विपुल शाह ने बस्तर के बारे में बताई ऐसी बात जिसे सोच कर ही आपकी रूह काँप जायेगी
Bastar The Naxal Story: छत्तीसगढ़ के बस्तर की सच्ची घटना पर आधारित फिल्म "बस्तर: द नक्सल स्टोरी" का बेसब्री से इंतजार कर रहें फैंस का इंतजार खतम हुआ, क्योंकि आज सिनेमा घरों में यह फिल्म रिलीस हो चुकी है। यह फिल्म आपको उस घटना से रुबरु कराएगी, जिसे देख आपकी रूह काँप जायेगी। बस्तर के नक्सल हमलें का ऐसा सच्च जो दुनिया से अंजान था।
साल 2023 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर में से एक, 'द केरल स्टोरी' देने के बाद एक्ट्रेस अदा शर्मा अब जल्द ही फिल्म 'बस्तर: द नक्सल स्टोरी' में नजर आने वाली है। इस फिल्म के निर्माता विपुल अमृतलाल शाह और निर्देशक सुदीप्तो सेन है। ऐसी फिल्मों को अक्सर एजेंडा और प्रोपेगैंडा कहा जाता है। इनकी कहानी पर सवाल उठाया जाता है, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी घटनाओं और उन लोगों के बारे में सोचा है जो वहां इस घटनाओं को शिकार होते हैं।

नक्सलवाद शब्द की उत्पत्ति कब और कैसे हुआ था
नक्सलवाद शब्द की उत्पत्ति पश्चिम बंगाल के नक्सलवाड़ी गाँव से हुई थी। भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी के नेता चारु माजूमदार और कानू सान्याल ने 1967 में सत्ता के खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन शुरु किया। वर्ष 1969 में पहली बार चारु माजूमदार और कानू सान्याल ने जंगल संथाल की भूमि अधिग्रहण को लेकर पूरे देश में सत्ता के खिलाफ एक व्यापक लड़ाई शुरू कर दी।
भूमि अधिग्रहण को लेकर देश में सबसे पहले आवाज नक्सलवाड़ी से ही उठी थी। आंदोलनकारी नेताओं का मानना था कि 'जमीन उसी को दी जायें जो उस पर खेती करें'।
नक्सलियों का कहना है कि वे उन आदिवासियों और गरीबों के लिये लड़ रहे हैं, जिनकी सरकार ने दशकों से अनदेखी की है। वे ज़मीन के अधिकार एवं संसाधनों के वितरण के संघर्ष में स्थानीय सरोकारों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नक्सलवाद प्रभावित अधिकतर इलाके आदिवासी बहुल हैं और यहाँ जीवनयापन की बुनियादी सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन इन इलाकों की प्राकृतिक संपदा के दोहन में सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों ने कोई कमी नहीं छोड़ी है। यहाँ न सड़कें हैं, न पीने के लिये पानी की व्यवस्था, न शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी सुविधाएँ और न ही रोज़गार के अवसर।
नक्सलवाद उभार के आर्थिक कारण भी रहे हैं। नक्सली सरकार के विकास कार्यों में बाधा उत्पन्न करते हैं। वे आदिवासी क्षेत्रों का विकास नहीं होने देते और उन्हें सरकार के खिलाफ भड़काते हैं। वे लोगों से वसूली करते हैं एवं समांतर अदालतें लगाते हैं। प्रशासन तक पहुँच न हो पाने के कारण स्थानीय लोग नक्सलियों के अत्याचार का शिकार होते हैं।
नक्सली अपने समुह की शख्य बढ़ाने के लिए स्थानीय लोगों के हर घर से एक बच्चा चाहिए होता है, यदि लोग देने से मना कर दें तो नक्सली पुरे परिवार को जान से मार देते है।
छत्तीसगढ़ में हुऐ अब तक के नक्सली हमलें
2007 छत्तीसगढ़ के बस्तर में 300 से ज्यादा विद्रोहियों ने 55 पुलिसकर्मियों को मौत के घाट पर उतार दिया था।
2011 छत्तीसगढ के दंतेवाड़ा में हुए एक बड़े नक्सलवादी हमले में कुल 76 जवान शहीद हो गए जिसमें सीआरपीएफ के जवान समेत पुलिसकर्मी भी शामिल थे।
2013 छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में नक्सलियों ने कांग्रेस के नेता समेत 27 व्यक्तियों की हत्या कर दी।
2021 में छत्तीसगढ़ के बीजापुर में सुरक्षा बलों के 23 जवान शहीद हो गए और 31 जवान घायल हुए।
2024 छत्तीसगढ़ के सुगमा के जोनागुड़ा-अलिगुड़ा क्षेत्र मे कोबरा,डीआरजी और एसटीएफ के जवानों पर हमला किया जिसमे 3 जवान शहीद हो गये और 15 जवान घायल हो गये ।
र्निमाताओं का कहना
फिल्म के बारे में बात करते हुए निर्माता विपुल अमृतलाल शाह ने कहा कि, "बस्तर: द नक्सल स्टोरी के साथ कई सच्चाइयों को उजागर करने की यात्रा जारी है। 'द केरल स्टोरी' के बाद हम एक और धमाकेदार कहानी को उजागर करने के लिए तैयार हो रहे हैं। इस बोल्ड कहानी को पेश करना सम्मान की बात है। ये ऐसी कहानी है जो हर किसी को अंदर तक झकझोर देगी।"
वहीं निर्देशक सुदीप्तो सेन ने कहा, "द केरल स्टोरी को मिले जबरदस्त प्यार और आशीर्वाद के बाद हमने आजाद भारत के एक और डेडली सीक्रेट को सामने लाने की हिम्मत जुटाई। जो कि बस्तर यानि हमारे देश के दिल से है। ये एक भयंकर, घिनौनी सच्चाई है जो आपके अस्तित्व को झकझोर देगी। हमारा दृढ़ विश्वास है कि आपने हमें जो आशीर्वाद और समर्थन दिया है, हमें फिर वैसा ही आशीर्वाद और समर्थन मिलेगा।''












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