SEBI ban on IIFL: आईआईएफएल का सालाना मुनाफा करोड़ों का, अब सेबी ने दिया तगड़ा झटका
SEBI ban on IIFL: आईआईएफएल (इंडिया इंफोलाइन फाईनेंस लिमिटेड), एक ब्रोकरेज कंपनी है। बीते दिनों सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने इस कंपनी को नये ग्राहक जोड़ने से प्रतिबंधित कर दिया। सेबी ने यह प्रतिबन्ध 2 सालों के लिए लगाया है। हालांकि, इससे पहले मई 2022 में भी सेबी द्वारा इस कंपनी पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया गया था।
सेबी को हिंदी में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड कहा जाता है। यह एक नियामक निकाय है और भारतीय स्टॉक एक्सचेंजों सहित वित्तीय बाजारों को नियंत्रित करता है। इस निकाय ने कोड ऑफ कंडक्ट के नियमों का उल्लंघन करने पर आईआईएफएल पर कार्यवाही की है। सेबी ने यह फैसला आईआईएफएल के खातों की जांच के बाद लिया गया है, जिसमें पाया गया कि कंपनी ग्राहकों के फंड का दुरूपयोग कर रही है।

क्या है आईआईएफएल
आईआईएफएल, एक स्टॉक ब्रोकिंग व्यवसायिक कंपनी है। यह आईआईएफएल होल्डिंग्स लिमिटेड की सहायक कंपनी है। स्टॉक मार्केट की दुनिया में यह कंपनी फाइनेंसियल सर्विस प्रोवाइडर अर्थात वित्तीय सेवा क्षेत्र में अग्रणी है। यह अपने ग्राहकों को ऋण देना, गिरवी रखना (मार्गेज), ब्रोकरेज सेवाएं जैसी सेवायें भी प्रदान करती हैं।
इस कंपनी की शुरुआत 1995 में उद्यमी निर्मल जैन ने की थी। उन्हें द इंस्टीटयूट आफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स आफ इंडिया (आईसीएआई) द्वारा वित्तीय सेवा श्रेणी में सीए एंटरप्रेन्योर लीडर अवार्ड मिल चुका है। शुरूआती दिनों में कंपनी का नाम प्रोबिटी रिसर्च एंड सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड था। तब मुख्य रूप से यह कंपनी शोध का काम करती थी। फिर 1999 में इसका नाम बदलकर इंडिया इंफोलाइन कर किया गया और बाद में इंडिया इंफोलाइन फाईनेंस लि. (आईआईएफएल) बन गयी। फिलाहल इसका मुख्यालय मुंबई में स्थित है।
सेबी ने क्यों लगाया आईआईएफएल पर प्रतिबंध
सेबी ने अप्रैल 2011 से जनवरी 2017 के बीच आईआईएफएल के खातों (बैंक एकाउंट्स) की जांच के दौरान पाया कि कंपनी ने जून 2014 तक अपने क्रेडिट बैलेंस क्लाइंट के फंड्स का इस्तेमाल अपने मालिकाना ट्रेड्स के निपटान (प्रॉपराइटरी ट्रेड्स सेटेलमेंट) के लिए किया था। कंपनी ने 809 ट्रेडिंग दिनों में से 795 ट्रेडिंग दिनों में यह काम किया। इसके साथ-साथ डेबिट बैलेंस क्लाइंट्स के ट्रेड्स के लिए भी इस फंड का इस्तेमाल किया गया था। आईआईएफएल ने मार्च 2017 में भी इसी तरह नियमों का उल्लंघन किया था।
इसलिए सेबी ने कहा है कि आईआईएफएल ने अपने क्रेडिट बैलेंस ग्राहकों के कानूनी हित में गलत काम किया है। इससे न सिर्फ कंपनी ने खुद को फायदा पहुंचाया बल्कि डेबिट बैलेंस ग्राहकों को भी फायदा पहुंचाया था। जोकि कानूनी रूप से आपराधिक काम है।
आईआईएफएल की सालाना कमाई
आईआईएफएल की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार भारत के 500 से भी ज्यादा शहरों में इसकी 3119 शाखाएं काम कर रही हैं। फिलहाल इसकी कुल संपत्तियां ₹64,638 करोड़ की हैं और 33,910 ग्राहक कंपनी से जुड़े हैं।
वित्तीय वर्ष 2018-19 में आईआईएफएल फाईनेंस कंपनी को ₹507.69 करोड़ का शुद्ध लाभ हुआ था। वित्तीय वर्ष 2019-20 में यह घटकर ₹232.03 करोड़ रह गया था। इसके बाद 2020-21 में आईआईएफएल की कमाई बढ़कर ₹374.45 करोड़ पहुंच गयी। जो 2021-22 में लगभग 160 प्रतिशत बढ़कर ₹967.38 करोड़ पहुंच गयी थी। आईआईएफएल फाईनेंस कंपनी का शुद्ध लाभ 2022-23 में करीब 7.5 प्रतिशत बढ़ते हुए ₹1042.72 करोड़ हो गया है।
आईआईएफएल की सहायक कंपनियां
आईआईएफएल फाईनेंस लिमिटेड की तीन सहायक कंपनियां है -
● आईआईएफएल होम फाइनेंस लिमिटेड - यह भारतीय वित्तीय सेवा क्षेत्र में अग्रणी कंपनियों में से एक है। इसका मुख्यालय गुड़गांव में है। यह कंपनी घरों की खरीद, निर्माण और नवीनीकरण के लिए ऋण प्रदान करती है। इसके अलावा छोटे व मध्यम व्यवसायों के लिए ऋण तथा घरों के निर्माण में लगे डेवलपर्स को ऋण प्रदान करती है।
● आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस लिमिटेड (पूर्व में समस्ता माइक्रोफाइनेंस लिमिटेड) - यह एक माइक्रोफाइनेंस संस्था है। यह महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में काम करने के लिए प्रतिबद्ध है। इसकी शुरुआत मार्च 2008 हुई थी। यह कंपनी भारत के 16 राज्यों के ग्रामीण और अर्ध-शहरी दोनों क्षेत्रों में बैंकरहित विभिन्न वर्गों की महिलाओं को वित्तीय सेवाएं प्रदान करती है।
● आईआईएफएल ओपन फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड - इस कंपनी की शुरुआत कंपनी अधिनियम के तहत 2013 में हुई थी। यह उपभोक्ताओं, छोटे उद्यमों तथा खुदरा व्यापार में लगे व्यक्तियों को एक नव-बैंकिंग (ऑनलाइन वित्तीय संस्थान) सुविधाएं प्रदान करती है। जिसमें छोटे व्यवसायों को ऋण, निवेश तथा धन प्रबंधन सेवाएं शामिल है।












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