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Exam Stress: क्या परीक्षा का तनाव आप पर हो रहा हावी, जानें एग्जाम स्ट्रेस कम करने के उपाय

Exam Stress: 'एग्जाम', यह शब्द ही अपने आप में इतना खतरनाक है कि इससे मेहनती से मेहनती छात्र भी एक बार डर जाते हैं। कोई छात्र कितनी भी पढ़ाई क्यों ना करता हो लेकिन जब एग्जाम नाम आता है, तो एक बार तो वो भी चिंता में पड़ जाता है।

परीक्षा का समय वह है जब छात्रों की चिंता बढ़ जाती है, घबराहट होने लगती है और स्ट्रेस का तो पूछो ही मत। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि देश में केवल आप ही एग्जाम दे रहे हैं, करोड़ों विद्यार्थी हर साल एग्जाम में बैठते हैं, तो आप अकेले तो है नहीं। लेकिन अगर आप एग्जाम की बहुत चिंता कर रहे हैं और उससे डर रहे हैं, तो यह लेख पढ़िए। इसमें हमने शिक्षकों, साइकोलॉजिस्ट और पूर्व छात्रों से बात की है। आपका डर दूर करने और एग्जाम के स्ट्रेस से छुटकारा पाने की ओर एक कदम बढ़ाते हैं।

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एग्जाम के स्ट्रेस को समझें

तो सबसे पहले यह समझिए कि एग्जाम का स्ट्रेस सिर्फ एग्जाम से पहले घबराहट महसूस करने से कहीं ज्यादा है। जब फिजिकल, इमोशनल, और साइकोलॉजिकल फैक्टर्स एक साथ आ जाते हैं, तो ये आप पर कहर बरपा सकते हैं। तो इससे अच्छा यह है कि इनको साथ में आने का मौका ही ना दिया जाए। तो अब आप पूछेंगे कि इनको साथ में आने से कैसे रोका जाए, इसका एक ही इलाज है कि पढ़ाई करते समय अपने मन को फ्रेश रखे, जैसे थोड़ी देर पढ़ाई करने के बाद थोड़ी रेस्ट कर ली, कुछ देर बाहर चले गए, दोस्तों या घर वालों के साथ थोड़ी बातें कर ली, आदि।

हमने इस मामले में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की अच्छी जानकारी रखने वाले साइकोलॉजिस्ट डॉ. जयंत पटेल से बात की, उन्होंने बताया कि एग्जाम में अच्छा परफॉर्म करने के लिए स्ट्रेस होना बहुत साधारण बात है और यह स्वाभाविक है। छात्रों का ये स्ट्रेस कई तरीकों से देखा जा सकता है, जिसमें चिड़चिड़ापन, पढ़ाई पर ध्यान नहीं दे पाना, यहां तक की सिर दर्द या पेट दर्द जैसे शारीरिक लक्षण भी शामिल है।

जो एग्जाम दे रहा है, वो इस बारे में बेहतर बता पाता है...

एग्जाम के स्ट्रेस के बारे में अधिक जानकारी लेने के लिए हमने उदयपुर के सेंट पॉल स्कूल में पढ़ रहे दीक्षांत जैन से बात की जो अपनी 12वीं क्लास की बोर्ड परीक्षा दे रहे हैं। दीक्षांत ने कहा, "सच कहूं तो यह बहुत ज्यादा मुश्किल है। पढ़ने के लिए तो बहुत कुछ है लेकिन ऐसा लगता है कि इतना बड़ा सिलेबस है कि पढ़ाई को जितना समय दो, वो कम है। कभी-कभी मैं डर जाता हूं, जब मैं सोचता हूं कि मुझे अभी तक क्या-क्या पढ़ना बाकी है। मुझे इसकी खुशी नहीं है कि मैंने कितना पढ़ लिया है, मुझे डर इस बात का है कि मैंने क्या नहीं पढ़ा है।"

दीक्षांत के एक साथी, अर्हम से बात करने पर उन्होंने बताया कि "मुझ पर प्रेशर एग्जाम में पास होने का नहीं, टॉप करने का है। उन्होंने बताया कि प्रेशर तो इतना ज्यादा है कि कभी-कभी खुद से चिढ़ मचने लग जाती है और आंसू निकल जाते हैं।"

शिक्षकों का क्या कहना है

छात्रों के दूसरे माता-पिता, अर्थात 'शिक्षक', उन्हें एग्जाम के स्ट्रेस से निकालने में बहुत अहम भूमिका निभाते हैं। हमने इस मामले में जयपुर के 'द स्टडी सीनियर सेकेंडरी स्कूल' की साइंस की टीचर प्रियंका वर्मा से बात की। छात्रों का स्ट्रेस कम करने के लिए उन्होंने कहा कि अगर एग्जाम के स्ट्रेस से बाहर आना है, तो उसकी चाबी तैयारी के अंदर ही छुपी है।

अगर छात्रों को स्ट्रेस से छुटकारा पाना है, तो उनको समय रहते एग्जाम की तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, एग्जाम आने का इंतजार नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि छात्रों को टाइम टेबल बनाकर और अपने सिलेबस को हिस्सों में बांट कर एग्जाम की तैयारी करनी चाहिए। वर्मा ने यह भी बताया कि शिक्षकों के रूप में हमें ऐसा माहौल बनाना चाहिए, जहां छात्र अपना स्ट्रेस और चिंता हमारे सामने बिना किसी संकोच बता सके, जिससे उनका स्ट्रेस कम होगा।

