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जानिए 'अक्साई चिन' से जुड़ी ये खास बातें, जिसको अमित शाह ने बताया भारत का हिस्सा

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नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल पर मंगलवार को लोकसभा में चर्चा जारी है, अपने भाषण में अमित शाह ने साफ शब्दों में कहा कि जब मैं जम्मू-कश्मीर बोलता हूं तो उसमें पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर भी आता है और 'अक्साई चिन' भी आता है। आपको बता दें कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर यानी कि पीओके पर पाकिस्तान ने कब्जा किया हुआ है, लेकिन भारत इसे जम्मू-कश्मीर का हिस्सा ही मानता है, तो वहीं अगर 'अक्साई चिन' की बात करें तो ये जम्मू-कश्मीर के पूर्वी क्षेत्र का हिस्सा है, यह भारत-चीन सीमा विवाद की जड़ है।

चलिए विस्तार से जानते हैं 'अक्साई चिन' के बारे में, जिसका जिक्र गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में किया है...

'अक्साई चिन' सीमा विवाद

'अक्साई चिन' सीमा विवाद

'अक्साई चिन' भारत और चीन के बीच चल रहे दो मुख्य सीमा विवाद में से एक है, बता दें कि चीन के साथ अन्य विवाद अरुणाचल प्रदेश से संबंधित है। यह कुनलुन पर्वतों के ठीक नीचे स्थित है। आदि काल में 'अक्साई चिन' भारत को रेशम मार्ग से जोड़ने का जरिया था और भारत और हजारों साल से मध्य एशिया के पूर्वी इलाकों (जिन्हें तुर्किस्तान भी कहा जाता है) और भारत के बीच संस्कृति, भाषा और व्यापार का रास्ता रहा है।

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'अक्साई चिन' ' स्विटजरलैंड के बराबर

'अक्साई चिन' ' स्विटजरलैंड के बराबर

क्षेत्रफल के हिसाब से 'अक्साई चिन' दरअसल स्विटजरलैंड के बराबर है। इतने बड़े क्षेत्र पर चीन ने अवैध रूप से कब्‍जा जमाया हुआ है, जबकि यह भारत का हिस्सा है और यह जम्‍मू कश्‍मीर में ही आता है, 'अक्साई चिन' क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 5,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित साल्ट फ्लैट का एक विशाल रेगिस्तान है।

जॉनसन लाइन

जॉनसन लाइन

1865 में सर्वे ऑफ इंडिया के अफसर डब्लू एच जॉनसन ने एक दिमागी रेखा खींची जिसके मुताबिक 'अक्साई चिन' का इलाका जम्मू कश्मीर में आता है। जॉनसन ने नक्शे पर उकेरी ये रेखा जम्मू कश्मीर के महाराजा को दिखाई लेकिन जॉनसन के काम की आलोचना हुई। उसे ब्रिटिश राज ने नौकरी से निकाल दिया, चीन ने कभी इसे नहीं माना और भारत ने हमेशा अपनाया, इसे जॉनसन लाइन नाम दिया गया। 1947 में भारत की आजादी के बाद से ही सरकार ने जॉनसन लाइन को ही आधिकारिक सरहद माना जिसमें 'अक्साई चिन' भारत का हिस्सा था।

'अक्साई चिन' भारत का हिस्सा

उधर, चीन ने जिनजियांग और पश्चिमी तिब्बत को जोड़ने वाला 1200 किलोमीटर लंबा हाइवे बना डाला, इसका 179 किलोमीटर का हिस्सा जॉनसन लाइन के दक्षिणी हिस्से को काटते हुए 'अक्साई चिन' से होकर गुजरता था। 1957 तक तो भारत को ये तक पता नहीं चल सका कि चीन ने 'अक्साई चिन' के इसी विवादित हिस्से में सड़क तक बना ली है। 1958 में चीन के नक्शे में पहली बार इस सड़क को दर्शाया गया और तब से ये दोनों देशों के बीच के विवाद की मुख्य वजह है।

'अक्साई चिन' नदी के नाम पर

'अक्साई चिन' नदी के नाम पर

'अक्साई चिन' एक बहुत ऊंचाई पर स्थित एक नमक का मरुस्थल है। भौगोलिक दृष्टि से 'अक्साई चिन' तिब्बती पठार का भाग है और इसे 'खारा मैदान' भी कहा जाता है। यह क्षेत्र लगभग निर्जन है और यहां पर स्थायी बस्तियां नहीं है। इस क्षेत्र में 'अक्साई चिन' नाम की नदी है, जिसके नाम पर इस एरिया का नाम है।

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English summary
Amit Shah asserted in Lok Sabha that PoK and Aksai Chin are part of Jammu and Kashmir and that Kashmir Valley is an integral part of the country, Read Read All about Controversial Part.
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