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बिना बोझ के शिक्षा : UP की तर्ज पर छ.ग. में भी बिना बस्ते के बच्चे जाएंगे स्कूल, नवाचार के लिए शनिवार

सरकार ने शनिवार के दिन बच्चों को बिना बस्ते के स्कूल बुलाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस दिन बच्चों को खेलकूद और नवाचार के माध्यम से उनके अंदर छुपी प्रतिभा को निखारने का काम किया जाएगा।

राजनांदगांव, 19 जुलाई। छत्तीसगढ़ के स्कूलों में बच्चों के ड्रॉप-आऊट के कारणों में एक कारण उनके भारी बस्ते के बोझ को माना गया है। जिससे बच्चों पर शारीरिक और मानसिक प्रभाव पड़ता है। इस बोझ को कम करने अब सरकार ने शनिवार के दिन बच्चों को बिना बस्ते के स्कूल बुलाने के निर्देश जारी कर दिए हैं। इस दिन बच्चों को खेलकूद और नवाचार के माध्यम से उनके अंदर छुपी प्रतिभा को निखारने का काम किया जाएगा। राज्य सरकार के निर्देश के बाद अब सभी स्कूलों में बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने व अन्य गतिविधियों में शामिल कर शनिवार को ख़ास बनाया जा रहा है।

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खेल खेल में सीख रहे बच्चे
इस निर्देश के बाद राजनांदगांव जिले के सभी स्कूलों में इसका पालन किया जा रहा है। कहीं खेल खेल में बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। तो कहीं ड्राइंग व पेंटिंग सिखाई जा रही है। वही डोंगरगांव के प्राथमिक व मिडिल स्कूल में बच्चों को मुखौटा, मिट्टी के कलाकृति बनाना सिखाया गया। वहीं कुछ स्कूलों में योग खेल व साहित्यिक गतिविधियां कराई जा रही है।

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प्राथमिक व मिडिल स्कूलों में सप्ताह में एक दिन "बैगलेस डे"
छत्तीसगढ़ में शिक्षा में नवाचार के रूप में प्रत्येक शनिवार को बिना बस्ते वाला दिन यानी "बैगलेस डे" बनाया गया है। 9 जुलाई से इसकी शुरुआत कर दी गई है। इस दिन बच्चों को घर से विद्यालय में किताब-कॉपी लाने से पूरी तरह मुक्त कर दिया गया है। इसका तात्पर्य यह नही है कि इस दिन कोई पढ़ाई नही होगी बल्कि इस दिन सीखने-सिखाने का अंदाज़ रोचक एवं नवाचारी गतिविधियों से भरपूर होगा। जिससे बच्चें स्वतः ही विद्यालय के प्रति आकर्षित होंगे। प्रत्येक शनिवार शिक्षक नवाचार के माध्यम से बच्चों को कुछ ऐसी गतिविधियां कराएंगे की आगामी सप्ताह की पढ़ाई का स्वागत बच्चे उत्साहपूर्ण होकर करेंगें।

प्रार्थना के बाद योग और व्यायाम
बेगलेस डे के दिन प्रायमरी व मीडिल के बच्चे स्कूलों में शनिवार को प्रार्थना के बाद अलग-अलग समय के अनुसार योग और व्यायाम, मूल्य शिक्षा कला शिखा एक दूसरे से सीखना समूह अधिगम, खेल एवं पुस्तकालय, सांस्कृतिक एवं साहित्यिक गतिविधियां होगी। साहित्यिक गतिविधियों में वाचन अंतर्गत छत्तीसगढ़ की विभूतियों, भारतीय संविधान, शारीरिक शिक्षा और मूल्य शिक्षा आदि को शामिल किया गया है। कहानी-कथन के अलावा, वाद-विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता, तात्कालिक भाषण, प्रश्नमंच, समूह परिचर्चा आदि का आयोजन किया जाएगा। निबंध, कविता, कहानी, संवाद लेखन, और चार्ट निर्माण प्रतियोगिता आयोजित किया जाएगा।

उत्तरप्रदेश सरकार में भी लागू है "नो बैग डे"
दरअसल साल 2020 में उत्तर प्रदेश सरकार ने सप्ताह में एक दिन 'नो बैग डे' यानी बिना बस्ते के स्कूल नीति बनाकर उत्तरप्रदेश में प्राथमिक स्कूल के बच्चों की पढ़ाई को रोचक बनाने का प्रयास किया है। इसी तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ में भी 'बैगलेस डे' बनाया गया है।

शाला प्राचार्य व प्रधान पाठक बनाएंगे पूर्व योजना
प्रत्येक प्राचार्य और प्रधानपाठक अपने स्कूल के लिए हर शनिवार की गतिविधियों की पूर्व योजना बनाएंगे और इसे सूचना पटल पर प्रदर्शित कराएंगे। इन प्रतियोगिताओं में श्रेष्ठ प्रदर्शकों के नाम को प्रदर्शित कर पुरस्कृत किया जाएगा। विद्यार्थियों की कृतियों जैसे कि ड्राइंग, पेंटिंग, निबंध, कलाकृति का प्रदर्शन किया जाएगा।

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