Exclusive: कॉमेडी शो के गिरते स्तर पर बोले हास्य सम्राट सुरेंद्र शर्मा-नंगेपन की कमाई से......'

नई दिल्ली, 17 दिसंबर। 'आज-कल टीवी पर कॉमेडी शो की भरमार है और वो लोगों के बीच काफी लोकप्रिय भी हैं लेकिन वो लोगों पर असर नहीं करते हैं जबकि एक कवि जब कवि-सम्मेलन के मंच से कुछ कहता है तो वो लोगों पर असर करता है और उनके दिल तक पहुंचता है तो इसके पीछे कारण ये है कि टीवी शोज की टीआरपी कल्चर के कपड़े उतराने से बढ़ती है, जबकि कवियों की टीआरपी कल्चर को कपड़े पहनाने से बढ़ती है।' ये कहना हमारा नहीं बल्कि हास्य सम्राट और पद्मश्री से सम्मानित सुरेंद्र शर्मा का है, जिन्होंने ये बातें वनइंडिया के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में कही।

यहां देखें पूरा इंटरव्यू

 'नंगेपन की कमाई नहीं कर सकते हैं'

'नंगेपन की कमाई नहीं कर सकते हैं'

वनइंडिया हिंदी के फेसबुक लाइव में अपने विचार रखते हुए सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि 'हम (कवि परिवार) मर्यादाओं का ध्यान रखते हैं इसलिए हम वहां भी सुने जा सकते हैं, जहां बहन-बेटी साथ में हों। हम कमाई ना हो तो नंगे रह सकते हैं लेकिन नंगेपन की कमाई नहीं कर सकते हैं।'

हिंदी पेट की भाषा हुआ करती थी...

हिंदी पेट की भाषा हुआ करती थी...

सुरेंद्र शर्मा ने केवल अपने इंटरव्यू में कॉमेडी के गिरते स्तर की बात नहीं की बल्कि उन्होंने कहा कि 'हिंदी का स्तर नहीं गिरा है बल्कि लोगों का स्तर गिर गया है। आज कक्षा नौ तक ही हिंदी की भाषा को पढ़ाया जाता है। हिंदी कभी पेट की भाषा हुआ करती थी लेकिन आज दौर बदल गया है। सारा कामकाज अंग्रेजी में होता है तो लोग हिंदी से दूर होने लगे हैं।'

जब तक बच्चा राम को नहीं जानेगा...

जब तक बच्चा राम को नहीं जानेगा...

सुरेंद्र शर्मा ने आगे कहा कि ' मुझसे आईआईटी के छात्र पूछते हैं कि क्यों पढ़ें हिंदी, जब पेट अंग्रेजी भर रही है? वाजिब सवाल हैं उनका तो बस उन्हें यही कहता हूं कि 'भले ही अंग्रेजी तुम्हें कार देती है, बल्कि हमारी भारतीय भाषाएं तुम्हें संस्कार देती हैं, जब तक बच्चा राम को नहीं जानेगा, तब तक वो बाप को भी नहीं जान पाएगा।'

 पद्मश्री से सम्मानित सुरेंद्र शर्मा

पद्मश्री से सम्मानित सुरेंद्र शर्मा

आपको बता दें कि हास्य सम्राट सुरेंद्र शर्मा अपने हास्य पति-पत्नी कविता और अपनी अनूठी शैली के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। वे वो हिंदी भाषी कवि सम्मेलनों का अटूट हिस्सा रहे हैं। सुरेंद्र शर्मा टीवी चैनलों ,प्रिंट मीडिया और यूट्यूब के जरिए भी लोगों से जुड़े हुए हैं।

'चार लाइनें सुनारिया हूं'

गंभीर मुख से हास्य व्यंग कहकर लोगों के दिलों पर दस्तक देने वाले सुरेंद्र शर्मा 50 सालों से भी ज्यादा वक्त से साहित्य के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। हरियाणवी बोली से 'चार लाइनें सुनारिया हूं ' कहकर बहुत कुछ कह जाने वाले सुरेंद्र शर्मा को साल 2013 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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