पिंडदान और महामंडलेश्वर के बाद ममता कुलकर्णी का पहला बयान, बोलीं- 'मैंने कुछ नहीं किया सब महादेव'
Mamta Kulkarni First Statement: ममता कुलकर्णी ने सन्यास ले लिया है। संगम के तट पर उन्होंने पिंड दान किया। अब ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर यमाई ममता नंद गिरी के नाम से जाना जाएगा। किन्नर अखाड़े की आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी ने उन्हें महामंडलेश्वर की उपाधि दी है। ममता भगवा चोला पहने हुए, आज ही सुबह महाकुंभ पहुंची थी।
पिंडदान के बाद ममता का पहला बयान सामने आया है। ममता से सन्यास जीवन और महामंडलेश्वर बनने के बारे में पूछा गया। उन्होंने कहा, मैं क्या कहूं...ये महादेव और महाकाली का आदेश था। मेरे गुरु का भी आदेश था। आज का दिन उन्होंने ही तय किया है। मैंने कुछ भी नहीं किया है। बता दें, ममता पहले से ही जूना अखड़ा के महांमडलेश्वर के साथ दीक्षित थीं।

किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर डॉ.लक्ष्मी नारायण का भी बयान सामने आया है। न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा, ममता कुलकर्णी को किन्नर अखाड़ा महामंडलेश्वर बनाने जा रहा है। उनका नाम श्री यमाई ममता नंद गिरी रखा गया है। उनका पिंड दान का कार्य भी हो चुका है। महामंडलेश्वर बनने के पहले जो भी कार्य होते हैं, वो सभी काम किए जा चुके हैं।
महामंडलेश्वर ने आगे कहा, वो पिछले डेढ़ साल से मेरे और किन्नर अखाड़े के संपर्क में थी। मुझसे मिलने से पहले वो जूना अखड़ा के महांमडलेश्वर के साथ दीक्षित थीं। उनके गुरु ब्रह्मलीन होने के बाद, जब उन्हें दिशा नहीं मिल रही थी। वो सनातन से पूर्ण रूप चाहती हैं, दो-तीन महीने पहले उन्होंने मुझसे इच्छा जाहिर की। कल जब वापस वो अखाड़े में आई और कहा माता मुझे कुछ पद चाहिए। उन्होंने कहा मुझे महामंडलेश्वर का पद चाहिए। तब हमने उनके सामने सारी शर्ते रखीं और कहा सन्यास लेना होगा। दूसरी दुनिया को छोड़कर, हमारी दुनिया में रहना होगा। अगर आपको कोई धार्मिक कैरेक्टर मिलता है तो कर सकती हो। क्योंकि किसी की कलाकारी को हम रोक नहीं लगाएंगे। जो भी सनातन के ध्वज में आएगा, हम उसे लेकर चलेंगे। वो पूर्णरूप से सनातन में शरणागत होकर आई हैं। जो बच्चा सनातनी है और सनातनी धर्म में आया है। उसे किन्नर अखाड़ा अपनाएगा।
ख़ैर बता दें, हिट एक्ट्रेस रहने के बाद वो पिछले 24 साल से एक गुमनाम जिंदगी जी रही थी। ममता साल 2000 में भारत छोड़ विदेश शिफ्ट हो गईं थी। पिछले साल न्यूज एजेंसी IANS से इस विषय पर ममता ने बात की थी। तब उन्होंने कहा था, मैं भारत अध्यात्म की वजह से आई थी। मेरा अध्यात्म की तरफ झुकाव 1996 से ही रहा है। उन दिनों मेरी मुलाकात गुरु गगन गिरी महाराज से हुई थी। उसके बाद मेरी रुचि अध्यात्म को लेकर और बढ़ गई। इसके बाद मैंने तपस्या शुरू कर दी। बॉलीवुड ने मुझे पहचान और नाम दिया, लेकिन मेरा इससे साथ छूट गया है। बॉलीवुड में दोबारा एंट्री पर ममता ने कहा था, मुझे अब इसमें या किसी और में इंट्रेस्ट नहीं है। मेरी उम्र भी बॉलीवुड में दोबारा आने की नहीं है।
बता दें, ममता का नाम 2016 के बीच 2000 करोड़ के ड्रग्स मामले में आया था। उनका नाम विक्की गोस्वामी (ड्रग माफिया) के साथ भी जोड़ा गया था। पुलिस ने दावा किया था कि ममता 2016 में केन्या के होटल ब्लिस में हुई मीटिंग में मौजूद थी। हालांकि ममता ने हमेशा ही इन आरोपों को सिरे से नकारा था। बाद में बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी उन्हें निर्दोष बताया था।












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