फिल्म 'द डिप्लोमैट' के ‘JP Sir’ कौन हैं? जो भारत की डिप्लोमैसी को कर रहे मजबूत, जानिए उज्मा अहमद केस क्या है?
Who Is JP Singh: इन दिनों जॉन अब्राहम की एक फिल्म 'द डिप्लोमैट' खूब चर्चा में हैं। सिनेमाघरों में धूम मचाने के बाद ये फिल्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर भी ये ट्रेंड कर रही है। इस कहानी की खासियत है कि ये भारत के विदेश सेवा अधिकारी (IFS) जेपी सिंह की कहानी है। जिनकी सूझबूछ ने एक भारतीय लड़की उज्मा अहमद की पाकिस्तान से वापासी कराई।
जेपी सिंह की सिर्फ एक यही उपलब्धि नहीं है। इसके अलावा भी वो डिप्लोमैसी के स्तर पर भारत को नई-नई जीत दिलवा रहे हैं। जेपी सिंह देश के वो हीरो हैं जिनके बारे में जनता को बहुत ज्यादा नहीं पता। इस रिपोर्ट में हम उनकी शख्सियत से आपको रूबरू करवा रहे हैं। पढ़िए ये रिपोर्ट।

जेपी सिंह का पूरा नाम जितेंद्र पाल सिंह है। उन्होंने सोशोलॉजी में अपना ग्रेजुएशन किया है। साल 2002 में वो भारतीय विदेश सेवा से जुड़े और डिप्लोमैट ने। उनके जीवन का पहला असाइनमेंट 2004 से 2006 तक इंडियन मिशन मॉस्को में था। इसके बाद वो 2008-12 तक काबुल में रहे। उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि 2014 से 2019 के कार्यकाल के बीच मिली। जब वो पाकिस्तान में भारत के डिप्टी हाई कमिश्नर के पद पर रहे। इस दौरान उन्होंने उज्मा को पकिस्तानी ताहिर के चंगुल से बचाया था।
द डिप्लोमैट फिल्म का ये ट्रेलर देखिए...
उज्मा अहमद दिल्ली की रहने वाली है। ऑनलाइन उसकी दोस्ती पाकिस्तानी नागरिक ताहिर अली से हुई। ताहिर ने उसे खूब सपने दिखाए और पाकिस्तान बुलाया। जहां उसने उज्मा से जबरदस्ती शादी की। जबकि वो शादीशुदा और बाल-बच्चे वाला था। ये बात उज्मा को वहां जाकर पता चली। ताहिर ने उज्मा को अपनी कैद में रखा और नशीली दवाई देकर जबरदस्ती करता। एक दिन उज्मा ताहिर के चंगुल से भागकर इस्लामाबाद स्थित भारतीय दूतावास पहुंची। यहां उसने अपना पूरा दर्द सुनाया। डिप्टी हाई कमिश्नर ने तुरंत उज्मा को दूतावास में शरण दी। लेकिन वहां से भारत लाने का रास्ता आसान नहीं था। ताहिर ने इस्लामाबाद हाईकोर्ट में केस दर्ज कर दिया। इसके बाद लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी, जिसके बाद 25 मई 2017 को उज्मा वाघा बॉर्डर से भारत लेकर आया गया। ये वो मामला है जिसने जेपी सिंह को दुनियाभर में पहचान दिलाई। तत्कालीन विदेश मंत्री स्व. सुषमा स्वराज ने भी जेपी सिंह की खूब तारीफ की। लेकिन जेपी की कूटनीति का ये सिलसिला अभी भी जारी है।
वर्तमान ने जेपी सिंह इजराइल में भारत के एंबेस्डर हैं। लेकिन जब वो अफगानिस्तान में पोस्टेड थे, तब उन्होंने तालिबान के कब्जे के बाद भी भारत की राजनायिक स्थिति को वहां मजबूत की थी। बीते दिनों भारत के डेलिगेशन ने काबुल में तालिबान के विदेश मंत्री आमिर खान से भी मुलाकात की थी। इसमें जेपी सिंह भी मौजूद थे। जेपी सिंह इन दिनों भारत के तालिबान से राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर रिश्ते मजबूत बनाने की कोशिश में हैं। साल 2022 में तालिबानी शासन अच्छे रिश्ते बना भारतीय दूतावास को फिर से खोलने की नींव जेपी सिंह ने रखी थी। इसके अलावा भारत भी लगातार तालिबान को मदद भेजता रहता है।
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