AR Rahman: 'मुस्लिम हूं काम नहीं मिल रहा' कहने के बाद अब बोले रहमान, कहा- भारत मेरा घर, गुरु और पहचान
AR Rahman: ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान लगतार अपने विवादित बयान की वजह से ट्रोल हो रहे हैं तो वहीं अब रहमान ने सामने से आकर इस मसले पर सफाई दी है। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर एक वीडियो शेयर करके कहा है कि 'संगीत हमेशा से संस्कृति से जुड़ने, उसका जश्न मनाने और उसका सम्मान करने का मेरा तरीका रहा है। भारत मेरी प्रेरणा है, मेरा गुरु है और मेरा घर है।'
आपको बता दें कि रहमान ने अपने शब्दों को गलत समझे जाने पर स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा 'मैं समझता हूं कि इरादों को कभी-कभी गलत समझा जा सकता है लेकिन मेरा मकसद हमेशा संगीत के माध्यम से उत्थान करना, सम्मान करना और सेवा करना रहा है।'

'मैंने कभी किसी को दुख पहुंचाने की कोशिश नहीं की और मुझे उम्मीद है कि मेरी ईमानदारी लोगों को जरूर महसूस होगी।' रहमान ने ऐसे माहौल में काम करने को सौभाग्य बताया जहां विविधता और रचनात्मक स्वतंत्रता को महत्व दिया जाता है। उन्होंने आगे कहा कि' उन्हें एक भारतीय के रूप में बहुसांस्कृतिक आवाजों से जुड़ने का अवसर मिला, जिसके लिए वो खुद को लकी मानते हैं।'
AR Rahman ने अपनी जर्नी के बारे में बात की
अपनी कलात्मक यात्रा का जिक्र करते हुए, रहमान ने कई अहम परियोजनाओं की जानकारी दी, जिसमें प्रधानमंत्री के सामने वेव समिट में 'झाला' और 'रूह-ए-नूर', युवा नागा संगीतकारों संग ऑर्केस्ट्रा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'मेरे लिए संगीत ऐसा काम है जो अतीत का सम्मान करता है, वर्तमान का जश्न मनाता है और भविष्य के लिए प्रेरित करता है।'
AR Rahman पर 'विक्टिम कार्ड' खेलने का आरोप
यह विवाद बीबीसी एशियन नेटवर्क को दिए एक साक्षात्कार से उपजा था, जिसमें रहमान ने कहा था 'पिछले 8 सालों से उन्हें काम नहीं मिल रहा है शायद इसके पीछे कारण साम्प्रदायिक हो सकते हैं।ट
जिस पर बवाल मच गया और आम से लेकर खास तक ए आर रहमान पर उबल पड़े। कुछ लोगों ने उन पर नफरत फैलाने का आरोप लगा दिया तो वहीं किसी ने उन्हें 'पाखंडी' कह दिया है तो वहीं कुछ लोगों ने उन पर 'विक्टिम कार्ड' खेलने का आरोप भी लगाया है।
AR Rahman को मिले दो ऑस्कर अवॉर्ड
बता दें कि ए आर रहमान का जन्म एक संगीत परिवार में हुआ। उनके पिता आर. के. शेखर दक्षिण भारतीय फिल्मों में संगीतकार थे। उन्होंने कम उम्र में ही संगीत की दुनिया में कदम रखा।रहमान को पहली बड़ी पहचान 1992 में तमिल फिल्म 'रोजा' से मिली।
इसके बाद उन्होंने हिंदी सिनेमा में 'बॉम्बे', 'दिल से', 'ताल', 'लगान', 'रंग दे बसंती', 'रॉकस्टार' जैसी कई यादगार फिल्मों को संगीत दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उन्हें फिल्म 'स्लमडॉग मिलियनेयर' के लिए दो ऑस्कर अवॉर्ड मिले, जिससे वे दुनियाभर में लोकप्रिय हो गए।












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