जब लता मंगेशकर को दिया गया था जहर, तीन महीने तक बेड से नहीं उठ सकी थीं..
मुंबई, 06 फरवरी। बॉलीवुड की स्वर कोकिला लता मंगेशकर ने आज दुमिया को अलविदा कह दिया है। लता जी के निधन पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है। 92 साल की उम्र में लता मंगेशकर ने दुनिया को अलविदा कह दिया है। लेकिन शायद बहुत कम लोग ही यह जानते हैं कि एक बार लता मंगेशकर को जहर देकर मारने की भी कोशिश की गई थी। जब लता मंगेशकर महज 33 साल की थीं तो उन्हें जहर देकर मारने की कोशिश हुई थी। खुद लता मंगेशकर ने इस घठना के बारे में यादें एक इंटरव्यू में साझा की थी।

मुश्किल दौर से गुजरीं थी लता जी
एक बातचीत के दौरान लता मंगेशकर ने बताया था कि हमारी जिंदगी का एक बहुत ही खौफनाक दौर भी रहा है, इसलिए हम मंगेशकर्स की बत नहीं करते हैं। जब मैं 33 साल की थी तो 1963 में मैं बहुत ही कमजोर महसूस करने लगी थी। यहां तक कि मैं बिस्तर से उठ तक नहीं पाती थी। हालात इतने बुरे हो गए थे कि अपने दम पर चला भी मेरे लिए काफी मुश्किल हो गया था। लेकिन इन सब मुश्किलों के बाद भी धीरे-धीरे लता मंगेशकर ठीक हो गईं और एक बार फिर से उन्होंने ना सिर्फ चलना-फिरना शुरू किया बल्कि एक से बढ़कर एक गीत गाकर दुनिया को अपना लोहा मनवाया।

धीमा जहर दिया गया था
लता जी ने बताया कि इलाज के बाद वह धीरे-धीरे ठीक होने लगी थीं। डॉक्टरों ने इस बात की पुष्टि की थी कि मुझे धीमा जहर दिया गया था। लेकिन मेरे दृढ़ संकल्प और डॉक्टरों के बेहतर इलाज से मैं ठीक होने लगी थी। मैं एक बार फिर से ठीक हो रही थी और तीन महीने के बाद मैं बिस्तर से उठ सकी। ठीक होने के बाद मैंने फिर से गाना गाना शुरू किया। ठीक होने के बाद लता मंगेशकर के घर पर खुद हेमंत कुमार आए थे। उन्होंने लता जी की मां से इजाजत मांगी कि गाना रिकॉर्ड कराने के लिए लता जी को मेरे साथ भेजें।
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ठीक होने के बाद गाया था ये गाना
लता मंगेशकर ने बताया कि हेमंत दा जब मेरे घर आए तो उन्होंने मेरी मां से मुझे रिकॉर्डिंग के लिए ले जाने की इजाजत मांगी। उन्होंने इस वादे के साथ मुझे रिकॉर्डिंग रूम ले जाने की इजाजत मांगी कि अगर मेरे भीतर किसी भी तरह के तनाव के लक्षण दिखे तो मैं उन्हें तुरंत वापस ले आऊंगा। सबकुछ अच्छा रहा और मेरी रिकॉर्डिंग काफी अच्छी रही, मैंने अपनी आवाज नहीं खोई थी। लता जी ने ठीक होने के बाद पहला गाना कहीं दीप जले कहीं दिल गाया था जिसके लिए उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था।

मजरूह सुल्तानपुरी की वजह से ठीक हो पाई
गीतकार मजरूह सुल्तानपुरी ने लता जी के ठीक होने में काफी अहम भूमिका निभाई थी। लता जी बताती हैं कि मजरूह सुल्तानपूरी मेरे घर आते थे और मुझे कविताएं सुनाकर मेरा दिल बहलाते थे। वह काफी व्यस्त रहते थे लेकिन मेरे लिए वह समय निकालते थे। वह मेरी बीमारी के दौरान रोज आते थे। वह मेरे लिए खाना भी लेकर आते थे। अगर उस वक्त मजरूह सुल्तानपुरी ना होते तो मेरा ठीक हो पाना शायद काफी मुश्किल होता।

किसने दिया जहर
वहीं जब लता मंगेशकर से यह पूछा गया कि आपको जहर किसने दिया तो उन्होंने इसका जवाब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मुझे पता है कि मुझे जहर किसने दिया लेकिन हमने कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि हमारे पास उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था। लता जी ने बताया कि मेरे डॉक्टर आरपी कपूर ने मुझसे कहा था कि वह मुझे खड़ा करके मानेंगे। मैं यह बात बिल्कुल साफ करना चाहती हूं कि मैंने अपनी आवाज नहीं खोई थी, लेकिन लोगों के बीच यह गलतफहमी फैलाई गई कि मैंने कुछ समय के लिए अपनी आवाज खो दी थी, लोगों ने यह तक फैलाया कि डॉक्टर ने कहा है कि मैं अब कभी गा नहीं पाउंगी लेकिन यह सब काल्पनिक कहानी है।












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