Age of Consent: अभिनेता रसेल पर लगे आरोप, तो पश्चिम में भी शुरू हुई 'सहमति की उम्र' पर बहस
Age of Consent: हाल ही में ब्रिटेन के मशहूर हास्य अभिनेता और सोशल इन्फ्लूएंसर रसेल ब्रांड पर चार महिलाओं ने गंभीर आरोप लगाए। आरोप यह था कि जब वह अपनी सफलता की ऊंचाइयों पर थे, तब उन्होंने चार अलग-अलग लड़कियों और महिलाओं के साथ यौन रिश्ते कायम किये। इन चार में एक रिश्ता 16 साल की एक नाबालिग लड़की के साथ भी था।
'सहमति का शब्द' बना बड़ा सवाल
इन आरोपों को दुनिया भर की मीडिया में प्रमुखता से जगह मिली। ब्रिटिश समाचार संगठनों ने इस पर कई तरह की स्टोरी बनाई और मीडिया इन्वेस्टीगेशन के तहत कई दिनों तक इसको अलग-अलग एंगल से कवर किया। ब्रिटिश पुलिस इस हाई प्रोफाइल मामले की जांच कर रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि ऐसे काम में 'सहमति का शब्द' एक बड़ा सवाल की तरह खड़ा हो गया है।

एक उलझाऊ और विवादित मसला है एज गैप
बड़ा आरोप यह है कि तीस वर्ष से अधिक के रसेल ब्रांड ने 16 वर्ष की एक किशोरी के साथ यौन संबंध बनाए। दोनों की उम्र में काफी अंतर तो है ही, इस केस में पीड़िता नाबालिग भी है। ऐसे में क्या यह कानूनन और सामाजिक रूप से स्वीकार्य है। एज गैप एक उलझाऊ और विवादित मसला हो गया है। पीड़िता ने खुद के साथ यौन शोषण का आरोप लगाया है, जबकि रसेल का कहना है कि सबकुछ उसकी सहमति से हुआ है। एक अन्य पीड़िता ने भी आरोप लगाया कि उसके साथ बलात्कार किया गया, जबकि तीन अन्य ने उन पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। 16 साल की बालिका, जिसे कानूनी तौर पर नाबालिग माना जाता है और उसके कई अधिकारों के इस्तेमाल में उसके माता-पिता की सहमति की जरूरत होती, उसके साथ उसकी उम्र से दो गुनी उम्र के शख्स के इस तरह के संबंध बनाना और आपसी सहमति के नाम पर खुद को दोषमुक्त बताने को गंभीर मुद्दा के रूप में देखा जा रहा है।
नाबालिग की सहमति और नतीजे का असर
मुख्य मुद्दा यह भी है कि अगर सब कुछ सहमति से है तो इसकी क्या गारंटी है कि 16 साल की किशोरी अपने बारे में इतनी समझ रखती है कि वह अपने साथ वह क्रिया होने देने की अनुमति देती है। क्या वह उसके नतीजों और असर के बारे में वह अच्छी तरह से वाकिफ है। यह एक मनोवैज्ञानिक जांच के दायरे में आने वाली बात है और इस पर कानूनी फैसला और वस्तुस्थिति का आकलन दो अलग-अलग मुद्दे हैं।
यौन क्रिया और इंसानी जरूरत
यौन क्रिया एक प्राकृतिक जरूरत है जो जीव जगत के हर प्राणी और नस्ल में होती है। मानव सभी जीवों में उच्चतम विवेकवान है, लिहाजा वह हर क्रिया के साथ संस्कार, अनुशासन, संयम-असंयम के नियमों से बंधा होता है। प्राकृतिक और अप्राकृतिक क्रिया के बीच एक लकीर होती है, जो उसके कार्य को सही-गलत ठहराती है और सामाजिक स्वीकृति या अस्वीकृति तय करती है।
यौन क्रिया और पश्चिम का माहौल
पश्चिम के देशों में यौन क्रिया बहुत असामान्य नहीं है, और पारिवारिक माहौल में इस पर चर्चा होना भी सहज हो गया है। ब्रिटेन और अमेरिका समेत पश्चिम के कई देशों में भारत की ही तरह वयस्कता की उम्र 18 वर्ष ही है। यानी इससे कम उम्र के बच्चे नाबालिग माने जाएंगे, लेकिन ब्रिटेन और अमेरिका दोनों जगह कुछ मामलों में अब भी 21 वर्ष की उम्र से पहले कुछ अधिकार नहीं मिलते हैं। जैसे ब्रिटेन में किसी बच्चे को गोद लेने वाले की उम्र कम से कम 21 वर्ष होना अनिवार्य है।
सहमति की उम्र अलग अलग देशों में
नाइजीरिया में सहमति की सबसे कम उम्र है - केवल 11 वर्ष। नाइजीरिया के बाद फिलीपींस और अंगोला में सहमति की सबसे कम उम्र 12 साल है। बुर्किना फासो, कोमोरोस द्वीप समूह, नाइजर और सहरावी अरब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक जैसे देशों में सहमति की उम्र 13 वर्ष है।
जापान में सहमति की उम्र अभी बढ़ा कर 16 वर्ष की गई है। बांग्लादेश, ब्राज़ील, चीन, इटली और जर्मनी सहित लगभग 32 देशों में, सहमति की उम्र 14 वर्ष है। बहरीन में 21 और दक्षिण कोरिया में 20 वर्ष सहमति की आयु है, जो सबसे अधिक है। ईरान, अफगानिस्तान, कुवैत, मालदीव, पाकिस्तान, ओमान, फिलिस्तीन, सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और यमन जैसे देशों में सहमति की कोई उम्र नहीं है, क्योंकि यहां अविवाहित जोड़ों के बीच यौन संबंध निषिद्ध है।
विधि आयोग की पॉक्सो कानून पर राय
संयोग से जिस समय यह मुद्दा उठा, ठीक उसी दौरान भारत में विधि आयोग ने भी अपनी एक रिपोर्ट में इसी तरह के विषय पर अपनी राय दी। विधि आयोग की राय कर्नाटक हाईकोर्ट की उस मांग पर आई थी जिसमें यह पूछा गया था कि क्या सहमति की उम्र 18 से घटाकर 16 वर्ष कर दी जानी चाहिए। इस पर विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में सलाह दी है कि ऐसा बिल्कुल नहीं किया जाना चाहिए।
18 से 16 करने पर क्यों असहमत है लॉ कमीशन
विधि आयोग ने कहा कि सहमति की उम्र कम करने से बाल विवाह और तस्करी के खिलाफ लड़ाई पर गंभीर रूप से असर पड़ेगा और कई नई तरह की समस्याएं खड़ी हो जाएंगी। हालांकि आयोग ने यह भी कहा है कि 16 से 18 वर्ष की आयु के किशोरों की ओर से मौन स्वीकृति से जुड़े मामलों में स्थिति को सुधारने के लिए कुछ संशोधनों की जरूरत है।
भारत में क्या है नियम
भारत में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम यानी पॉक्सो कानून में यह व्यवस्था है कि 18 वर्ष से कम उम्र के किशोर या किशोरी से सहमति या असहमति किसी भी रूप में यौन संबंध बनाना अपराध है। अगर संबंध बनाने वाला और पीड़िता दोनों की उम्र 18 से कम है तो आरोपी पर पॉक्सो कानून के तहत केस चलेगा।
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