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Aashirwad Bungalow: वो बंगला, जिसने तीन सुपरस्टार्स का करियर कर दिया खराब

मुंबई को मायानगरी इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहां बहुत से युवा स्टार बनने का सपना लेकर आते हैं। कोई रातों-रात यहां स्टार बन जाता है तो अधिकांश लोग सालों की मेहनत के बाद थक हारकर वापस लौट जाते हैं। जब आप किसी स्टार की जीवनी पढ़ेंगे या सुनेंगे तो उनकी कहानियों में एक बात हमेशा कॉमन मिलेगी कि उनके पास रहने तक के लिए कोई जगह नहीं थी, वे फुटपाथ पर सोये थे।

वहीं जब कोई कलाकार स्टार बन जाता है, तो वो सबसे पहले अपने रहने के लिए एक अच्छा सा आशियाना तलाशता है। क्योंकि यह आशियाना ही उस स्टार की पहचान बनने वाली होती है। जैसे जलसा (अमिताभ बच्चन), मन्नत (शाहरुख खान), गैलेक्सी अपार्टमेंट (सलमान खान) ये नाम ही काफी है उन स्टार कलाकारों की पहचान के लिए।

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इसी तरह मुंबई का कार्टर रोड है जो आज की तारीख में महानगर की सबसे पॉश जगहों में से एक है। यहां पर कई बॉलीवुड कलाकारों की बड़ी-बड़ी कोठियां हैं। इन्हीं में से एक थी 'आर्शीवाद' बंगला, जो नाम ही काफी था यह बताने के लिए कि यह अपने जमाने के सुपर स्टार राजेश खन्ना का घर था। इस घर की कहानी कुछ ऐसी है कि जिसे जानकर आप भी सन्न रह जाएंगे। क्योंकि, इसे बहुत से लोग भूतिया घर भी कहते हैं। हालांकि, इसकी पुष्टि के लिए कोई पुख्ता कहानी किसी के पास नहीं हैं, सिर्फ कयास लगाने के अलावा।

1950 से शुरू होती है इस बंगले की कहानी
1950 के दशक में जब मुंबई में हिंदी फिल्में (बॉलीवुड) अपने पैर जमा चुकी थी। तब मुंबई कार्टर रोड में ज्यादातर पारसियों और एंग्लो-इंडियन लोगों के बंगले हुआ करते थे। फिल्म उद्योग से जुड़े दो लोगों के बंगले इस रोड पर थे। जिसमें से एक संगीतकार नौशाद के पास 'आशियाना' था। वहीं, दूसरा यह 'आशीर्वाद' बंगला, जो भूतिया बंगला भी कहा जाता था। हालांकि, आर्शीवाद बंगला कब बना और इसके पहले मालिक का नाम क्या था। इस बात का खुलासा आज तक नहीं हुआ है।

भारत भूषण ने खरीदा यह बंगला
घर के सामने समुद्र का नजारा दिखाने वाला यह बंगला 50 के दशक में एक एंग्लो-इंडियन के पास था। तब इस बंगले की खूबसूरती और सी फेसिंग नजारा देखकर उस जमाने के मशहूर अभिनेता भारत भूषण ने इसे खरीद लिया था। भारत भूषण तब एक बड़े स्टार कलाकार थे। उन्होंने 'बैजू बावरा', 'मिर्ज़ा ग़ालिब', 'गेटवे ऑफ इंडिया' और 'बरसात की रात' जैसी सुपहहिट फिल्मों से बड़ी सफलता हासिल की थी।

लेकिन, इस घर को खरीदने के कुछ समय बाद भारत भूषण की फिल्में धीरे-धीरे करके फ्लॉप होने लगीं। वे भारी कर्ज में चले गये। इसके बाद जिस बंगले को उन्होंने सुपरस्टार बनने पर खरीदा था, वो बंगला उन्हें आखिरकार छोड़ना पड़ा। कुछ सालों तक यह बंगला खाली रहा, जिससे यह जर्जर हो गया। उस दौरान ये अफवाह कार्टर रोड में खूब उड़ी कि ये बंगला भूतिया है। जो भी इसमें रहेगा, वो तरक्की नहीं करेगा।

राजेंद्र कुमार ने इस बंगले का नाम रखा 'डिंपल'?
इस भूतिया बंगला की कहानी फिल्मी सितारों तक भी पहुंची। इसके बाद 1960 के दशक में हिंदी फिल्मों के उभरते हुए स्टार राजेंद्र कुमार को भी इस बंगले के बारे में पता चला। वो इन बातों पर यकीन नहीं करते थे। इस बंगले की अफवाह के कारण इसकी कीमत उस जमाने में बेहद कम हो गई। तब 60 के दशक में राजेंद्र कुमार ने इस बंगले को 60,000 रुपये की कीमत देकर खरीद लिया।

