Tamannaah Bhatia: तमन्ना भाटिया की बढ़ी परेशानी, ED ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में की पूछताछ, क्या है पूरा मामला?
Tamannaah Bhatia: बॉलीवुड एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया की मुश्किल बढ़ती नजर आ रही है। तमन्ना भाटिया का नाम महादेव बेटिंग ऐप मामले में सामने आया है। मनी लॉन्ड्रिंग केस के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशाल (ED) ने गुरुवार को पूछताछ की है। तमन्ना आज गुवाहाटी में ईडी के सामने पेश हुई थीं। इस दौरान उनसे महादेव बैटिंग ऐप और ऑनलाइन गेमिंग को लेकर सवाल पूछे गए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कहा कि तमन्ना भाटिया का बयान उनके क्षेत्रीय कार्यालय में धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत दर्ज किया गया। सूत्रों ने कहा कि भाटिया को ऐप कंपनी के एक कार्यक्रम में "सेलिब्रिटी की तरह दिखने" के लिए कुछ पैसा मिला था और उनके खिलाफ कोई "अपराधी" आरोप नहीं थे।

रिपोर्ट के मुताबिक तमन्ना भाटिया पर आरोप है कि उन्होंने महादेव ऑनलाइन गेमिंग के सपोर्टिव बैटिंग ऐप यानी फेयरप्ले पर IPL मैचों को अवैध तरीके से देखने को बढ़ावा दिया था। तमन्ना भाटिया अपनी मां के साथ गुवाहाटी पहुंची थीं। सूत्रों के मुताबिक तमन्ना भाटिया को पहले भी बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने काम के कारण समन टाल दिया और गुरुवार को पेश होने का फैसला किया।
ये भी पढ़ें- क्या अर्जुन-मलाइका के बाद तमन्ना-विजय ने अलग कर ली राहें? कपल ने फैंस को ऐसे दिया सबूत
महादेव बेटिंग ऐप केस के बारे में जानिए सबकुछ?
इस मामले में मार्च में ईडी द्वारा दायर आरोपपत्र में कुल 299 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है, जिनमें 76 चीनी नियंत्रित संस्थाएं शामिल हैं, जिनमें 10 निदेशक चीनी मूल के हैं जबकि दो संस्थाएं अन्य विदेशी नागरिकों द्वारा नियंत्रित हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग का मामला कोहिमा पुलिस की साइबर अपराध इकाई की एक प्राथमिकी के बाद सामने आया था। जिसमें बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग करके भारी रिटर्न का वादा करके "भोले-भाले" निवेशकों को ठगने के आरोप में भारतीय दंड संहिता, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत विभिन्न आरोपियों पर मामला दर्ज किया गया है।
ये भी पढ़ें- अवैध IPL स्ट्रीमिंग केस में समन के बावजूद पूछताछ के लिए नहीं पहुंची तमन्ना भाटिया, आखिर क्या हुई बात?
पुलिस ने कहा कि आरोपियों ने निवेशकों को "धोखा" देने के लिए 'एचपीजेड टोकन' मोबाइल फोन एप्लिकेशन का इस्तेमाल किया था। एजेंसी ने कहा कि अपराध की आय को "स्तरित" करने के उद्देश्य से "डमी" निदेशकों वाली विभिन्न "शेल संस्थाओं" द्वारा बैंक खाते और मर्चेंट आईडी खोले गए थे। इसने दावा किया कि ये धन अवैध ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी और बिटकॉइन माइनिंग के लिए निवेश के लिए "धोखाधड़ी" से प्राप्त किए गए थे।
ईडी ने कहा कि 57,000 रुपये के निवेश के लिए, तीन महीने के लिए प्रति दिन 4,000 रुपये का रिटर्न देने का वादा किया गया था, लेकिन पैसे का भुगतान केवल एक बार किया गया और उसके बाद आरोपियों ने निवेशकों से नए फंड मांगे। ईडी ने कहा कि इस मामले में देश भर में तलाशी ली गई, जिसके परिणामस्वरूप 455 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति और जमा जब्त किए गए।












Click it and Unblock the Notifications