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Senior Citizens: कितने सुरक्षित हैं देश के सीनियर सिटिजन? जानें बुजुर्गों के अधिकारों के बारे में

दिल्ली में अधेड़ उम्र की बहू ने 86 वर्ष की वृद्धा सास को प्रेशर कूकर से पीट-पीटकर मार डाला और इसे एक एक्सीडेंट बता दिया। जब हत्या की गुत्थी सुलझी तो बुजुर्गों की सुरक्षा पर उठ रहे हैं सवाल।

concern on safety of senior citizens in country? know the rights of elders

Senior Citizens: 28 अप्रैल 2023 को दिल्ली के नेब सराय इलाके से पुलिस को एक कॉल आया कि मेरे दोस्त की मां घर में गिर गयी हैं और उनका काफी खून बह रहा है। सूचना के बाद जब पुलिस मौके पर पहुंची तब तक 86 वर्षीय उस वृद्ध महिला की मौत हो चुकी थी। शुरुआती पुलिस जांच में सामने आया कि मृतका के शरीर पर चोट के निशान थे।

फिर जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट आयी तो पता चला कि बुजुर्ग महिला की पिटाई की गयी थी और उनके शरीर पर चोट के 14 निशान थे। फिर जब सच सामने आया तो पता चला कि उस बुजुर्ग महिला को उसकी 48 वर्षीय बहू ने फ्राइंग पैन और कूकर से पीट-पीटकर मार डाला था और बाद में इसे दुर्घटना का नाम दे दिया। हालांकि, देश में बुजर्गों के खिलाफ हिंसा और हत्या का यह कोई पहला मामला नहीं है। सरकारी आकंड़ों पर गौर करें तो हकीकत बेहद चौंकाने वाली है।

अकेलापन भी बना खतरा

यूनाइटेड नेशंस पॉपुलेशन फंड (यूएनएफपीए) की रिपोर्ट के अनुसार, 2030 तक भारत में बुजुर्गों की आबादी का आकार लगभग दोगुना होकर 192 मिलियन तक पहुंच जाएगा। वहीं 2050 तक, हर पांचवां भारतीय, एक बुजुर्ग व्यक्ति होगा। जबकि संयुक्त राष्ट्र आर्थिक और सामाजिक मामलों के विभाग के अनुसार भारत में बुजुर्गों की आबादी 2015 में 8 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 11.5 प्रतिशत और 2050 में 19 प्रतिशत हो जायेगी।

इन आकड़ों के इतर एक बड़ी समस्या विकराल रूप लेने लगी है। दरअसल, एक तरफ बुजुर्गों की जनसंख्या बढ़ रही है तो दूसरी तरफ युवा पीढ़ी को रोजगार के चलते अपने घरों को छोड़कर पलायन करना पड़ रहा है। एकल अथवा न्यूक्लियर परिवारों के बढ़ते इस परिवेश में बुजुर्ग माता-पिता अकेले रहने को मजबूर हो रहे हैं। जिसकी वजह से विभिन्न चिकित्सा एवं मनोवैज्ञानिक समस्याओं की चपेट में आ जाते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक बुजुर्गों में अवसाद से जुड़े विकारों (डिप्रेशन) की समस्याएं तेजी से बढ़ी हैं। खासकर तब जब वे अपने साथी को खो देते हैं और परिवार में पूरी तरह से अकेले रह जाते हैं तो स्थिति बिगड़ जाती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मुताबिक 2011 की जनगणना के अनुसार लगभग 15 मिलियन बुजुर्ग अकेले रहते हैं और उनमें से तीन-चौथाई महिलाएं हैं।

गौर करने वाली बात है कि महानगरों में अकेले रहने वाले बुजुर्ग दंपतियों के खिलाफ लगातार अपराध बढ़ रहे हैं। क्योंकि अकेले रहने वाले बुजुर्गों को निशाना बनाना अपराधियों के लिए काफी आसान होता है। कई मामलों में तो बुजुर्गों की हत्या का पता भी कई दिनों बाद चला क्योंकि उनके बच्चे बाहर रहते हैं और जब तक घटना का अंदाजा लगता है तबतक सब कुछ खत्म हो चुका होता है।

