Ambedkar Jayanti 2019: अंबेडकर जयंती पर पढ़ें उनके 10 अनमोल विचार
नई दिल्ली। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद (President Ram Nath Kovind) और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने (Prime minister Narendra modi) ट्वीट कर डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती (Dr. B.R. Ambedkar Jayanti) पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है। आपको बता दें कि भारत के संविधान निर्माता, चिंतक, समाज सुधारक डॉ. भीमराव अंबेडकर का जन्म मध्य प्रदेश के महू में 14 अप्रैल 1891 को हुआ था, वैसे अंबेडकर के जीवन की हर बात काफी निराली है, उनके विचार आज भी लोगों को जीवन जीने का सही मार्ग दिखाते हैं।
चलिए उनकी जयंती पर जानते हैं उनके अनमोल विचार.........

'मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं'
- मनुष्य नश्वर है, उसी तरह विचार भी नश्वर हैं। एक विचार को प्रचार-प्रसार की जरूरत होती है, जैसे कि एक पौधे को पानी की, नहीं तो दोनों मुरझाकर मर जाते हैं।
- पति-पत्नी के बीच का संबंध घनिष्ठ मित्रों के संबंध के समान होना चाहिए।
- हिन्दू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई गुंजाइश नहीं है।

कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है...
- कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा जरूर दी जानी चाहिए।
- एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है।
- मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए।
- हर व्यक्ति जो मिल के सिद्धांत कि 'एक देश दूसरे देश पर शासन नहीं कर सकता' को दोहराता है उसे ये भी स्वीकार करना चाहिए कि एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शासन नहीं कर सकता।

गवर्निंग सिद्धांत
- इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है। निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है, जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल न लगाया गया हो।
- बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए।
- समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन फिर भी इसे एक गवर्निंग सिद्धांत रूप में स्वीकार करना होगा।
- जीवन लंबा होने की बजाए महान होना चाहिए।
- जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हासिल कर लेते, कानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है, वो आपके किसी काम की नहीं।
- भारत के संविधान निर्माता बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर
- यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए।













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