Swaminarayan Sect: स्वामीनारायण संप्रदाय के अक्षरधाम मंदिर में ऋषि सुनक, जानें उसका इतिहास
Swaminarayan Sect: ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक जी20 की बैठक में भारत आए तो उन्होंने सम्मेलन के अलावा जिस जगह जाना पसंद किया, वह दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर है। सुनक रविवार की सुबह पत्नी के साथ अक्षरधाम मंदिर पहुंचे थे। सुनक की सनातन धर्म में आध्यात्मिक और धार्मिक आस्था है, यह किसी से छिपी नहीं है। पर अक्षरधाम, जिसे स्वामी नारायण मंदिर भी कहते हैं, के प्रति उन लोगों की भी आस्था है, जो हिंदू धर्म या मूर्ति पूजा को नहीं मानते। भारत के पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम, ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर, कतर की रानी शेख मोजाह बिन नसेर और सउदी अरब के प्रधानमंत्री शेख अब्दुल्ला जैसे सैकड़ों गैर हिंदू भी स्वामी नारायण मंदिर में जाने वालों में शामिल हैं।
गैर हिंदुओं के मंदिर में जाने भर की बात नहीं है, अक्षरधाम को लेकर उनके मन में उपजे भावों को जानना भी बेहद सुकूनदायक है। पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने कहा था - "यहां आकर मुझे ऐसा महसूस होता है कि मैं किसी और दुनिया में हूं। यह जगह शिक्षा, अनुभव और आत्म ज्ञान की है। अक्षरधाम मंदिर को देखकर मेरे अंदर यह आत्मविश्वास जगता है कि भारत जल्दी ही एक विकसित राष्ट्र बन जाएगा।" कतर की रानी ने दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर को देखकर कहा था - "मैं यहां का निर्माण देखकर आश्चर्यचकित हूं। यह मंदिर के इतिहास और संस्कृति का बखूबी बयान करता है। यह सभी धर्मों में एकता का दर्शन भी कराता है।"

इरान के पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद खातमी ने अक्षरधाम दिल्ली के दर्शन के बाद कहा था- "मैं धन्यवाद करता हूं कि मेरा परिचय भारत के इतिहास और उसकी संस्कृति से कराया गया। मेरा विश्वास है कि आपके इस ज्ञान से हम एक बेहतर और सबके लिए उपयुक्त विश्व का निर्माण कर सकेंगे।" ब्रिटेन के किंग चार्ल्स भी अक्षरधाम मंदिर दिल्ली का दर्शन कर चुके हैं। 2013 में भारत दौरे पर आए प्रिंस चार्ल्स ने कहा था- "मुझे नहीं लगता कि दुनिया में ऐसी चीज कहीं और मैंने देखी है। स्वामी नारायण मंदिर के जरिए भारत की संस्कृति और निर्माण आर्किटेक्चर को मैं अपनी ओर से दाद देता हूं।"
स्वामी नारायण मंदिर का इतिहास 400 साल से भी पुराना है। स्वामी नारायण जिन्हें सहजानंद भी कहते हैं, उत्तरप्रदेश के अयोध्या में 3 अप्रैल 1781 को अवतरित हुए थे। उनका प्रारंभिक नाम घनश्याम पांडे था। महज 11 साल की उम्र में ही घर छोड़ वेदांत शिक्षा व योग सिद्धि के लिए जगह जगह घूमते हुए वह गुजरात पहुंचे जहां उनकी मुलाकात स्वामी रामानंद से हुई, जिन्होंने उद्धव संप्रदाय का गठन किया था। स्वामी रामानंद की प्रेरणा से उन्होंने 1800 ईसवी में संन्यास ले लिया। स्वामी रामानंद ने उनका सहजानंद स्वामी के नाम से नया नामकरण किया।
21 वर्ष की उम्र में ही सहजानंद को स्वामी रामानंद ने अपना उत्तराधिकारी और उद्धव संप्रदाय का प्रमुख नियुक्त कर दिया। यही उद्धव संप्रदाय बाद में स्वामी नारायण संप्रदाय के रूप में प्रसिद्ध हुआ। स्वामी सहजानंद ने जीवन में कई चमत्कार किए। 1804 में उन्होंने अपने शिष्यों को स्वामीनारायण मंत्र का जाप करने को कहा। कहते हैं कि कई उनके शिष्य स्वामीनारायण का जाप करते करते समाधि में चले गए, जहां उनके ईष्ट का साक्षात उन्हें दर्शन हुआ। स्वामी नारायण के भक्त धीरे धीरे उन्हें कृष्ण का अवतार मानने लगें।
स्वामी नारायण के पहले मंदिर का निर्माण गुजरात के अहमदाबाद में 1822 में हुआ था, जिसमें भगवान कृष्ण के विविध स्वरूपों को दर्शाने वाली मूर्तियों की स्थापना की गई थी। दीवारों पर श्लोक और भजन आदि लिखे गए और बसंतपंचमी, कृष्णाष्टमी और होली जैसे सार्वजनिक त्यौहारों का आयोजन किया जाने लगा। उसके बाद पांच और मंदिर स्वामी नारायण के जीवन काल में ही बनाए गए।
अपनी मृत्यु से पहले स्वामी नारायण ने अपने आचार्यों के लिए दो गद्दी, एक अहमदाबाद में नर नारायण देव गद्दी और दूसरी वडताल में लक्ष्मी नारायण देव गद्दी, की स्थापना की। 1830 में एक दिन स्वामी नारायण ने अपने समर्थकों को बुलाया और यह घोषणा कर दी कि अब उनके शरीर को त्यागने का समय आ गया है। वे 1 जून 1830 को इस मृत्यु लोक को त्याग कर ईश्वर लोक प्रस्थान कर गए।
इस समय स्वामी नारायण संस्था पूरी दुनिया में फैली है। विश्व में कुल 1100 मंदिर और 3850 स्वामी नारायण केंद्र चल रहे हैं, जो भारतीय संस्कृति की पहचान बने हुए हैं। वे दुनिया भर में भगवान कृष्ण द्वारा महाभारत के युद्ध में अर्जुन को दिए गीता के उपदेशों को दुनिया के कोने कोने में फैला रहे हैं। स्वामी नारायण संस्था दर्जनों अस्पताल और स्कूल भी चला रही है। जिसमें कम खर्च पर अच्छी चिकित्सा और शिक्षा दी जा रही है।
लंदन स्थित स्वामी नारायण मंदिर भारत के बाहर दुनिया में सबसे बड़ा हिंदू मंदिर होने के कारण वर्ष 2000 में गिनिज वर्ल्ड बुक में दर्ज हुआ था। दिल्ली का अक्षरधाम मंदिर सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है। न्यूजर्सी अमेरिका का अक्षरधाम मंदिर भी दुनिया के सबसे बड़े मंदिरों में गिना जाता है। हाल ही में अबूधाबी में अक्षरधाम मंदिर बना है, वह भी 55000 वर्ग मीटर में है। प्रधानमंत्री मोदी की पहल पर मुस्लिम देश में बना यह अब तक का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर है।
अहिंसा का संदेश, एकता और भाईचारा का संबंध और सबके कल्याण के लिए काम कर रही स्वामी नारायण संस्था भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और धार्मिक प्रसिद्धि को पूरे विश्व में फैला रही है। अक्षरधाम मंदिर में पूजा करके ऋषि सुनक ने भी इसके प्रति अपनी आस्था प्रकट की है।
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