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Charlie Hebdo: शार्ली हेब्दो कार्टून पर फिर विवाद, पहले झेल चुका है आतंकी हमले

फ्रांस की मैग्जीन शार्ली हेब्दो एक बार फिर सुर्खियों में आ गई है। इस बार यह अपने मजाकिया अंदाज में धार्मिक नेताओं का मजाक उड़ाने के चलते ईरान के निशाने पर है।

Controversy again over Charlie Hebdo cartoon in French magazine

Charlie Hebdo: फ्रेंच भाषा की पत्रिका शार्ली हेब्दो की वैसे तो हर महीने में 50,000 प्रतियां बिकती हैं। शायद ही इसे कोई फ्रांस से बाहर पढ़ता होगा। मगर यह पत्रिका दुनिया भर की खबरों में बनी रहती है और हर साल इसे लेकर कोई न कोई विवाद जरुर छिड़ता है। इस बार पत्रिका में ईरान के सुप्रीम नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का एक कार्टून छपा है, जिस पर घमासान शुरू हो गया है। वैसे यह कोई पहली घटना नहीं है, जब मैग्जीन शार्ली हेब्दो ने ऐसा किया है। इस मैगजीन के कार्टून पर सबसे ज्यादा विवाद तो तब देखने को मिला था, जब इसमें पैगंबर मोहम्मद का एक विवादित कार्टून छपा था।

हिन्दू देवी-देवताओं पर की थी टिप्पणी

भारत में कोविड संकट में व्यवस्था की कथित नाकामी को लेकर तंज कसते हुए शार्ली हेब्दो ने एक कार्टून छापा था। 28 अप्रैल 2021 को प्रकाशित हुए उस कार्टून में लोगों को ऑक्सीजन के लिये तरसते दिखाया गया था। इसी कार्टून में हिंदू देवी-देवताओं का भी मजाक बनाया गया। शार्ली हेब्दो ने कार्टून के साथ कैप्शन में लिखा कि "33 million gods in India and not one capable of producing oxygen!" सोशल मीडिया यूजर्स ने भारत में इस पर बहुत हंगामा मचाया था।

पैगम्बर मोहम्मद पर कार्टून

शार्ली हेब्दो फ्रेंच भाषा की व्यंग्य पत्रिका है जोकि 2002, 2006, 2011, 2014, 2016 में भी पैगंबर के दर्जनों कार्टून प्रकाशित कर चुकी है। जिसका मकसद पत्रिका के अनुसार धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बढ़ाना है। हालांकि अपने इस अधिकार की कीमत उसे आतंकी हमले झेल कर चुकानी पड़ी है।

पत्रिका के दफ्तर पर हो चुके हैं आतंकी हमले

16 अक्टूबर 2020 को फ्रांस की राजधानी पेरिस से लगभग 24 किलोमीटर दूर Conflans-Sainte-Honorine उपनगर में एक विद्यालय में 18 वर्षीय मुस्लिम कट्टरपंथी अब्दोल्लाख अन्जोरोव ने इतिहास एवं समाजशास्त्र के अध्यापक सैमुअल पेटी की नृशंस हत्या कर दी।

ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की कक्षा के दौरान सैमुअल ने पत्रिका में छपे पैगंबर मोहम्मद के एक कार्टून को अपने छात्रों को दिखाया था। सैमुअल पेटी का हत्यारा भी इस्लामिक आतंकियों के प्रभाव में था। उसकी एक सौतेली बहन साल 2014 में ही इस्लामिक स्टेट से जुड़ चुकी थी। वह खुद भी फ्रांस के उन स्थानीय चरमपंथियों के बहकावे में आ चुका था जो आतंकी संगठन हमास (हरकत अल मुकाबला अल इस्लामिया) के आतंकियों के नाम से गैर सरकारी संस्थाएं चला रहे थे।

फ्रांस में इस तरह की क्रूरता कोई पहली घटना नहीं थी। साल 2015 में शार्ली हेब्दो पत्रिका के दफ्तर पर इस्लामिक आतंकवादियों ने हमला कर संपादक सहित अन्य कर्मचारियों का नरसंहार कर दिया था। अल्लाहु अकबर के नारे के साथ किए गए आतंकी हमले का उद्देश्य पत्रिका में पैगंबर मोहम्मद के कार्टून छापने का बदला लेना था।

कार्टून की आड़ में आतंकवाद को बढ़ावा

सैमुअल पेटी की नृशंस हत्या के एक सप्ताह बाद पाकिस्तान के एक मुस्लिम कट्टरपंथी नेता खादिम हुसैन रिजवी ने 24 अक्टूबर 2020 को सार्वजनिक भाषण दिया था, जिसके अंश इस प्रकार हैं, "तुम ने परमाणु बम क्यों बनाए हैं? उन्हें बाहर निकालो, जिहाद की घोषणा कर दो और सब को मरने दो। उस दिन पैगंबर मोहम्मद के सामने हमें शर्मिंदगी नहीं उठानी पड़ेगी। अगर तुम्हारे अंदर कुछ इज्जत बची है और तुम इस्लामिक देशों को बचाए रखना चाहते हो तो इस ईद के दिन इस्लाम के जिहाद का ऐलान करो। जो रसूल पैगंबर मोहम्मद के खिलाफ गुस्ताखी करेगा तो मैं जिहाद का ऐलान करता हूं।

उसके एक दिन बाद फिलिस्तीन में भी पाकिस्तान जैसे भड़काऊ भाषण दिये गये। वहां के इस्लामिक स्कॉलर शेख अली अबू अहमद ने स्थानीय मस्जिद के बाहर सार्वजनिक रूप से कहा, "अल्लाह के बंदों सिर्फ फ्रांस के उत्पादों का बहिष्कार करने से कुछ नहीं होगा। इससे पहले डेनमार्क और स्वीडन के भी उत्पादों का हम बहिष्कार कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं बदला। अल्लाह के बंदों इसका एक ही जवाब है खिलाफत की स्थापना। एक मुस्लिम खलीफा जो कि मुस्लिम सेना का नेतृत्व करेगा और पेरिस को एकदम समाप्त कर देगा।"

जीसस क्राइस्ट का भी बनाया मजाक

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    शार्ली हेब्दो में कई बार जीसस क्राइस्ट का भी मजाक बनाया गया है। साल 2011 तक के आंकड़ों के अनुसार विभिन्न कैथोलिक संस्थानों द्वारा उनकी भावनाओं को आहत होने के चलते 13 बार शार्ली हेब्दो पर मुकदमे किए जा चुके हैं।

    यह भी पढ़ें: Al-Aqsa Mosque Controversy: जाने क्यों हैं अल अक्सा मस्जिद को लेकर यहूदी और मुसलमान एक-दूसरे के दुश्मन

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