Gold Price: हर दिन कैसे तय होते हैं भारत में सोने के दाम?

शादियों का सीजन चल रहा है और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा हैं। क्या आपको पता है कि आखिर सोने के दाम कौन तय करता है?

वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक भारत, सोने का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है। स्टैटिस्टा वेबसाइट के मुताबिक भारत ने साल 2022 में कुल 3440.94 बिलियन रुपयों का सोना विदेशों से आयात किया था। जबकि 2021 में सोने का आयात 2542.88 बिलियन रुपये का था। यानी एक साल में लगभग 35 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गयी है।

आयात किए गए सोने का कुछ उपयोग आभूषण बनाकर निर्यात करने में भी होता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के अनुसार पिछले एक दशक में, भारत का लगभग 90 प्रतिशत आभूषण निर्यात सिर्फ पांच प्रमुख बाजारों में हुआ है। उसमें संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, हांगकांग, सिंगापुर और ब्रिटेन शामिल हैं।

अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग रेट क्यों?
बैंक बाजार डॉट काम के मुताबिक 23 फरवरी को 22 कैरेट प्रति 10 ग्राम सोना 53,100 रुपये में बिका। जबकि दो दिन बाद यह दिल्ली के बाजारों में 52,800 रुपये बिका। वहीं 24 कैरेट सोने की बात करें तो 23 फरवरी को 55,760 रुपये प्रति 10 ग्राम के रेट से बिका और फिर दो दिन बाद 55,440 रुपये की कीमत से बिका।
इसी तरह बेंगलुरु की बात करें तो सोने की कीमत 23 फरवरी को प्रति 10 ग्राम 22 कैरेट सोना 53,150 रुपये में बिका जबकि अगले दिन इसकी कीमत 52,850 रुपये हो गयी। जबकि 24 कैरेट सोना 23 फरवरी को 55,810 रुपये प्रति 10 ग्राम था जोकि 25 फरवरी को 55,490 रुपये प्रति 10 ग्राम से बिका।

इसी बीच मालाबार गोल्ड के मुताबिक 25 फरवरी को पूरे भारत में सोने की कीमत 5,150 प्रति ग्राम रखी गई है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर अलग-अलग राज्यों में सोने की कीमतें अलग-अलग क्यों हैं? वहीं कोई एक खास कंपनी एक ही दर से पूरे भारत में सोने बेच रही है? आखिर माजरा क्या है? चलिए समझते हैं कि आखिर कैसे तय होती है सोने और चांदी की कीमत? आपको बता दें कि कई तरह से तय होते हैं सोने और चांदी के दाम।

सोने का भाव तय कौन करता है
दुनियाभर में लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन (LBMA) द्वारा सोने की दर तय की जाती है। वह अमेरिकी डॉलर में सोने की कीमतों को प्रकाशित करता है। जो बैंकरों और बुलियन व्यापारियों के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क के रूप में कार्य करता है।

भारत में, इंडियन बुलियन ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) सोने की अंतरराष्ट्रीय कीमतों को मानता है और उसमें आयात शुल्क और अन्य लागू टैक्स को जोड़ता है। इसके बाद बुलियन विक्रेताओं का यह संगठन तय करता है कि किस दर पर सोना रिटेल विक्रेताओं को दिया जाएगा। इंडियन बुलियन व्यापारी सोने को खरीदने और बेचने का औसत लेता है और दिल्ली या अन्य शहरों में सोने का भाव (Gold rate in cities) निर्धारित करने के लिए स्थानीय टैक्स को जोड़कर समायोजित करता है।

भारत में कौन तय करता है सोने का भाव?
भारत में सोने की कीमतें वायदा बाजार (फ्यूचर मार्केट) और हाजिर बाजार (स्पॉट मार्केट) दोनों ही तरह से तय होती हैं। दरअसल फ्यूचर और स्पॉट प्राइस दोनों कीमतें अलग-अलग होती हैं। आम उपभोक्ताओं का वास्ता स्पॉट प्राइस से पड़ता है। फ्यूचर प्राइस पूरी तरह से कारोबारियों के लिए होता है। यहीं पर सोने में सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिलता है। इसलिए मालाबार जैसी कंपनी फ्यूचर मार्केट से भाव तय करती है और वे पूरे भारत में अपने शो रूम (दुकानों) में एक ही रेट तय करती है। उसी रेट पर अपने यहां सोना बेचती है।

ऐसे तय होता है सोना और चांदी का दाम
भारत में सोने की कीमत वायदा बाजार की ट्रेडिंग के हिसाब से तय होती है। जिस दिन ट्रेडिंग होती है उसकी आखिरी क्लोजिंग को ही अगले दिन के लिए बाजार भाव मान लिया जाता है। हालांकि, ये सेंट्रल प्राइज होता है। वहीं अगले दिन बाजार खुलने पर सर्राफा संगठनों द्वारा लोकल स्तर पर मीटिंग होती है और ट्रेडिंग के क्लोजिंग रेट के अनुसार जीएसटी, मेकिंग चार्ज, कस्टम ड्यूटी, वैट सब को निर्धारित करके एक रेट तय की जाती है। इसलिए हर रोज अखबारों में सोना-चांदी के सर्राफा व्यापारियों द्वारा अलग-अलग कीमतें तय होती हैं। यही एक कारण है जिस वजह से सोने की कीमत में राज्य दर राज्य भी अंतर होता है। क्योंकि सभी राज्यों के चार्ज और टैक्स अलग होते हैं।

सुनार भी लेते हैं कई तरह के चार्ज?
इन सबके बाद सुनार अथवा व्यापारी कई तरह के चार्ज इसमें जोड़ते हैं। ज्वेलरी, कॉइन और बार की अलग-अलग लेबर कॉस्ट होती है। इसके अलावा मेकिंग चार्जेज लगते हैं। इसमें गहने-कॉइन-गोल्ड बार बनाने में बर्बाद होने वाले सोने को गोल्ड वेस्टेज कहते हैं। अब ग्राहक से ही सुनार, उस वेस्टेज का चार्ज लेते हैं। जितना मुश्किल डिजाइन होता है उसमें वेस्टेज भी उतना ही जाता है। कोई भी गहना सिर्फ सोने से नहीं बनता। सोना बहुत ही कमजोर धातु है, इसलिए गहने बनाने में इसमें अन्य धातु जैसे चांदी, तांबा और जिंक मिलाते हैं। जिसे अलॉय कहते हैं। इसकी कीमत भी ग्राहक को ही देनी पड़ती है। इन सब चार्जेज से सुनार अपने स्टाफ की सैलरी, अपना फायदा, दुकान या स्टोर का खर्च और ब्रांडिंग और विज्ञापन का खर्च भी निकालता है।

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