बेमेतरा: जिस स्कूल में पढ़कर छात्र बने नेता और अफसर, शिक्षकों की कमी से जूझ रहा,100 साल पुराना बेसिक स्कूल
छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला मुख्यालय के 100 साल पुराने बेसिक स्कूल के बच्चे शिक्षकों की कमी से जूझ रहे है। इस स्कूल में पढ़े कई छात्र आज जनप्रतिनिधी और अधिकारी बन चुके है। लेकिन आज स्कूल की शिक्षा व्यवस्था बदहाल हो चुकी है।
बेमेतरा, 24 अगस्त। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिला मुख्यालय के 100 साल पुराने बेसिक स्कूल के बच्चे शिक्षकों की कमी से जूझ रहे है। इस स्कूल में पढ़े कई छात्र आज जनप्रतिनिधी और अधिकारी बन चुके है। लेकिन आज स्कूल की शिक्षा व्यवस्था बदहाल हो चुकी है। स्कूल में 100 छात्र के लिए सिर्फ एक शिक्षक है। अब स्कूल में सीबीएससी के तहत अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाया जाता है। जिसके लिए केवल कुछ स्टाफ ही सेवा दे रहे हैं।

100 साल पुराना है स्कूल का इतिहास
पालकों ने बताया कि बेसिक स्कूल का इतिहास लगभग 100 साल पुराना है। इस स्कूल में पढ़े कई छात्र आज बड़े बड़े जनप्रतिनिधि और अधिकारी बनकर रिटायर्ड भी हो चुके हैं। लेकिन समय के साथ साथ इस स्कूल कि स्थिति में कोई बदलाव नही किया गया। वर्तमान में सरकार द्वारा सीबीएससी के तहत बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। जहां पर सत्र 2022-23 के दौरान शिक्षकों की कमी है।

कलेक्टर व जनप्रतिनिधियों से लगाई गुहार
जिले के बेसिक स्कूल में शिक्षकों की कमी से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। जिसे देखते हुए सभी ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियो, अधिकारियों से मिलकर लिखित व मौखिक गुहार लगा चुके है। जिसके बावजूद शिक्षा विभाग उदासीन बना हुआ है। इन शिकायतों के बाद भी शिक्षकों की नियुक्ति नहीं किया गया है। आज तक स्कूल में शिक्षकों की कमी की समस्या बनी हुई है। जिससे देखते हुए शिक्षकों की व्यवस्था करने की मांग की गई है।
300 बच्चों के लिए सिर्फ 3 शिक्षक
शाला प्रबंधन समिति की ओर से प्रस्तुत किये गये आवेदन में सभी पालकों ने अधिकारियों को स्कूल की समस्याओं को देखने के लिए औचक निरीक्षण करने की मांग की है। अपने आवेदन में पालकों ने कलेक्टर को लिखा है कि स्कूल में वर्तमान सत्र में 300 से भी अधिक बच्चे अध्ययनरत हैं जिनके लिए केवल 3 शिक्षक कार्यरत है।

कलेक्टर से निरक्षण करने की मांग
पालकों ने कलेक्टर जितेन्द्र शुक्ला से स्कूल का निरीक्षण की मांग करते हुए बताया है कि भवन की व्यवस्था को देखते हुए दो पाली में प्राथमिक व मिडिल की अलग-अलग कक्षाएं अलग-अलग पाली में लगाये जाने के बजाये एक पाली में लगाने का भी पक्ष पालकों ने रखा है। मांग करने वालो में धरमीन यादव, पंकज , मनोज वर्मा, मुकेश वर्मा, कैलाश शुक्ला, मोहन वर्मा, टेकराम साहू, रितेश निषाद और अन्य पालक शामिल है।












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