देशों की लिस्ट में 109वें स्थान पर है।

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