बिहार विधानसभा चुनाव- "महापैकेज" बनाम "महागठंधन"
पटना (मुकुन्द सिहं)। बिहार की जनता इस वक्त दोराहे पर खड़ी है। एक तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का "महापैकेज" है तो दूसरी तरफ लालू-नीतीश का "महागठबंधन"। जनता किसे चुने, यह सवाल अब भी टेढ़ी खीर बना हुआ है। चलिये दोनों का गहन अध्ययन करते हैं, ताकि तस्वीर साफ हो जाये और वोट देने में आसानी हो।
मोदी का महापैकेज
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चुनाव से ठीक पहले सवा लाख करोड़ रुपए के महापैकेज का ऐलान किया।
- इसमें 500 करोड़ रुपए में युवाओं के लिये विक्रमशिला विश्वविद्यालय की पुनर्स्थापना।
- 500 करोड़ बोधगया में आईआईएम की स्थापना के लिये।
- अप्रशिक्षित बेरोजगार युवाओं को कौशल विकास योजना के तहत 300 करोड़ रुपए।
- 25 हजार युवाओं को पावर सेक्टर में प्रशिक्षण देने के लिये कुल 1250 करोड़ रुपए।
- बिहार के युवाओं पर कुल 2550 करोड़ रुपए यानी महापैकेज का 2.04 प्रतिशत।
- राष्ट्रीय राजमार्गों की सड़कों के लिये 54,713 करोड़ 11 लाख रुपए का प्रावधान किया गया।
- पेट्रोलियम और नैचुरल गैस के नाम पर 21 हजार 476 करोड़ रुपए।
- किसानों के लिये 3094 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया।
- घर के किचेन में सीधे गैस पहुंच सके, इसके लिये 4460 करोड़ रुपए।
- पीएम के विशेष पैकेज में बच्चों के लिये कुछ नहीं किया गया।
- साथ ही शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर भी इस महापैकेज से बाहर है।
- वोट देने से पहले जनता एनडीए के नेताओं से पूछे कि सवा लाख करोड़ में अब और क्या-क्या आने वाला है।
लालू-नीतीश का महागठबंधन
- महागठबंधन जीता तो नीतीश कुमार फिर से बिहार के मुख्यमंत्री बनेंगे।
- विकास कार्यों में केंद्र से सही ट्यूनिंग बैठेगी या नहीं इसकी गारंटी नहीं।
- वादे के अनुसार 2020 तक राज्य के हर घर में शौचालय बनेगा और मुफ्त बिजली कनेक्शन दिया जायेगा।
- महिलाओं को आरक्षण मिलेगा। साथ ही अति पिछड़ा से लेकर तमाम पिछड़ी जातियों को आरक्षण दिया जायेगा।
- 4 लाख रुपए का एजूकेशन लोन दिया जायेगा, ताकि छात्र अच्छी शिक्षा प्राप्त कर सकें।
- प्रत्येक डिग्री कॉलेज व विश्वविद्यालयों में फ्री वाईफाई दिया जायेगा।
- 21-25 साल की उम्र के युवाओं को 1 हजार रुपए का भत्ता दिया जायेगा।
- सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिये 35 प्रतिशत सीटों पर आरक्षण होगा।
- 2020 तक हर घर तक पानी की पाइपलाइन बिछायी जायेगी।
- 500 करोड़ रुपए का एक फंड तैयार किया जायेगा, जिससे नये उद्यमियों को वित्तीय सहायता दी जायेगी।
- राज्य में पांच नये मेडिकल कॉलेज, पांच नर्सिंग स्कूल, हर जिले में एक नया इंजीनियरिंग कॉलेज, एक पॉलीटेक्निक और पैरा-मैडिकल संस्थान खोला जायेगा।
- महागठबंधन के आने पर यह सारी जिम्मेदारी केवल नीतीश कुमार की नहीं होगी, उनके साथ-साथ लालू यादव की भूमिका भी अहम होगी, भले ही वो चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।
कुल मिलाकर बिहार में विकास की परिभाषा यूनिवर्सल नहीं हो सकती है। यह एक अकाट्य सत्य है। खासकर ऐसी परिस्थिति में जबकि क्षेत्रीय विषमता केवल दिल्ली और पटना ही नहीं बल्कि पटना और शिवहर जिले के तक विस्तृत हो चुकी है। कहने का मतलब यह है कि दिल्ली में रहने वाले व्यक्ति के लिये विकास अलग और बिहार के सुदूर जिले के किसी गांव में रहने वाले व्यक्ति के लिये विकास का मतलब अलग होना तय है। ऐसे में कौन किसे वोट देगा, यह जनता ही तय कर सकती है।













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