Bangladesh Election: भारत समेत 38 देशों को बांग्लादेश ने चुनाव निरीक्षण के लिए बुलाया

बांग्लादेश में चुनाव एक अंतरराष्ट्रीय मुद्दा बन गया है। पार्टियों के बीच मचा घमासान और रोज बढ़ती हिंसा के बीच इस बात की आशंका बढ़ गयी है कि बांग्लादेश में चुनाव में भारी गड़बड़ी हो सकती है।

अवामी लीग की सरकार और चुनाव आयोग दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। साफ सुथरा चुनाव कराने का दबाव न सिर्फ आंतरिक कारणों से आ रहा है, बल्कि अमेरिका, यूरोप और चीन भी यहां के चुनाव पर नजदीकी नजर रखे हुए हैं।

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अपनी साख बचाने के लिए बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने 12वें राष्ट्रीय चुनावों के निरीक्षण के लिए भारत समेत 38 देशों और संगठनों के प्रतिनिधियों को अपने यहां आमंत्रित किया है। उन सभी देशों और संगठनों को औपचारिक निमंत्रण भी भेज दिया गया है, जिन्होंने चुनाव निगरानी में रुचि व्यक्त की है। बांग्लादेश में आम चुनाव 7 जनवरी, 2024 को होना तय किया गया है। बांग्लादेश चुनाव आयोग के अतिरिक्त सचिव अशोक कुमार देबनाथ ने कहा कि सभी देशों और संगठनों को औपचारिक निमंत्रण भेज दिया गया है जिन्होंने चुनाव निगरानी के लिए बांग्लादेश में अपने प्रतिनिधि भेजने की इच्छा दिखाई है।

कौन कौन से देशों के आने की संभावना
बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने जिन देशों को चुनाव में निगरानी का निमंत्रण भेजा है उनमे भारत, भूटान, मालदीव, नेपाल, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, फ्रांस, जॉर्जिया, इंडोनेशिया, कजाकिस्तान, रूस, दक्षिण कोरिया, मिस्र, तुर्की, उज्बेकिस्तान, अर्जेंटीना, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका, सेनेगल, थाईलैंड, अजरबैजान, मलेशिया, मॉरीशस, ट्यूनीशिया, ब्रुनेई, संयुक्त अरब अमीरात, कतर, ओमान, कुवैत, सऊदी अरब, चीन, जापान और सिंगापुर शामिल हैं।

इसके अलावा सार्क और ओआईसी महासचिव को भी आमंत्रित किया गया है। आमंत्रित पर्यवेक्षकों का खर्च बांग्लादेश का चुनाव आयोग ही वहन करेगा। इस बीच 12 देशों और 44 संगठनों के पर्यवेक्षकों और पत्रकारों ने भी मतदान का निरीक्षण करने का अनुरोध किया है, जिनमें युगांडा के 11, अफ्रीकी चुनावी गठबंधन के चार, यूरोपीय संघ के 12 लोग भी शामिल हैं। 15 नवंबर को घोषित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार, नामांकन जमा करने की अंतिम तिथि 30 नवंबर है, जबकि उम्मीदवार के लिए नाम वापस लेने की अंतिम तिथि 17 दिसंबर है। आयोग 1 दिसंबर से 4 दिसंबर तक नामांकन पत्रों की जांच करेगा।

अमेरिका सबसे ज्यादा सक्रिय
बांग्लादेश के चुनाव शांतिपूर्ण और पारदर्शी वातावरण में हो, इस बात पर सबसे ज्यादा जोर अमेरिका का है। अमेरका विदेश विभाग के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने फिर 22 नवंबर को कहा कि उनका देश बांग्लादेश में स्वतंत्र और शांतिपूर्ण राष्ट्रीय संसदीय चुनाव देखना चाहता है। क्योंकि यही अमेरिका की नीति रही है। इससे पहले, दक्षिण और मध्य एशियाई मामलों के अमेरिकी सहायक सचिव डोनाल्ड लू ने भी अपने पत्र में तीन प्रमुख राजनीतिक दलों के बीच बिना किसी शर्त के बातचीत का आग्रह किया था।

नागरिक सुरक्षा, लोकतंत्र और मानवाधिकार मामले के अमेरिकी अवर सचिव उज़रा ज़ेया ने 18 सितंबर को बांग्लादेश के विदेश सचिव मसूद बिन मोमेन के साथ एक बैठक के दौरान भी यहाँ स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण संसदीय चुनावों का आह्वान किया था। इसी तरह अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के समन्वयक जॉन किर्बी ने 6 जून को व्हाइट हाउस में एक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान भी यही संदेश दिया था।

शेख हसीना वार्ता के लिए तैयार नहीं
सत्ताधारी पार्टी अवामी लीग विपक्ष के साथ किसी भी वार्ता के लिए तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री शेख हसीना बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी बीएनपी को हत्यारों की पार्टी कहती हैं। हालाँकि अवामी लीग पिछले 14 सालों से सत्ता में है। उस पर संस्थाओं पर कब्ज़ा करने और हर जगह अपने लोग बिठाने का भी आरोप है, फिर भी पार्टी टिकट मांगने वालों की भारी भीड़ हो रही है। 7 जनवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले नामांकन जमा करने के आखिरी दिन 21 नवंबर को सैकड़ों उम्मीदवार अपने समर्थकों के साथ अवामी लीग के बंगबंधु एवेन्यू केंद्रीय कार्यालय में एकत्र हुए थे। हाथों में अलग-अलग पोस्टर लिए हुए लोग अलग-अलग नारे लगा रहे थे।

फिर से एकतरफा चुनाव के आसार
बांग्लादेश के सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी की चुनाव लड़ने पर रोक हटाने की अपील खारिज किए जाने के बाद इस बात के पूरे आसार हैं कि इस बार भी बांग्लादेश में एकतरफा चुनाव होंगे। हालाँकि जातीय पार्टी ने चुनाव में भाग लेने का निर्णय किया है, लेकिन बीएनपी और जमात के नेताओं के न रहने से चुनाव परिणाम फिर से शेख हसीना के पक्ष में ही जाता दिखाई दे रहा है। वर्ष 2013 में ही धर्मनिरपेक्षता के संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन करने के आरोप में जमात पर चुनाव में भाग लेने से रोक लगा दी गई थी।

मुख्य विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के शीर्ष नेता या तो जेल में हैं या निर्वासन में हैं। बीएनपी नेता खालिदा जिया पहले ही कह चुकी है कि अगर प्रधानमंत्री शेख हसीना इस्तीफा नहीं देती हैं और एक गैर-पक्षपातपूर्ण कार्यवाहक सरकार के नेतृत्व में चुनाव नहीं होता तो वह चुनावों का बहिष्कार करेगी। खालिदा जिया खुद घर में नजरबंद हैं, उन पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

बीएनपी नेता मिर्जा अब्बास मिर्जा अब्बास और उनकी पत्नी के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले की सुनवाई पूरी हो गई है, फैसला कभी भी आ सकता है। अदालत की अवमानना के मामले में बीएनपी नेता और पूर्व विधायक हबीबुर रहमान हबीब के खिलाफ पांच महीने की कैद की सजा सुनाई गई है। अगर विपक्ष का बहिष्कार जारी रहा तो शेख हसीना का चौथी बार भी सत्ता में लौटना लगभग तय है।

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