जीवन-दर्शन: किसी पर हंसना कभी-कभी खुद पर भारी पड़ जाता है
नई दिल्ली। बात छोटी सी है लेकिन पते की है, एक बार की बात है कि एक ट्रेन में एक 26 साल का लड़का अपने मां-बाप के साथ सफर कर रहा था, वो खिड़की के पास बैठा था और आसमां, पेड़-पौधे देखकर जोर-जोर से चिल्ला रहा था। वो बार-बार अपने मां-बाप से कहता देखो-देखो, वो हरा-भरा पेड़, वो देखो मां उस पेड़ पर तो चिड़िया है। उसकी हरकतें काफी हद तक सामान्य आम वयस्क लड़के जैसे नहीं थी।

लड़के की खुशी में मां-बाप भी शामिल
लेकिन अपने बेटे की खुशी पर उसके मां-बाप भी बहुत खुश थे और उसकी हर बात पर खिलखिलाकर हंस रहे थे और ताली बजा रहे थे। मां-बाप और बेटे की इस हरकत को काफी देर से सामने की सीट पर बैठे एक पति-पत्नी देख रहे थे।

किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते ?
उन्हें ये लड़का एबनार्मल लग रहा था, मियां-बीवी लड़के का मजाक उड़ा रहे थे, लेकिन फिर उनसे रहा नहीं गया और वो लड़के के पिता से बोल उठे कि आप अपने बेटे को किसी डॉक्टर को क्यों नहीं दिखाते ?

लड़के के पिता ने बयां किया सच
यह सुनकर उस लड़के के पिता ने उत्तर दिया कि हां , हम डॉक्टर के पास से ही आ रहे हैं और उसने हम लोगों को उसकी हर खुशी में शामिल होने को कहा है। इतना सुनते ही पति-पत्नी एकदम हैरान रह गए।

मेरे बेटे को आज आंखें मिली हैं...
उन दोनों का हाल देखकर लड़के के पिता ने कहा कि दरअसल आज मेरे बेटे की आंखों का सफल ऑप्रेशन हुआ है, वो जन्म से देख नहीं पाता था, हम सब बहुत निराश थे लेकिन आज वो हो गया जिसकी हमने कल्पना भी नहीं की थी और इसी कारण आज उसके हर पागलपन वाली हरकत पर प्यार आ रहा है और ऐसा कहते हुए लड़के की पिता की आंखें भर आईं और वो अपने बेटे की हरकतों में फिर से मगन हो गए।

खुद पर आई शर्म
लड़के की पिता की बात सुनकर लड़के पर हंसने वाले मियां-बीवी की बोलती ही बंद हो गई और उन दोनों को अपने आप पर काफी गुस्सा आया।

सीख
हमें इस कहानी से यह शिक्षा मिलती है कि किसी भी व्यक्ति के विषय में पूरी जानकारी न होने पर उसके बारे में कोई भी धारणा बना लेना एकदम गलत है, हमें ना तो सच्चाई जाने उस पर टिप्पणी करनी चाहिए और ना ही उसका उपहास करना चाहिए।












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