'मेरी पत्नी एक गर्वित मुस्लिम है और मैं गर्वित हिंदू', मनोज बाजपेयी ने अपनी शादी को लेकर किया ये बड़ा खुलासा
Manoj Bajpayee: मनोज बाजपेयी ने कहा- शबाना रजा के साथ मेरी शादी, धर्म से कहीं अधिक, उन मूल्यों के बारे में है जो हम एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं।

Manoj Bajpayee: इस समय बॉलीवुड के शानदार एक्टर मनोज बाजपेयी सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। दरअसल उन्होंने अपनी पत्नी के मुसलमान होने और धर्म को लेकर कुछ ऐसी बातें कही हैं जिसके चलते वह लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गए हैं। मनोज बाजपेयी ने कहा है कि वह अपनी पत्नी शबाना रजा के साथ धर्म के बारे में कभी भी चर्चा नहीं करते हैं। मनोज बाजपेयी ने कहा- जब उन्होंने शादी करने का फैसला किया था तो उन्हें अपने परिवार से किसी प्रकार के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा था। मनोज बाजपेयी ने कहा कि उनकी पत्नी एक 'गर्वित मुस्लिम' हैं, जैसे वह 'गर्व से हिंदू' हैं, लेकिन धर्म से ज्यादा, वह और उनकी पत्नी अच्छे मूल्यों से एक दूसरे का साथ बंधे हैं।
मनोज बाजपेयी ने कहा- हमारी शादी मूल्यों पर हुई है
मनोज बाजपेयी ने मोजो स्टोरी के लिए पत्रकार बरखा दत्त को इंटरव्यू देते हुए कहा- शबाना के साथ मेरी शादी, धर्म से कहीं अधिक, उन मूल्यों के बारे में है जो हम एक दूसरे के साथ शेयर करते हैं। अगर आने वाले कल में हममें से कोई एक अपने मूल्यों को बदल देता है, तो हमारी शादी कभी नहीं चलेगी।

'मेरी शादी को लेकर किसी ने विरोध नहीं किया था'
मनोज बाजपेयी से जब पूछा गया कि क्या परिवार के सदस्यों के बीच उनके अंतर-धार्मिक संबंधों के बारे में कोई बात हुई थी तो उन्होंने कहा- अगर कोई था, तो ये मुझे नहीं बताया गया था, या फिर मुझे ये स्पष्ट नहीं किया गया था। मैं एक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखता हूं। वहीं शबाना के परिवार का नाम काफी प्रतिष्ठत है। लेकिन हैरानी की बात ये है कि मेरे परिवार के किसी भी सदस्य ने कभी इस शादी का विरोध नहीं किया। आज तक नहीं और न ही किसी ने मेरी पत्नी से धर्म के बारे में कोई बात की है।
'मेरी पत्नी एक गर्वित मुस्लिम है'
मनोज बाजपेयी ने कहा- मेरी पत्नी धार्मिक नहीं हैं लेकिन वह आध्यात्मिक हैं। वह एक गर्वित मुस्लिम हैं और मैं एक गर्वित हिंदू हूं लेकिन ये रिश्ता एक-दूसरे से नहीं टकराता है। उन्होंने कहा- मैं किसी भी धर्म-विरोधी टिप्पणी को बर्दाश्त नहीं करता। भले ही कुछ लोग मेरी पत्नी के धर्म के बारे में बात करते हैं लेकिन इस बारे में मुझसे बात करने की ताकत या साहस उन लोगों में नहीं है।
'मैं धर्म के बारे में कोई बात नहीं करता'
मनोज बजापेयी ने कहा- लोग ये बात अच्छे से जानते हैं कि जब कोई इस तरह की बात करता है तो मैं बहुत सख्त हो जाता हूं। मैं बहुत मुश्किल से काबू में आता हूं। अगर मेरे दोस्त में भी धर्म को लेकर कोई बात करते है तो वो लोग मेरा गुस्सा जानते हैं। उन्हें पता है कि मुझे इस तरह की बातें बिल्कुल पसंद नहीं है।
'मेरी बेटी को बौद्ध धर्म पसंद है'
मनोज बाजपेयी ने बताया कि जब उनकी बेटी तीसरी या चौथी कक्षा में थी, तो उसने अपनी मां से पूछा था कि वह किस धर्म से हैं क्योंकि इस विषय पर स्कूल में चर्चा हो रही थी। लेकिन जब मनोज बाजपेयी ने अपनी बेटी से पूछा कि वह किस धर्म का पालन करना चाहेगी, तो उसने कहा- बौद्ध धर्म का। बेटी ने शायद इसलिए ऐसा कहा था कि वह उस समय बौद्ध भिक्षुओं के प्रति काफी आकर्षित थी।
'बच्चों की सोच को सीमित मत करो'
मनोज बाजपेयी ने आगे कहा- उस उम्र में किसी बच्चे को ये बताना कि वह किस धर्म का है, सही नहीं है। उन्हें स्वयं को खोजने दो, उन्हें स्वयं धर्म के बारे में जानने दो। उन्हें एक कोने में धकेलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। बच्चों की सोच को सीमित करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।












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