Diwali 2018: पटाखों-आतिशबाजी से जुड़ी 16 बातें जो आप नहीं जानते
बेंगलुरु। दिवाली के मौके पर देश भर में पटाखे जलाये जाते हैं। दीवाली की रात आसमान में आतिशबाजी और गली-मोहल्लों में धूम-धड़ाम। जाहिर है इस महापर्व का हिस्सा आप भी होंगे। चलिये इसी बात पर हम आपको बताते हैं पटाखों से जुड़ी वो बातें जो शायद आप नहीं जानते होंगे।
चलिए जानते हैं पटाखों स जुड़ी कुछ खास बातें

चीन में हुआ था अविष्कार
- पटाखों व आतिशबाजी का अविष्कार 7वीं सदी में चीन में हुआ था।
- पटाखों का सबसे बड़ा उत्पादक चीन है।
- दुनिया के 90 प्रतिशत पटाखे यहीं बनते हैं।
- अरब के लेखक हसन अल-रमाह ने 1240 में अपनी किताब में गन पॉवडर का जिक्र किया।

यदि आप सपने में पटाखे देखते हैं तो....
- पहली बार आतिशबाजी 1486 में इंग्लैंड के राजा हेनरी VII की शादी में हुई थी।
- यदि आप सपने में पटाखे देखते हैं तो इसका मतलब आप जल्द ही आकर्षण का केंद्र बनने वाले हैं। जीवन में उत्साह का आगमन होगा। सभी दु:ख दूर होंगे।
- कहा जाता है कि पटाखे जलाने से बुरी आत्माएं दूर भागती हैं।
- अब तक की सबसे बड़ी चॉकलेट आतिशबाजी ज्यूरिक में 2002 में जलाई गयी थी।
- ये 3 मीटर ऊंची, 1.5 मीटर चौड़ी, इसमें चॉकलेट भरी थी।
- वैज्ञानिक भी मानते हैं कि जानवरों को पटाखे पसंद नहीं होते हैं।
- ज्यादा पटाखों की आवाज में जानवर पागल भी हो सकते हैं।
- अब तक का सबसे बड़ा पटाखा रॉकेट पुर्तगाल में 2010 में लाया गया था। वह 13 किलो का था।
- पटाखे वाले रॉकेट की गति 150 मील प्रति घंटा तक होती है। पटाखे से निकलने वाले गोले 200 मीटर की दूरी तक जा सकते हैं।
- एक फुलझड़ी का तापमान करीब 1500 डिग्री सेंटीग्रेड होता है।
- 2006 में पुर्तगाल में एक ही रात में 66,326 आतिशबाजी-पटाखे जलाये गये थे। यह एक रिकॉर्ड है।
- पटाखों से जलने वाले आधे से ज्यादा 16 साल की उम्र से कम आयु के बच्चे होते हैं।
- नीले रंग की आतिशबाजी के लिये इस्तेमाल होने वाले धातु के लवण सबसे ज्यादा खतरनाक होते हैं। इनसे कैंसर भी हो सकता है।

सबसे बड़ी चॉकलेट आतिशबाजी

जानवरों को पसंद नहीं पटाखे

सबसे बड़ा रॉकेट

फुलझड़ी का तापमान

सिंथेटिक कपड़े में रखने पर
अगर आप सिंथेटिक कपड़े में लपेट कर पटाखे रख देते हैं, तो स्थाई ऊर्जा की वजह से वे अपने आप जल सकते हैं। तब आग की जरूरत नहीं पड़ती।

पटाखों से जलने वाले

सबसे देर तक आतिशबाजी
दुनिया में सबसे देर तक आतिशबाजी 22 घंटे तक हॉन्ग कॉन्ग में नये साल के उपलक्ष्य में 1996 में चली थी।
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