2021 में बुजुर्गों के खिलाफ 26 हजार घटनाएं

एनसीआरबी (NCRB) की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2021 में देश में बुजुर्गों के खिलाफ 26110 घटनाएं दर्ज हुईं थी। इनमें सबसे ज्यादा 6190 घटनाएं महाराष्ट्र में, फिर मध्य प्रदेश में 5273 और तेलंगाना में 1952 घटनाएं हुई थीं। जबकि मध्यप्रदेश में बुजुर्ग महिलाओं के साथ दुष्कर्म के सबसे ज्यादा 15 मामले सामने आये। इसके बाद केरल में 11, महाराष्ट्र में 9, तमिलनाडु में 8 और छत्तीसगढ़ में 6 मामले सामने आये।

भारत के अलावा दुनियाभर के दूसरे देशों में बुजुर्गों पर बढ़ते अपराध के आंकड़े भी चौंकाने वाले हैं। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के मुताबिक 60 साल या उससे अधिक उम्र के 15.7 प्रतिशत बुजुर्गों के साथ किसी न किसी प्रकार का दुर्व्यवहार किया जाता है।

बुजुर्गों के लिए दिल्ली सबसे खतरनाक

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) 2022 के आंकड़ों के अनुसार भारत के सभी महानगरों में वरिष्ठ नागरिकों के लिए दिल्ली सबसे असुरक्षित है, क्योंकि 60 साल और इससे अधिक उम्र के लोगों के खिलाफ हुए अपराधों में दिल्ली का योगदान 27 प्रतिशत से अधिक है। जबकि एनसीआरबी के मुताबिक दिल्ली में पिछले साल की तुलना यानि 2021 में वरिष्ठ नागरिकों के खिलाफ अपराध में 28.69 प्रतिशत की वृद्धि देखी गयी है। साल 2020 में बुजुर्गों के खिलाफ अपराध के लिए दिल्ली में 906 केस दर्ज हुए थे, जबकि साल 2021 में 1166 मामले दर्ज किये गये थे।

बिहार में बुजुर्गों के खिलाफ सबसे कम अपराध

एनसीआरबी की रिपोर्ट की माने तो बिहार बुजुर्गों के लिए सबसे अधिक सुरक्षित राज्य है। साल 2018 के बाद बीते चार वर्षों के दौरान 60 साल या अधिक के बुजुर्गों के खिलाफ सबसे कम अपराध (हत्‍या, दुष्‍कर्म और चोरी) हुए हैं। साल 2018 में 424 आपराधिक मामले दर्ज किये गये थे। साल 2019 में यह संख्या घटकर 251 हो गयी। जबकि अगले साल 322 आपराधिक मामले दर्ज किये गये, लेकिन 2021 में 53.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ 150 मामले दर्ज किये गये।

बुजुर्गों को नहीं पता उनके अधिकार?

भारतीय संविधान, देश के बुजुर्गों को सम्मान से जीवनयापन करने का अधिकार देता है। संविधान के अनुच्छेद 41 और 46 में भी इस बात का जिक्र है। संसद में उनके अधिकारों के संरक्षण के लिए सीनियर सिटीजन एक्ट 2007 पारित हो चुका है। इस एक्ट के तहत बुजुर्गों को आर्थिक, मेडिकल, मेंटेनेंस (जिंदगी जीने के लिए खर्च) और प्रोटेक्शन संबंधी अधिकार मिले हैं। आमतौर से बुजुर्ग अपनी प्रॉपर्टी बच्चों को ट्रांसफर कर देते हैं। इसके बाद कई मामलों में बच्चे उनकी देखभाल नहीं करते। इस स्थिति में वह सीनियर सिटीजन एक्ट की मदद ले सकते है।

बुजुर्गों के लिए मनाया जाता है अंतरराष्ट्रीय दिवस

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    दुनियाभर में बुजुर्गों की सुरक्षा और उनकी देखभाल को लेकर एक अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र संघ की पहल पर इसकी शुरुआत हुई थी। यूनाइटेड नेशंस जनरल असेंबली में 14 अक्टूबर 1990 को बुजुर्गों के लिए अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित किए जाने का प्रस्ताव रखा गया था। फिर विचार-विमर्श के बाद एक अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस घोषित किया गया।

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