भारतीय तकनीक है एग्जाम के स्ट्रेस का उपाय

एग्जाम के पहले होने वाला स्ट्रेस कम करना दो मिनट में मैगी बनाने जितना आसान नहीं है, लेकिन ऐसा नहीं है कि यह स्ट्रेस कम नहीं किया जा सकता। आपको बता दें कि पढ़ने से पहले गहरी सांस लेकर, मेडिटेशन और योग कर के छात्र एग्जाम के दबाव के बीच भी अपने दिमाग को शांत रख सकते हैं और पढ़ाई पर फोकस कर सकते है।

गीतिका, एक बी.टेक. छात्रा है, जिन्होंने कोरा पर अपनी 12वीं बोर्ड के एग्जाम का अनुभव बताया, जिसमें उन्होंने लिखा कि मैं पढ़ाई शुरू करने से पहले गहरी सांस लेती थी, मेडिटेशन करती थी और थोड़ा सा समय अपने दिमाग में चल रही बातों को भुलाने के लिए देती थी। और उसके बाद मैं पढ़ाई पर बहुत अच्छे से फोकस कर पाती थी। गीतिका ने बताया कि ऐसा करने की राय उन्हें उनकी साइकोलॉजिस्ट ने दी।

जितनी पढ़ाई जरूरी उतना स्वास्थ्य भी

शायद ही ऐसा कोई विद्यार्थी होगा जो चाहता होगा कि उसके एग्जाम में अच्छे मार्क्स नहीं आए, लेकिन पढ़ाई के साथ-साथ स्वास्थ्य पर ध्यान देना भी जरूरी है। नोएडा में प्रैक्टिस कर रही चाइल्ड साइकियाट्रिस्ट डॉ. गरिमा मेहता का कहना है कि छात्रों को सेल्फ-केयर पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। डॉ. गरिमा कहती हैं कि एग्जाम के दौरान स्ट्रेस कम करने के लिए छात्रों को जरूरी नींद लेना, पौष्टिक भोजन खाना, रिफ्रेश होना, और खेल-कूद का हिस्सा बनना बहुत जरूरी है।

डॉ. गरिमा का मानना है कि इसमें माता-पिता को भी छात्रों का पूरा साथ देना चाहिए। जब हमने दीक्षांत से बात की, तब उन्होंने बताया था कि जब भी उनको एग्जाम का बहुत ज्यादा स्ट्रेस होता है, तो वो जूते पहनते हैं और फुटबॉल खेलने पहुंच जाते हैं, और जब वो खेल कर आते हैं, तब उनका दिमाग बिल्कुल तंदुरुस्त होता है, जिससे उनको पढ़ने में आसानी होती है।

स्ट्रेस का समाधान निकालना अकेले के लिए मुश्किल

जब छात्र एग्जाम के स्ट्रेस में होते हैं तब किसी से मदद मांगना ही सबसे अच्छा निर्णय होता है। फिर भले ही वो किसी भरोसेमंद दोस्त से बात करना हो, किसी टीचर से मदद लेना हो या किसी साइकोलॉजिस्ट की राय लेना हो, किसी को भी एग्जाम के स्ट्रेस का अकेले हल निकालने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

डॉ. जयंत का कहना है कि स्ट्रेस को कम करने के लिए किसी से मदद मांगना कोई गलत बात नहीं है, और ना ही इससे आप छोटे हो जाओगे। उन्होंने बताया कि चाहे आप पढ़ाई से संबंधित चिंता का सामना कर रहे हो या ऐसा लग रहा हो कि मुझे किसी खास से बात करने की जरूरत है, तो जरूर उस राह पर कदम आगे बढ़ाएं।

एग्जाम को अपने ऊपर हावी ना होने दें

यह बात हमेशा ध्यान रखें कि एग्जाम का स्ट्रेस बोझ बनकर आपके सिर पर हावी ना हो जाए, वो कहते हैं ना "ए सिंगल पीस ऑफ पेपर कैन्नॉट डिसाइड माय फ्यूचर"। वैसे लाइन सही भी है। डॉ. जयंत ने हमारे जरिए छात्रों को ये याद दिलाने के लिए कहा कि एग्जाम मात्र एक जरिया है यह जानने का कि आपने साल भर में कितनी पढ़ाई की है। और आपके भविष्य को किसी भी ग्रेड या फिर स्कोर से डिसाइड नहीं किया जा सकता। हालांकि, डॉ. जयंत यह भी कहते हैं कि हमेशा अपने स्कोर को इंप्रूव करने की कोशिश करें, एक ही स्कोर पर ना टिके रहे या उससे नीचे ना चले जाए।

ये कुछ प्रमुख बातें हैं जिनका विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों को ध्यान रखना है और इन्हीं बातों के माध्यम से विद्यार्थी एग्जाम के पहले होने वाले स्ट्रेस से छुटकारा भी पा सकते हैं। क्योंकि अगर उसका स्ट्रेस आपके सिर पर हावी हो गया तो स्थिति में सुधार तो भूलिए, स्थिति और खराब हो सकती है। इस बात का भी हमेशा ध्यान रखें कि अगर आप स्ट्रेस का सामना करते हैं तो अपने माता-पिता, टीचर, या खास दोस्त से जरूर इस मामले में बात करें, वो निश्चित रूप से आपके स्ट्रेस को कम करने में मदद करेंगे।

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