कुछ मीडिया रिपोर्टस में लिखा है कि राजेंद्र कुमार ने उस दौरान इस घर की कीमत को चुकाने के लिए बीआर चोपड़ा की तीन-तीन फिल्में एक साथ साइन कर ली थी। इस 'भूतिया' बंगले की अफवाह से कहीं न कहीं राजेंद्र कुमार परेशान थे। इसलिए उन्होंने किसी भी अनहोनी से बचने के लिए यहां एक बड़ी पूजा करवायी। इसके बाद वो इस घर में रहने लगे।

उन्होंने इस बंगले का नाम अपनी बेटी के नाम 'डिंपल' पर रखा था। इस 'भूतिया' बंगले को लोग डिंपल के नाम से जानने लगे। हालांकि, ये घर राजेंद्र कुमार के लिए पहले तो भाग्यशाली साबित हुआ। इस बगले में शिफ्ट होते ही राजेंद्र कुमार की किस्मत चमक उठी थी। उनकी फिल्में कई-कई हफ्तों तक थियेटर से हटती नहीं थीं। उन्हें 'जुबली कुमार' के नाम से जाना जाने लगा।

लेकिन, ये सिलसिला लंबा नहीं चल सका और भारत भूषण की तरह राजेंद्र कुमार की किस्मत भी बदल गयी। साल 1968-69 के आसपास, राजेंद्र कुमार की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम होकर गिरने लगीं। वो भी कर्ज में डूबने लगे, उनकी आर्थिक स्थिति खराब होने लगी। यहां तक की वो फिल्मों में साइड एक्टर का रोल करने लगे। इसके बाद पैसों की तंगी के कारण उन्हें ये घर छोड़ना पड़ा।

राजेश खन्ना ने 'डिंपल' को बनाया 'आशीर्वाद'
अब 70 के दशक में इस बंगले की कहानी शुरू होती है राजेश खन्ना के साथ। कहते हैं जब राजेंद्र कुमार अपना बंगला बेचने का मन बना रहे थे। तब इस बात की जानकारी उस जमाने के उभरते सुपरस्टार राजेश खन्ना को लगी। भारत भूषण और राजेंद्र कुमार के रहने की वजह से ये बंगला फिल्मी कलाकारों के बीच हमेशा चर्चा में रहता था।

उस बंगले के बारे में राजेश खन्ना भी जानते थे और वे चमत्कार में विश्वास भी करते थे। ऐसे में राजेश खन्ना ने एड़ी चोटी का जोर लगाते हुए वो बंगला राजेन्द्र कुमार से 3 लाख 50 हजार रुपये में खरीद लिया। इसके बाद उन्होंने इस बंगले का नाम डिंपल से 'आशीर्वाद' कर दिया। ये 'आर्शीवाद' बंगला राजेश खन्ना की एक पहचान के रूप में नामी हो गया।

दरअसल राजेश खन्ना ने 70 के दशक की शुरुआत में रिकॉर्ड लगातार 17 सुपरहिट फिल्में की थी। प्रोड्यूसर उनके यहां लाइन लगाते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि राजेश खन्ना जिस फिल्म में होंगे वो कमाई करके देगी। वे उस जमाने के स्क्रीन आइडल बन गये थे। इस वजह से उनका बंगला भी मुंबई आने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन गया था।
कहते हैं कि समय बदल जाता है लेकिन कभी-कभी किस्मत नहीं बदलती। इस बंगले का हाल भी कुछ ऐसा ही था। जिस तरह से दो बड़े फिल्मी सितारे भारत भूषण और राजेन्द्र कुमार की नैया इस बंगले में डूबी थी। वहीं बात राजेश खन्ना के साथ भी हुआ। राजेश खन्ना का बेहद नाटकीय पतन हुआ। 70 के दशक के अंत तक उनकी फिल्में भी बॉक्स ऑफिस पर धड़ाम होकर गिरने लगी। उनके पारिवारिक रिश्ते खराब होते चले गये। उनकी पत्नी डिंपल खन्ना उन्हें छोड़कर अपने बच्चों को अपने साथ लेकर चलीं गईं। राजेश खन्ना की बुलंदी उन्हें नीचे खींच ले आयी। हालात यहां तक ​​पहुंच गये कि 80 के दशक के अंत तक उनके पास एक भी फिल्म नहीं थी।

कई मीडिया रिपोर्ट्स बताते हैं कि राजेश खन्ना गुमनामी में जाने लगे थे। वे अपने बंगले 'आशीर्वाद' की जगह अपने लिंकिंग रोड वाले ऑफिस में ज्यादा से ज्यादा समय बिताते थे। हालांकि, इन सबके बीच उन्होंने कभी भी बंगला बेचने की नहीं सोची। आखिरकार 18 जुलाई, 2012 में राजेश खन्ना का कैंसर से लड़ते हुए निधन हो गया। समाचार पत्र 'मिड डे' के मुताबिक अगस्त, 2014 में 'आशीर्वाद' बंगले को उद्योगपति शक्ति शेट्टी ने 90 करोड़ रुपये में खरीद लिया। वहीं फरवरी 2016 में बंगले को तोड़ दिया गया। इसके साथ ही मुंबई का ये फेमस 'स्टार' बंगला हमेशा के लिए खत्म हो गया।

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