LPG Cylinder Price: कैसे तय होती है एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमतें और क्यों बढ़ रहे हैं दाम
एक बार फिर से रसोई गैस की कीमतों में 50 रुपये का इजाफा हुआ है। महंगाई की मार के बीच आखिर कौन बढ़ा रहा है इसकी कीमत और क्यों?

गैस वितरण कंपनियों ने रसोई गैस की कीमतों में बड़ा इजाफा किया है। घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 50 रुपये बढ़ा दी गई है। रसोई सिलेंडर में ये इजाफा करीब 8 महीनों के बाद देखने को मिला है। इस हिसाब से देखें तो दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत अब 1103 रुपये हो गयी है, जबकि पहले इसका दाम 1053 रुपये था। मुंबई में सिलेंडर 1052.50 रुपये के बजाय 1102.5 रुपये, कोलकाता में 1079 रुपये की जगह 1129 रुपये और चेन्नई में इसकी कीमत 1068.50 रुपये से बढ़ाकर 1118.5 रुपये हो गयी है।
घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के साथ-साथ 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर के दाम में 350.50 रुपये का बड़ा इजाफा किया गया है। एलपीजी की बढ़ी हुई कीमतें आज 1 मार्च 2023 से लागू हो गई हैं। दरअसल भारत में प्रत्येक महीने की पहली तारीख को ईंधन कंपनियां एलपीजी समेत अपने सभी उत्पादों का नया रेट तय करती हैं। हर महीने की एक तारीख को ही कीमतों में इजाफा या गिरावट का पता चलता है। अब थोड़ा डिटेल में समझते हैं कि आखिर एलपीजी गैस के दाम कौन तय करता है और किस आधार पर इसकी कीमत में इजाफा होता है?
कैसे तय होती है सिलेंडर की कीमत?
देश में गैस सिलेंडर की आपूर्ति का जिम्मा ऑयल एंड गैस कंपनियों जैसे इंडेन, एचपी और भारत गैस के पास है। ये कंपनियां अंतरराष्ट्रीय बाजार से रसोई गैस का कच्चा माल क्रूड ऑयल खरीदती हैं और जरूरतमंदों को उपलब्ध कराती हैं। दरअसल एलपीजी की कीमत 'इंपोर्ट पैरिटी प्राइस या IPP' के फार्मूले से तय होते हैं। यह प्राइस अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमत के हिसाब से तय होता है। क्योंकि भारत में अधिकांश गैस की सप्लाई आयात पर निर्भर है।
जैसे भारत में सऊदी अरब की कंपनी अरामको से गैस का आयात किया गया। अब इसमें गैस की कीमत के अलावा गंतव्य तक पहुंचाने की कीमत, इंश्योरेंस, कस्टम ड्यूटी और पोर्ट ड्यूटी जैसे चार्ज जुड़ जाते हैं। इसके अलावा, अमेरिकी डॉलर की कीमत पर भी निर्भर करता है कि रुपये के मुकाबले में डॉलर का प्राइस क्या चल रहा है? इस तरह से तेल पहुंचने के बाद देश के भीतर उसे लाने-ले जाने का खर्चा अलग से कंपनियां द्वारा जोड़ा जाता है।
इस पर कंपनी अपनी मार्केटिंग कॉस्ट, सिलेंडर भरने की कीमत, डीलर का कमीशन, जीएसटी के अलावा कुछ मुनाफा जोड़ती है। ये सब मिलाकर एलपीजी सिलेंडर की खुदरा कीमत तय होती है। वहीं एलपीजी सिलेंडर की कीमत हर राज्य और यहां तक शहरों में भी अलग-अलग हो सकती है। इसका मुख्य कारण है कि गैस सिलेंडर उपलब्ध कराने वाली एजेंसी अपने खर्चे जोड़ कर सिलेंडर उपलब्ध कराती है।
अमेरिकी डॉलर की भूमिका क्या है
देश में एलपीजी गैस की कीमतों के बढ़ने का एक सबसे बड़ा कारण रुपया का डॉलर के मुकाबले कमजोर होना भी है। वहीं रूस-यूक्रेन जंग के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतों की बढ़ने की वजह से एलपीजी गैस की ढुलाई और सप्लाई चेन पर भी असर पड़ा है। इस कारण गैस सिलेंडर की कीमतें पिछले कुछ समय से लगातार बढ़ रही हैं।
फिर सरकार की क्या है भूमिका?
सरकार की यहां पर भूमिका बस इतना होती है कि वह इनकी बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखें और कीमत ज्यादा हो तो हस्तक्षेप करें और उसके लिए सरकार को अपनी तरफ से जेब ढीली करनी पड़ती है। वो भी सब्सिडी के माध्यम से, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि घरेलू गैस सिलेंडर की सब्सिडी ढाई साल पहले बंद की जा चुकी है। साल 2020 में कोरोना महामारी की पहली लहर के दौरान सरकार ने जून से ही गैस सिलेंडर पर मिलने वाली सब्सिडी को बंद कर रखा है। जून 2020 से रसोई गैस सब्सिडी के रूप में बैंक खातों में कोई सब्सिडी ट्रांसफर नहीं की गई है।
हालांकि, उज्जवला योजना के तहत जिन लोगों को गैस सिलेंडर दिये गये थे, उन्हें सिर्फ 200 रुपये की सब्सिडी दी जा रही है। वहीं फिलहाल सरकार ने सब्सिडी देने का जो फॉर्म्यूला अपनाया है वो डायरेक्ट कैश ट्रांसफर का है, मतलब आप सिलेंडर बिना सब्सिडी के रेट पर खरीद लें और सरकार आपके खाते में सब्सिडी का पैसा डाल देती है। वहीं गैस की कीमत के हिसाब से सब्सिडी का अमाउंट भी हर महीने की पहली तारीख पर रिवाइज होता है।












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