दिवंगत पत्नी की याद में रामसेवक ने पेश की मोहब्बत की मिसाल, बनवाया मंदिर...अब रोज सुबह-शाम करते हैं पूजा
Fatehpur News: कुछ लोग अपनी पत्नी की यादों को संजोए रखने के लिए उनके नाम पर स्कूल कॉलेज खुलवाते हैं। तो कुछ लोग उनके स्मृति (यादों) में टूर्नामेंट और भंडारों का आयोजन करते हैं। लेकिन, अपनी पत्नी की याद में मंदिर बनवाकर हर रोज मूर्ति की पूजा करने के ऐसे बहुत ही कम उदाहरण देखने को मिलते हैं।
जी हां...आज हम आपको एक ऐसे ही शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं जो अपनी दिवंगत पत्नी की मूर्ति मंदिर में स्थापित कर उसकी सुबह-शाम पूजा करता है। पत्नी का मंदिर बनावाकर पूजा करने वाले शख्स का नाम है रामसेवक रैदास। रामसेवक, उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले के बकेवर थाना क्षेत्र के पधारा गांव का रहने वाला है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, रामसेवक रैदास अमीन के पद से रिटायर्ड हैं और उनकी पत्नी मायादेवी का कोरोना काल के दौरान निधन हो गया। पत्नी के निधन के गम में रामसेवक गुमसुम रहने लगे। उन्होंने अपनी पत्नी की यादों को जिंदा रखने के लिए गांव से दो किलोमीटर दूर अपने खेत में मंदिर का निर्माण कराया। फिर उसमें पत्नी की मूर्ति स्थापित कर दी।
अब हर रोज सुबह और शाम वो मंदिर में पूजा करते हैं। रामसेवक रैदास को ऐसा करता देख शुरू में तो ग्रामीणों ने भी उनका मजाक उड़ाया। लेकिन, अब पति-पत्नी के बीच की मोहब्बत को मिसाल बताते हैं। खबरों के मुताबिक, मायादेवी का जन्म 18 मई 1961 को हुआ था। शादी 18 मई 1977 को और निधन 18 मई 2020 को हुआ।
रामसेवक के 5 बच्चे है, जिनमें 3 लड़के और 2 बेटियां हैं। मीडिया से बातचीत में रामसेवक ने बताया कि वह मुझे घर का कोई काम नहीं करने देती थी। मुझे छोड़कर खाना तक नहीं खाती थी...पति की सेवा करने के लिए हमेश बेचैन रहती थी। मैं उससे इतना प्यार करना था कि उसकी मौत के बाद मैं पागल सा हो गया।
रामसेवक ने बताया कि जब शाहजहां अपनी पत्नी मुमताज के लिए ताजमहल बनवा सकता है तो मैं अपनी पत्नी की याद में मंदिर क्यों नहीं बनावा सकता। जिसके बाद मैंने अपनी पत्नी का मंदिर बनवाने का फैसला लिया और मंदिर बनवाया। रामसेवक का कहना है कि पत्नी के मंदिर में पूजा करने से उसके होने का आभास होता है।
इसलिए रोजाना पत्नी के मंदिर में पूजा पाठ करता हूं। बताया कि शुरुआत में मंदिर बनाने के फैसले का ग्रामीणों ने मजाक उड़ाया। लेकिन, अब पति-पत्नी के बीच की मोहब्बत को मिसाल बताते हैं। तो वहीं, अब इलाके में यह मंदिर चर्चा का विषय बना हुआ है।












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