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Asha Bhosle के मटन कोरमा का वो 'तीखा' सच, सुरों की मल्लिका का वो अनसुना किस्सा,जिसने बदल दी आरडी बर्मन की शाम!

Asha Bhosle-RD Burman Korma Connection: भारतीय संगीत जगत में आशा भोसले और आरडी बर्मन (पंचम दा) (Asha Bhosle-RD Burman) की जोड़ी को अक्सर उनके कल्ट गानों के लिए याद किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस संगीतमय रिश्ते की नींव केवल सुरों पर नहीं, बल्कि 'स्वाद' पर टिकी थी?

1960 के दशक में जब पंचम दा संगीत की नई ऊंचाइयां छू रहे थे, तब वे आशा जी की मखमली आवाज के साथ-साथ उनके हाथ के बने खाने के भी कायल हो गए थे। विशेष रूप से आशा जी द्वारा बनाया गया लजीज मटन कोरमा पंचम दा की सबसे बड़ी कमजोरी बन गया था। यह केवल एक व्यंजन नहीं था, बल्कि वह जरिया था जिसने दो महान कलाकारों को करीब लाया और एक ऐसी दास्तान लिखी, जहां रसोई की खुशबू और स्टूडियो की धुनें एक-दूसरे में सिमट गईं।

Asha Bhosle-RD Burman Korma Connection

जब मटन कोरमा बना मुलाकातों का बहाना

आरडी बर्मन (RD Burman) खाने के बेहद शौकीन थे और उन्हें नए-नए स्वादों के साथ प्रयोग करना पसंद था। 1960 के दशक में जब काम के सिलसिले में उनका आना-जाना शुरू हुआ, तो आशा जी के हाथ के हुनर ने उन्हें मंत्रमुग्ध कर दिया। कहा जाता है कि पंचम दा कई बार सिर्फ खाना खाने के बहाने ही आशा जी के घर पहुंच जाया करते थे। उनके लिए वह कोरमा किसी सुरमयी धुन से कम नहीं था, जो उन्हें बार-बार खींच लाता था।

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तीखा स्वाद और पंचम दा का मजेदार किस्सा

एक बार का मशहूर किस्सा है कि आशा जी ने कोरमा थोड़ा अधिक मसालेदार और तीखा बना दिया था। जैसे ही पंचम दा ने पहला निवाला लिया, वे पसीने-पसीने हो गए। मसाले की तेजी के बावजूद उन्होंने खाना नहीं छोड़ा। पानी पीते हुए उन्होंने मजाक में कहा था, "आशा, तुम्हारी रसोई तो तुम्हारी आवाज से भी ज्यादा तेज (शार्प) है!"

रसोई से स्टूडियो तक का सफर

इन दोनों का तालमेल इतना अद्भुत था कि अक्सर आशा जी रसोई में खाना पका रही होती थीं और पंचम दा वहीं पास बैठकर अपनी अगली फिल्म की धुन गुनगुना रहे होते थे। संगीत के कई यादगार नगीने इसी घरेलू और खुशनुमा माहौल में जनमे थे। यही कारण था कि उनके गानों में एक अलग ही ताजगी और अपनापन महसूस होता था।

दोस्ती, शादी और रेस्टोरेंट का सफर

सुरों और स्वाद का यह सफर साल 1980 में विवाह के बंधन में बंध गया। शादी के बाद भी खाना उनके रिश्ते की एक मजबूत कड़ी बना रहा। आशा जी का खाना बनाने का यही जुनून बाद में 'आशा'स' (Asha's) नामक अंतरराष्ट्रीय रेस्टोरेंट चैन के रूप में दुनिया के सामने आया।

पंचम दा का संगीत और आशा जी की रसोई-दोनों ने मिलकर एक ऐसी विरासत तैयार की, जो हमें सिखाती है कि महान रिश्तों की शुरुआत कभी-कभी एक प्लेट गरमागरम कोरमे से भी हो सकती है। आज भी जब हम उनके हिट गाने सुनते हैं, तो उन धुनों के पीछे कहीं न कहीं उस मटन कोरमे की खुशबू भी छिपी महसूस होती है।

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