राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस: 2016 से धनतेरस के दिन ही मनाया जाता है आयुर्वेद दिवस, जानिए क्यों
नई दिल्ली, नवंबर 02। कोरोना महामारी के दौर में लोगों का भरोसा आयुर्वेद पर बहुत अधिक बढ़ा है। पिछले 2 साल के अंदर कोरोना संकट ने हमें आयुर्वेद के महत्व के बारे में अच्छे से बता दिया है, जब अस्पतालों में लोग सांसों के लिए तरस रहे थे तो उस वक्त आयुर्वेद के ही कुछ उपायों से लोगों को उम्मीदें थी। सरकार ने भी कोरोना से बचाव के लिए अपनी गाइडलाइन में कई आयुर्वेदिक उपायों को अपनी गाइडलाइन में शामिल किया था। ऐसे में आयुर्वेद की महत्वता को जानने के लिए आज का दिन विशेष महत्व रखता है। दरअसल, आज राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस है। साल 2016 से हर साल धनतेरस के ही दिन ही आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है।

क्यों धनतेरस के दिन ही मनाया जाता है आयुर्वेद दिवस?
दरअसल, धनतेरस का दिन भगवान धन्वंतरि का माना जाता है और उन्हें धन के साथ-साथ आयुर्वेदिक चिकित्सा का देवता भी माना जाता है, इसलिए भगवान धन्वंतरि को सभी रोगों का निवारण करने वाला माना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान धन्वंतरि, जो देवताओं के चिकित्सक हैं, समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और असुरों के सामने प्रकट हुए थे। उन्होंने अपने हाथों में अमृत, अमरता का अमृत और आयुर्वेद धारण किया था। देव और असुर दोनों अमर होने के लिए अमृत चाहते थे। असुरों से इस अमृत की रक्षा गरुड़ ने की थी।
आयुर्वेद का महत्व
आपको बता दें कि आयुर्वेद की ताकत और इसके अनूठे उपचार सिद्धांतों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया जाता है। केंद्र सरकार आयुर्वेद की क्षमता का इस्तेमाल कर बीमारियों के बोझ को कम करना चाहती है। आयुर्वेद भारत में प्राचीन काल से प्रचलित है। हमारी संस्कृति में आयुर्वेद के महत्व को ऐसे समझा जा सकता है कि हर भारतीय के घर में हमने काढ़ा शब्द जरूर सुना होगा। काढ़ा एक आयुर्वेदिक मिश्रण है जिसे विभिन्न जड़ी-बूटियों और मसालों से मिलाकर बनाया जाता है। काढ़ा अक्सर ठंड और शुष्क मौसम के दौरान एक लोकप्रिय घरेलू उपाय है और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है। आयुर्वेद में प्रतिरक्षा की विभिन्न अवधारणाएँ शामिल हैं।
आयुर्वेद की जहां बात होती है, वहां योग का भी जिक्र होता है। योग के जरिए शारीरिक तनाव दूर होता है। रोजाना ध्यान करने से शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के तनावों को कम करने में मदद मिल सकती है। आप एक आरामदायक जगह पर बैठकर रोजाना कम से कम 10 मिनट ध्यान लगाकर शुरुआत कर सकते हैं।












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