हेमा ने साझा किया अफगानिस्तान में शूटिंग का अनुभव, ढाबे पर खानी पड़ी थी प्याज-रोटी, ये हिट गाना हुआ था शूट
नई दिल्ली, 17 अगस्त। अफगानिस्तान इस समय राजनीति संकट के दौर से गुजर रहा है। मौजूदा समय में यहां कोई सरकार नहीं है। राष्ट्रपति अशरफ गनी देश छोड़कर चले गए हैं। काबुल, कंधार समेत पूरे अफगानिस्तन पर तालिबान ने नियंत्रण कर लिया है। लोग किसी तरह से तालिबान से अपनी जान छुड़ाकर यहां से भागना चाहते हैं। पिछले कुछ समय से यहां बड़े पैमाने पर हिंसा हुई और सैकड़ों लोगों की जान चली गई है।

बिगड़े हालात के बीच हेमा को याद आए पुराने दिन
काबुल में जिस तरह से बड़ी संख्या में लोग एयरपोर्ट के पास इकट्ठा हुए, गोलीबारी की घटनाएं सामने आई और लोग हवाई जहाज के पहियों पर खुद को बांधकर देश छोड़ने की कोशिश में जान गंवा रहे हैं वह दृश्य किसी के लिए दिल दहलाने वाले हैं। लेकिन हमेशा से अफगानिस्तान के हालात ऐसे नहीं रहे हैं। फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने पुराने दिनों को याद करते हुए अफगानिस्तान में शूटिंग के अपने अनुभव को साझा किया है जब वह यहां फिरोज खान के साथ फिल्म की शूटिंग करने गई थीं।

1975 में धर्मात्मा फिल्म की शूटिंग
कई दशक पहले हेमा मालिनी खूबसूरत शहर काबुल गई थीं। खुद इस अनुभव को हेमा मालिनी ने साझा करते हुए बताया कि काबुल काफी खूबसूरत था, मैंने यहां बामियान, खैबर पास और बंद ए अमीर की यात्रा की थी। यही नहीं हेमा ने बताया कि उस दौरान एक ढाबे पर मैंने रोटी और प्याज खाई थी। हेमा मालिनी 1975 में फिल्म धर्मात्मा की शूटिंग के लिए अफगानिस्तान गई थीं। इस फिल्म की शूटिंग के अनुभव को हेमा मालिनी ने साझा किया है।

क्या खूब लगती हो की शूटिंग हुई अफगानिस्तान में
धर्मात्मा फिल्म में हेमा मालिनी के अलावा फिरोज खान, रेखा, प्रेमनाथ, डैनी डेनजोग्पा, फरीदा जलाल, रंजीत, हेलन व अन्य कलाकार मुख्य भूमिका में थे। फिल्म का लोकप्रिय गाना क्या खूब लगती हो को अफगानिस्तान में ही शूट किया गया था। एक इंटरव्यू में हेमा मालिनी ने कहा कि जिस काबुल को मैं जानती हूं वह बहुत खूबसूरत था, मेरा वहां का अनुभव काफी अच्छा था।

काबुल एयरपोर्ट के पास होटल में रुके थे हम
हेमा मालिनी ने बताया कि हम काबुल एयरपोर्ट पर लैंड करने के बाद यहां से शूटिंग के लिए रवाना हुए थे। उस वक्त काबुल एयरपोर्ट काफी छोटा था, जैसा उस वक्त मुंबई का एयरपोर्ट था। काबुल पहुंचने के बाद हम पास के होटल में रुके थे। इसके बाद हम बामियान और बंद ए आमिर शूटिंग के लिए गए थे। यहां से लौटते वक्त हमने लंबे कुर्ते और दाढ़ी में स्थानी लोगों को देखा जोकि तालिबानियों की तरह दिखते थे। उस वक्त रूस की सेना भी अफगानिस्तान में थी।

फिरोज खान ने मैनेज की थी पूरी ट्रिप
अपने अनुभव को साझा करते हुए हेमा मालिनी ने कहा कि उस वक्त वहां कोई दिक्कत नहीं थी, वहां काफी शांति थी, फिरोज खान ने पूरी ट्रिप को मैनेज किया था, इसे शूटिंग के लिए काफी अच्छे से मैनेज किया गया था। मेरे पिता भी हमारे साथ आए थे। जब हम खैबर पास से गुजर रहे थे तो हमे काफी भूख लगी थी और हम पास के ढाबे पर रुके थे। हम लोग शाकाहारी थे इसलिए हमने रोटी और प्याज खरीदकर खाई थी। मुझे याद है कि मैंने ऐसे ही दिखने वाले लोगों को उस वक्त देखा था, वो काफी डरावने थे, लेकिन मुझे लगता है कि अधिकतर लोग काबुलीवाला थे।

आज के हालात डरावने हैं
आज के अफगानिस्तान के हालात के बारे में हेमा ने कहा कि जिस तरह से एयरपोर्ट पर लोग भागने के लिए दौड़ रहे हैं वह काफी डरावना है, देश का भविष्य काफ डरावना लग रहा है। गौर करने वाली बात है कि अफगानिस्तान से अमेरिका ने अपने सैनिकों को वापस बुलाने का ऐलान कर दिया, जिसके बाद महज दो हफ्ते के भीतर तालिबान ने पूरे अफगानिस्तान पर कब्जा कर लिया।












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