'धुरंधर' का वो सीन जिसे सुनने के बाद रणवीर सिंह रह गए थे सन्न, ये है पूरी कहानी
Dhurandhar Movie Scene: फिल्म 'धुरंधर' का एक खास सीन ऐसा है, जिसने रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल पर गहरा मानसिक प्रभाव छोड़ा। इस सीन को देखने और समझने के बाद तीनों कलाकार लगभग एक घंटे तक खामोश रहे। अभिनेता अर्जुन रामपाल ने खुद इसे अपने पूरे करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण और कठिन सीक्वेंस बताया है। फिल्म का वास्तविक घटनाओं पर आधारित होना इसके प्रभाव को और भी गंभीर बना देता है।

वास्तविक फुटेज ने बढ़ाई सीन की गंभीरता
निर्देशक आदित्य धर ने 'धुरंधर' में 2001 के संसद हमले और 26/11 मुंबई आतंकी हमले से जुड़े असली फुटेज का इस्तेमाल किया है। खासकर 26/11 से जुड़ा दृश्य सिनेमाघरों में दर्शकों को स्तब्ध कर देता है। इस दौरान आतंकियों और उनके पाकिस्तानी हैंडलर्स के बीच हुई बातचीत की वास्तविक रिकॉर्डिंग सुनाई जाती है, जो माहौल को बेहद भारी और भावनात्मक बना देती है।
पर्दे के पीछे की कहानी
फिल्म में 'डोंगा' का किरदार निभाने वाले अभिनेता नवीन कौशिक ने इस सीन से जुड़ा अनुभव साझा किया है। उनके अनुसार, जब यह रिकॉर्डिंग सेट पर सुनाई गई थी, तब रणवीर सिंह, अक्षय खन्ना और अर्जुन रामपाल करीब एक घंटे तक चुपचाप बैठे रहे। हालांकि फिल्म में इस सीन की अवधि सिर्फ 2-3 मिनट की है, लेकिन शूटिंग के दौरान टीम को पूरी 45 मिनट की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनाई गई थी।
'आप इसके लिए तैयार नहीं हो सकते'
नवीन कौशिक बताते हैं कि उस रिकॉर्डिंग में इतना कुछ था जिसे पर्दे पर दिखाना संभव नहीं था। वह अनुभव भीतर तक झकझोर देने वाला था। उन्होंने कहा कि पूरी टीम इसके लिए मानसिक रूप से तैयार नहीं थी। निर्देशक आदित्य धर ने कलाकारों से कहा था कि वे यह समझें कि यह दृश्य कितना गंभीर और संवेदनशील है।
सेट पर छाया रहा सन्नाटा
रिकॉर्डिंग खत्म होने के बाद सेट का माहौल पूरी तरह बदल गया। नवीन के मुताबिक, अगले 15 मिनट तक कमरे में पूर्ण सन्नाटा पसरा रहा। सभी कलाकार एक-दूसरे को देखकर यह महसूस कर रहे थे कि वे किस तरह की कहानी और सच्चाई को पर्दे पर उतार रहे हैं।
अर्जुन रामपाल के लिए सबसे कठिन अनुभव
फिल्म में अर्जुन रामपाल ने आईएसआई अधिकारी मेजर इकबाल का किरदार निभाया है, जिसे 26/11 हमले का मास्टरमाइंड बताया गया है। हाल ही में सोशल मीडिया पर पूछे गए सवाल के जवाब में अर्जुन ने स्वीकार किया कि एक भारतीय होने के नाते इस दृश्य को फिल्माना उनके करियर का सबसे कठिन अनुभव था। यही वजह है कि 'धुरंधर' का यह दृश्य फिल्म का सबसे प्रभावशाली और यादगार हिस्सा माना जा रहा है।












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