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Blood Donor Day: अगर एक प्रतिशत भारतीय भी नियमित रक्तदान करें तो कभी खून की कमी नहीं होगी

Blood Donor Day: हर साल 14 जून को वर्ल्ड ब्लड डोनर डे यानी विश्व रक्त दाता दिवस मनाया जाता है। इसे कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती के रूप में मनाया जाता है। जिनका जन्म 14 जून 1868 को हुआ था। कार्ल ने ही एबीओ ब्लड ग्रुप सिस्टम की खोज की थी, जिसके लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार (चिकित्सा) से सम्मानित किया गया।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने पहली बार 2004 में विश्व रक्तदाता दिवस मनाया। तब से लेकर आज तक यह दिवस अलग-अलग थीम पर मनाया जाता है। इस साल विश्व रक्तदाता दिवस की थीम "रक्त दो, प्लाज्मा दो, जीवन बांटो, बार-बार बांटो" है। वहीं पिछली साल 2022 की थीम "रक्तदान एकजुटता का कार्य है, प्रयासों में शामिल हों और जीवन बचाएं" थी। इससे पहले 2021 में "खून दें और दुनिया को धड़काते रहें" थी। साल 2020 में विश्व रक्तदाता दिवस "सुरक्षित रक्त जीवन बचाता है" थीम के साथ मनाया गया था।

Blood Donor Day 2023 never be a shortage of blood if one percent indians donate blood regularly

इस बार अल्जीरिया कर रहा है मेजबानी

इस साल अल्जीरिया अपने राष्ट्रीय रक्त आधान सेवा के माध्यम से विश्व रक्तदाता दिवस 2023 की मेजबानी करेगा और वैश्विक कार्यक्रम 14 जून को अल्जीरिया में आयोजित किया जाएगा। 2022 में वर्ल्ड ब्लड डोनर डे को मैक्सिको ने होस्ट किया था, तो वही 2021 की मेजबानी इटली ने की थी, तथा ग्लोबल इवेंट रोम में 14 जून 2021 को आयोजित हुआ। इससे पहले 2019 में अंतरराष्ट्रीय रक्तदाता दिवस की मेजबानी रवांडा ने की थी। परंतु 2020 में Covid-19 के चलते डब्ल्यूएचओ द्वारा इसे डिजिटली मनाया गया था।

कैसे मनाया जाता है?

भारत का केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय विश्व रक्तदाता दिवस का नेतृत्व करता है और विभिन्न स्थानों पर रक्तदान शिविर लगाकर नियमित रक्तदाताओं से रक्तदान का आग्रह करता है। इसके अलावा सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों, उप-जिला और जिला अस्पतालों तथा ब्लड बैंकों व विभिन्न स्तरों पर ब्लड ग्रुप टेस्ट करने के लिए उचित सुविधा तथा रक्तदाताओं को बधाई देने और प्रतिज्ञा लेने का समारोह भी आयोजित किया जाता है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन के लिए सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता फैलाई जाती है।

इस मौके पर क्या कर सकते हैं?

अपने ब्लड ग्रुप का पता लगाएं और रक्तदाता के रूप में रजिस्ट्रेशन करें। नियमित डोनर बनने का संकल्प लें और रक्तदान करें। अपने परिवार के सदस्यों, मित्रों व सामाजिक नेटवर्क को नियमित रक्तदाता बनने के लिए प्रोत्साहित करें।

इस दिन को विश्व स्वास्थ्य संगठन, रेड क्रॉस अंतरराष्ट्रीय संघ और रेड क्रीसेंट समाज और रक्तदान संगठनों और कई दूसरे संगठनों द्वारा वैश्विक स्तर पर लोगों को ब्लड डोनेशन के प्रति प्रोत्साहित करते हुए कई अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता हैं। साथ ही सार्वजनिक स्थलों, कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और दूसरे शैक्षिक संस्थानों पर भी रक्तदान के लिए कैंप लगाए जाते हैं जहां लोग स्वेच्छा से आकर रक्तदान कर सकते हैं। आज भी दुनियाभर में लोगों के बीच रक्तदान को लेकर कई अलग-अलग भ्रम हैं। कई लोग रक्तदान करने में काफी ज्यादा डरते हैं लेकिन ब्लड डोनेट करने से कोई खतरा नहीं होता।

● 18 से 65 वर्ष की आयु वाला कोई भी व्यक्ति रक्तदान कर सकता है जिसे कोई भी संक्रमण या रोग न हो साथ ही उसका न्यूनतम वजन 50 किलोग्राम होना चाहिए।
● पुरुष तीन महीनों में और महिला चार महीनों में एक बार रक्तदान कर सकती है।
● रक्तदान करने के 21 दिन बाद आपका खून दोबारा बन जाता है।
● ब्लड डोनेट करने से किसी भी तरह की कमजोरी या फिर हीमोग्लोबिन की कमी नहीं होती।
● रक्तदान करने से पहले या बाद में शराब या धूम्रपान का सेवन न करें साथ ही सिगरेट, बीड़ी, तंबाकू गुटखा खाने से भी बचें।
● खून देने के बाद आपको अपने शरीर का खास ख्याल रखना होता है ऐसे में आप हेल्दी डाइट ही लें और अधिक से अधिक मात्रा में फल और जूस आदि का सेवन करें।
● रक्तदान के बाद कम-से-कम 12-18 घंटे के बाद तक हैवी एक्सरसाइज न करें।
● इससे आपका वजन नियंत्रित तो होता ही है साथ ही लीवर भी स्वस्थ रहता है।
● ऐसे लोग रक्तदान नहीं कर सकते जो एचआईवी या हेपेटाइटिस पॉजिटिव हो, 6-12 महीनों के दौरान दिल का दौरा पड़ा हो या हाल ही में मलेरिया हुआ हो अथवा कोई टैटू बनवाया हो।

रक्त की कमी से हर साल 30 लाख से ज्यादा मौतें

रक्त की कमी से भारत में हर साल 30 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो जाती है। अपने देश में हर साल बीमारियों या गंभीर दुर्घटनाओं में घायल लोगों को करीब एक करोड़ बीस लाख यूनिट खून की जरूरत पड़ती हैं। इसमें से मात्र 90 लाख यूनिट रक्त ही उपलब्ध हो पाता है और करीब 30 लाख लोगों को समय पर खून नहीं मिल पाता। आंकड़े बताते हैं कि रक्तदान के प्रति छोटी सी जागरूकता इस समस्या को पूरी तरह से खत्म कर सकती है। एक अध्ययन के अनुसार पूरी दुनिया में हर साल करीब 10.50 करोड़ लोग रक्तदान करते हैं।

किसी भी देश की मात्र एक प्रतिशत आबादी अगर रक्तदान करे तो उस देश को कभी रक्त की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा। भारत में फिलहाल रक्तदान से जरूरत का मात्र 75 प्रतिशत खून ही एकत्र होता है। वहीं पड़ोसी देश नेपाल इस मामले में हमसे काफी आगे है। वहां जरूरत का 90 प्रतिशत खून उपलब्ध है।

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