‘मां, माटी, मानुष’ से ‘पोरिबर्तन’ तक, Brigade Parade Ground के मंच पर क्या-क्या दिखा? इतिहास भी है दिलचस्प
Bengal New CM: कोलकाता का Brigade Parade Ground आज पोरिबर्तन (परिवर्तन) का बड़ा गवाह बना। 15 साल की टीएमसी की सत्ता और उससे पहले की वाम सरकार के बाद पहली बार भाजपा वहां कमल खिलाने में कामयाब रही और इस कामयाबी का ताज सजा चुनाव के प्रमुख चेहरे रहे सुवेंदु अधिकारी के सिर। लेकिन जिस ब्रिगेड परेड मैदान में उनकी शपथ हुई उस पर एक और बात ने सबका ध्यान खींचा वो थी बैकग्राउंड में लगा पोरबर्तन का पोस्टर। आइए इस पोस्टर को डिकोड कर बंगाली संस्कृति और इतिहास के ताने-बाने को समझते हैं। साथ ही इस मैदान का बंगाल की राजनीति में महत्व और वहां के इतिहास को भी जानेंगे।
ब्रिटिश दौर से राजनीति के केंद्र तक का सफर
एक समय ऐसा था जब Brigade Parade Ground ब्रिटिश सेना की रणनीतिक गतिविधियों का अहम केंद्र हुआ करता था। लेकिन समय के साथ इसकी पहचान बदलती चली गई। यह मैदान बाद में बंगाल की बदलती राजनीति और बड़े राजनीतिक आंदोलनों का गवाह बन गया। बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान ने भी यहीं अपना ऐतिहासिक भाषण दिया था। इसके अलावा लंबे समय तक यह मैदान वामपंथी राजनीति की ताकत और बड़े जन सैलाब का प्रतीक बना रहा।

ममता बनर्जी से BJP तक क्या बदला?
कांग्रेस विरोधी आंदोलनों से लेकर ममता बनर्जी के बड़े शक्ति प्रदर्शन तक, Brigade Parade Ground हमेशा बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा मंच बना रहा। लेकिन अब यहां एक नई राजनीतिक तस्वीर दिखाई देने जा रही है। पहली बार पश्चिम बंगाल में BJP सरकार का पहला शपथ ग्रहण समारोह का गवाब भी यही मैदान बना। इसे बंगाल की राजनीति में एक बड़े "Poroborton" यानी परिवर्तन के तौर पर देखा जा रहा है।
'मां, माटी, मानुष' और 'Poroborton' थीम पर बना मंच
शपथ ग्रहण समारोह के लिए तैयार किया गया मंच बंगाल की संस्कृति और राजनीति दोनों का मिश्रण दिखा रहा है। पूरे मंच को "मां, माटी, मानुष" की थीम पर डिजाइन किया गया है, लेकिन उसमें "Poroborton" यानी बदलाव की झलक भी दिखाई दे रही है। मंच की सजावट में बंगाली संस्कृति को खास जगह दी गई है।
टैगोर, महाकाली और दक्षिणेश्वर मंदिर की झलक
मंच पर गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के चित्र लगाए गए हैं। इसके साथ ही अष्टभुजा माता महाकाली की भव्य छवि भी बनाई गई है। जिसमें उनकी आस्था में बंगाली महिलाएं धुनुची नृत्य करते हुए दिखीं। दक्षिणेश्वर मंदिर की प्रतिकृति भी मंच का हिस्सा है। इतना ही नहीं, एक विशाल मंदिरनुमा मेहराब और कमल के आकार की रंगोली को इस आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनाया गया है। इससे साफ दिखता है कि आयोजक इस समारोह को सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान के तौर पर भी पेश करना चाहते हैं।
राजनीति के साथ बंगाल की संस्कृति का प्रदर्शन
इस पूरे आयोजन में सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि बंगाल की संस्कृति को भी प्रमुखता दी गई है। मैदान को टेराकोटा आर्ट, दक्षिणेश्वर काली मंदिर स्टाइल की संरचनाओं और सुंदरबन थीम पर तैयार की गई इंस्टॉलेशन से सजाया गया है। इसके अलावा छाऊ, बाउल और गम्भीरा जैसे पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं, जो बंगाल की हजारों साल पुरानी सांस्कृतिक विरासत को दिखाते हैं।
बंगाली मिठाईयों से सजे खाने-पीने के स्टॉल
कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए झालमुड़ी, रसगुल्ला और संदेश जैसे बंगाल के मशहूर व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं। यही वजह है कि यह राजनीतिक आयोजन अब एक बड़े सार्वजनिक उत्सव जैसा दिखाई दे रहा है। मैदान के अलग-अलग हिस्सों में रवींद्रनाथ टैगोर और बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय जैसी महान हस्तियों के चित्र भी लगाए गए हैं।
बंगाल की राजनीति का सबसे बड़ा प्रतीक बना मैदान
पश्चिम बंगाल में समय के साथ सरकारें बदलीं, विचारधाराएं बदलीं और राजनीतिक नारे भी बदलते रहे। लेकिन Brigade Parade Ground हमेशा एक ऐसी जगह बना रहा, जहां से बड़े राजनीतिक संदेश पूरे राज्य और देश तक पहुंचते रहे। अब यह मैदान एक बार फिर बंगाल के राजनीतिक इतिहास में नया अध्याय लिखने जा रहा है।
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