CG: आरक्षण विधेयक पर राज्यपाल का बयान, 10 बिंदुओं पर जवाब आने के बाद होगा विचार, राजनीति की राह आसान नहीं
छत्तीसगढ़ में आरक्षण विधेयक को लेकर लगातार बयानबाजी का दौर चल रहा है। इस बीच राज्यपाल ने दुर्ग प्रवास के दौरान कहा कि उन्होंने 10 बिंदुओं पर सरकार से जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद विधेयक पर विचार किया जाएगा।

छत्तीसगढ़ में आरक्षण विधेयक को लेकर सरकार और राज्यपाल के बीच तकरार खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है।राज्यपाल अनुसुईया उइके ने विधेयक पर फिर एक बार बयान देकर स्थिति साफ कर दी है। वे शनिवार को दुर्ग के बीआईटी कॉलेज पहुंचीं थीं। जहां उन्होंने कहा कि सरकार से दस सवालों के जवाब मिलने के बाद ही आरक्षण विधेयक पर विचार किया जाएगा। वहीं दूसरी ओर राज्य सरकार इन दस सवालों के जवाब तैयार करने में जुटा है।

सवालों के जवाब मिलने पर किया जाएगा
आरक्षण विधेयक के सवाल पर राज्यपाल ने कहा वे एक संवैधानिक पद पर हैं। इसलिए जो भी करेंगी, वह कानून और नियम के तहत ही करेंगीं। उन्होंने कहा कि मैंने राज्य सरकार से 10 सवालों के जवाब मांगे हैं। सरकार से संतोषजनक जवाब आ आएं उसके बाद उस पर विचार करेंगी। बच्चों के भविष्य की उन्हें भी चिंता है। लेकिन संवैधानिक संकट को ध्यान रखा जाना चाहिए।

दरअसल छत्तीसगढ़ विधानसभा से 2 दिसम्बर को पारित आरक्षण संशोधन विधेयक राजभवन में अटका हुआ है। जिसे लेकर राजनीतिक बयान बाजी भी खूब हो रही है। हाईकोर्ट में आरटीआई कार्यकर्ता द्वारा याचिका लगाने के बाद प्रदेश में आरक्षण शून्य कर दिया गया था। जिसके बाद राज्य सरकार को पुनः विशेष सत्र बुलाकर विधेयक लाना पड़ा । लेकीन राज्यपाल अनुसुईया उइके ने अपने बयान में कहा कि उन्होंने सिर्फ अनुसूचित जनजाति को लेकर विधेयक लाने कहा था, लेकिन सरकार ने सभी वर्गों के आरक्षण में बदलाव ला दिया।
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राज्यपाल ने 10 बिंदुओं पर मांगा जवाब
अब राज्यपाल ने विधेयक पर संवैधानिक संकट बताते हुए। विधेयक के 10 बिंदुओं पर सरकार से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा है कि सरकार से उचित जवाब मिलने के बाद ही विधेयक पर विचार किया जावेगा। इस विधेयक में राज्य सरकार ने प्रदेश में एससी 13, एसटी 32, ओबीसी 27 और ईडब्ल्यूएस के लिए चार प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया है। इस तरह कुल 76 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान होने से मामला अटका हुआ है।

राज्यपाल बनने प्रधानमंत्री ने किया था फोन
दरअसल राज्यपाल अनुसुइया उइके बीआईटी कॉलेज में 1997 बैच के सिलवर जुबली कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंची थी। इस कार्यक्रम की उन्होंने कार्यक्रम में अपने राजनीतिक जीवन कई महत्वपूर्ण बातें साझा की। उन्होंने बताया कि उनके पास अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया था। तब वो दिल्ली में थीं। उन्हें पता भी नहीं था कि वो राज्यपाल बनने जा रही हैं।
पैकेज महत्वपूर्ण लेकिन इससे भी बड़ी चीज है संस्कार
राज्यपाल ने कहा कि आपको मिलने वाला पैकेज महत्वपूर्ण है लेकिन इससे भी बड़ी चीज है संस्कार। आपने जिन लोगों से शिक्षा ली, जिन्होंने आपके निर्माण के महत्वपूर्ण वर्षों में आपकी समझ को विकसित करने में मदद की। उन्हें याद रखना, उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना। आज बीआईटी में 1997 बैच के सिल्वर जुबली कार्यक्रम में जब अपने गुरुजनों के प्रति इन पूर्व छात्रों का आदर देख रही हूँ, तो मुझे बहुत अच्छा महसूस हो रहा है। और यह लग रहा है कि उन्होंने अपने करियर में भी तरक्की की है और अपने संस्कारों को भी संभालकर रखा है।
राजनीति की राह आसान नहीं: राज्यपाल
अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि राजनीति जितनी आसान दिखती है उतनी आसान नहीं है। राजनीति में बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं। लोग सोचते हैं कि हम मेहनत करेंगे तो हमें पद प्रतिष्ठा मिल जाएगा, लेकिन मैंने कभी कुछ पाने के लिए राजनीति में मेहनत नहीं की। बल्कि सेवा भावना के लिए राजनीति में आगे बढ़ी ।
युवावस्था स्वयं को निखारने के स्वर्णिम अवसर
राज्यपाल ने कहा कि युवावस्था स्वयं को निखारने का स्वर्णिम वक्त होता है और ऐसे में जिस संस्थान में उनकी ऊर्जा को सकारात्मक रूप दिया जाता है वो संस्थान उनके लिए पुण्यभूमि से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि बीआईटी में नवाचारों को हमेशा प्रोत्साहन दिया जाता है। यही वजह है कि 36 बरसों से यह संस्थान लगातार अपनी छवि को कायम रखने में सफल रहा है। कार्यक्रम में पूर्व छात्र-छात्राओं ने अपने अनुभव भी साझा किये। 1997 बैच के छात्र के रूप में बिलासपुर विधायक शैलेश पांडे ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस मौके पर संस्थान के मेंबर सेक्रेटरी आईपी मिश्रा, प्राचार्य मोहन गुप्ता ने भी अपना संबोधन दिया। इस मौके पर वाइस प्रिंसिपल डा. मनीषा शर्मा भी उपस्थित रहीं।












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