जानते हैं देर से मां बनना कभी-कभी अच्छा भी होता है..

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अगर महिला को 32 साल के अंदर पहला बच्चा हो गया है तो अगर वो 36-37 साल में दूसरा बच्चा करती है तो भी उसे और उसके बच्चे को दिक्कत नहीं होती है। लेकिन कहते हैं ना हर चीज के दो पहलू होते हैं। एक अच्छा और एक बुरा, जहां मातृत्व का सुख देर से लेने वाली महिलाओं को गर्भधारण और गर्भावस्था को संभालने के लिए काफी मुश्किलें आती हैं वहीं दूसरी ओर शोधकर्ताओं ने पाया है कि जो महिलाएं देर से मां बनती हैं, उनका जीवनकाल अपेक्षाकृत लंबा होने की संभावना है। शोध में पाया गया कि आखिरी बच्चे के समय मां की अधिक उम्र का संबंध असामान्य रूप से लंबी उम्र तक जीवित रहने से है।
न्यूयार्क में देर से मातृत्व का उम्र से संबंध का पता लगाने के लिए ऐसी 462 पर शोध हुआ जिनमें एक ओर 33 साल की उम्र में आखिरी बार मां बनने वाली महिलाएं थी और दूसरी ओर 29 साल की उम्र में आखिरी बार मां बनने वाली महिलाएं थीं। यहां आपको बता दें कि यह मृत्युदर उन बच्चों पर लागू नहीं होती जो मां नहीं बनीं।
शोध के मुताबिक, कई अध्ययनों में अधिक उम्र में मां बनने और आसाधारण रूप से लंबी जिंदगी के तथ्यों का सबूत देते हैं। निरंतर प्रजनन स्वास्थ्य, लंबी उम्र में सहायक है।
द नॉर्थ अमेरिकन मेनोपॉज सोसाइटी के कार्यकारी निदेशक मारगेरी गास ने बताया, "हालांकि यह संबंध ध्यान देने योग्य है, लेकिन इन परिणामों के समर्थन के लिए अतिरिक्त अध्ययन करने की जरूरत है जो प्रजनन स्वास्थ्य पर विभिन्न आनुवांशिक प्रभावों की पहचान करे क्योंकि महिलाओं के उम्र संबंधी बीमारियों, बढ़ती उम्र पर भी इसका प्रभाव होने की संभावना है।" यह शोध 'मेनोपॉज' शोधपत्र में प्रकाशित हुआ है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं हुआ कि महिलाओं को लंबी उम्र के चक्कर में अपने शरीर की बाकी सारी चीजों पर ध्यान नहीं देना चाहिए बल्कि डॉक्टरों की सलाह पर अपनी हेल्थ के मुताबिक उसे संतान सुख लेना चाहिए।क्योंकि हर चीज का एक मुनासिब वक्त होता है।












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