जान लीजिए घाटी में 'अस्‍थायी व्‍यवस्‍था' धारा 370 से जुड़ी कुछ खास बातें

श्रीनगर। 25 नवंबर को जम्‍मू कश्‍मीर में वोटिंग के पहले चरण के साथ ही विधानसभा चुनावों का आगाज हो जाएगा। हर चुनावों की तरह फिर से यहां पर धारा 370 को फिर से उठाया जा रहा है।

जहां गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा है कि इन चुनावों में धारा 370 कोई मुद्दा नहीं है तो उनकी ही पार्टी की शीला भट्ट ने इस मुद्दे पर पार्टी के अंदर विरोध कर डाला। जब-जब जम्‍मू कश्‍मीर का जिक्र होगा, धारा 370 का जिक्र अपने आप ही होगा। जब इस आर्टिकल का इतना जिक्र हो रहा है तो आपके लिए पेश है इस आर्टिकल से जुड़ी कुछ खास बातें।

'टेंपरेरी' आर्टिकल 370

साधारण शब्‍दों में अगर बात करें तो संविधान की धारा 370 के तहत किसी भी राज्‍य को विशेष राज्‍य का दर्जा हासिल होता है। जबकि सारे राजनेता इस मुद्दे को चुनावों के दौरान जोर-शोर उठाते हैं और खूब शोर मचाते हैं, आप इतना जान लीजिए कि जम्‍मू कश्‍मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा देने वाला आर्टिकल राज्‍य में एक अस्‍थायी व्‍यवस्‍था है।

केंद्र सरकार ने ठुकरा दी थी एक मांग

  • संविधान में इसे ए‍क अस्‍थायी व्‍यवस्‍था का दर्जा दिया गया है।
  • स्‍वतंत्रता के बाद राज्‍य में इस व्‍यवस्‍था की शुरुआत हुई थी।
  • स्‍वतंत्रता के बाद जम्‍मू कश्‍मीर के महाराजा ने केंद्र सरकार के साथ इससे जुड़ा एक प्रपत्र साइन किया था।
  • वर्ष 1947 में उमर अब्‍दुल्‍ला के दादा शेख अब्‍दुल्‍ला राज्‍य के प्रधानमंत्री थे।
  • उनकी नियुक्ति राज्‍य के महाराजा हरि सिंह और जवाहर लाल नेहरु ने की थी।
  • अब्‍दुल्‍ला आर्टिकल 370 को राज्‍य में एक स्‍थायी व्‍यवस्‍था में तब्‍दील करना चाहते थे।
  • उनका मकसद इस धारा के तहत राज्‍य को पूर्ण रूप से स्‍वतंत्र कराना था।
  • उनकी इस ख्‍वाहिश को उस समय केंद्र सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया था।

केंद्र और राज्‍य सरकार का रोल

  • इस आर्टिकल के साथ ही राज्‍य की सरकार के लिए नए नियम और विधान मानने होते हैं।
  • 370 की वजह से यहां के नागरिकों को संपत्ति और नागरिकता से जुडे मुद्दों के साथ ही मौलिक अधिकारों के लिए अलग कानूनों का पालन करना होता है।
  • इस धारा की वजह से केंद्र की सरकार सिर्फ कुछ मुद्दों जैसे रक्षा, संचार और बाहृय मुद्दों पर ही राज्‍य में अपना नियंत्रण रख सकती है।
  • राज्‍य सरकार के पास भले ही इस आर्टिकल के तहत काफी शक्तियां हों लेकिन उसके पास राज्‍य में वित्‍तीय आपतकाल घोषित करने की ताकत नहीं है।
  • राज्‍य सरकार के सभी मुद्दों को केंद्र सरकार के साथ संविधान के आधार पर ही देखा जाता है।

क्‍या सोचते हैं विरोधी

  • धारा 370 के विरोधियों का मानना है कि इस नियम की वजह से राज्‍य विकास में पिछड़ता जा रहा है।
  • जब तक यह नियम राज्‍य में लागू है तब तक राज्‍य में कोई भी विकास के मकसद से जमीन नहीं खरीद सकता है।
  • दूसरे राज्‍यों के लोग जम्‍मू कश्‍मीर में जमीन नहीं खरीद सकते हैं।
  • धारा 370 जम्‍मू कश्‍मीर को पूरे देश से अलग करता है।
  • इस धारा की वजह से राज्‍य के लोग यह महसूस नहीं कर पाते कि वह पूरी तरह से भारतीय हैं।
  • निवेश पर लगी रोक की वजह से राज्‍य के युवा बड़े स्‍तर पर बेरोजगार हैं।
  • बेरोजगारी ने यहां के युवाओं को हथियार उठाने पर मजबूर कर दिया।

राष्‍ट्रपति के पास है निरस्‍त करने का अधिकार

इस धारा पर इतना ज्‍यादा संशय है कि राज्‍य पूरी तरह से देश का हिस्‍सा बन ही नहीं पा रहा है। जिस समय इस नियम को जम्‍मू कश्‍मीर में लाया गया था, उसी समय यह बात साफ हो गई थी कि यह नियम फिलहाल अस्‍थायी है। जब इस पर संशय दूर हो जाएंगे तो इसे राज्‍य से पूरी तरह से हटाने का मकसद था। देश के राष्‍ट्रपति के पास यह अधिकार होता है कि एक सार्वजनिक अधिसूचना जारी कर इसे निरस्‍त कर सकें। हालांकि इसके साथ ही यह भी जरूरी है कि इसके निरस्‍तीकरण से पहले राज्‍य सरकार इसे अपनी मंजूरी दे।

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