Vijender Gupta: 10 साल पहले दिल्ली असेंबली से बाहर फेंक दिए गए थे विजेंद्र गुप्ता, स्पीकर बनकर क्या है इरादा?
Vijender Gupta Speaker Delhi Assembly: समय का चक्र कैसे घूमता है, दिल्ली के रोहिणी से नव-निर्वाचित विधायक (Rohini MLA) विजेंद्र गुप्ता उसके बेहतरीन उदाहरण हैं। 10 साल पहले उन्हें जिस दिल्ली विधानसभा से आम आदमी पार्टी (AAP) की सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन स्पीकर के आदेश पर मार्शलों ने उठाकर बाहर कर दिया था, लोकतंत्र के उसी मंदिर में वे स्पीकर बनकर लौट रहे हैं।
उस समय दिल्ली विधानसभा में 70 में से 67 विधायक सत्ताधारी 'आप' के थे और विपक्षी बीजेपी के सिर्फ 3 एमएलए थे। तब आप विधायक राम निवास गोयल स्पीकर हुआ करते थे, जिन्होंने इस बार विधानसभा चुनाव के ऐलान से पहले राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी थी।

Vijender Gupta Speaker: विजेंद्र गुप्ता को सदन से बाहर किए जाने वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल
उस समय की जो तस्वीरें और वीडियो हैं, वह आज भी सोशल मीडिया पर उपलब्ध हैं और वायरल भी हो रही हैं। इसमें विजेंद्र गुप्ता को देखा जा सकता कि उन्हें किस तरह से मार्शल जबरन खींचकर सदन से बाहर ले जा रहे हैं और वह उनके साथ संघर्ष करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने फर्नीचर पकड़कर खुद को सदन में बनाए रखने की भरपूर कोशिश भी की, लेकिन आधे दर्जन मार्शलों के सामने वह अकेले कम पड़ गए।
Vijender Gupta MLA Rohini: भाजपा की सरकार बनी है तो विजेंद्र गुप्ता को बयान जा रहा है स्पीकर
2025 में बीजेपी दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों में से 48 सीटें जीतकर सत्ता पक्ष के तौर पर सदन में लौटी है और विजेंद्र गुप्ता को स्पीकर पद की जिम्मेदारी दी जा रही है। रोहिणी सीट से वह 2015 से ही लगातार जीत रहे हैं। इस बार उन्होंने वहां आम आदमी पार्टी के प्रदीप मित्तल को 37,816 वोटों के बड़े अंतर से हराया है।
न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में विजेंद्र गुप्ता ने नई जिम्मेदारी दिए जाने को लेकर कहा है, 'यह उत्तरदायित्व दिए जाने के लिए मैं पार्टी का आभारी हूं....दिल्ली असेंबली का स्पीकर बनाने के लिए। मैं अपना उत्तरदायित्व निभाऊंगा। मुझे भरोसा है कि सदन में हम स्वस्थ बहस करेंगे।'
Vijender Gupta Speaker Delhi Assembly: 10 वर्षों में सदन को अराजकता के साथ चलाया गया- विजेंद्र गुप्ता
दिल्ली विधानसभा में आम आदमी पार्टी इस बार अबतक की सबसे कम 22 सीटें जीती है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा है, 'लोकतंत्र का मंदिर है विधानसभा...उसकी पवित्रता हम सब के लिए आवश्यक है। मैं ईश्वर से कामना करता हूं कि उसे पवित्र मन से हम चलाएं...इसकी हमें शक्ति दे और जिन लोगों ने अराजकता की थी और अराजक तरीके से दिल्ली विधानसभा को चलाया गया..पिछले दस वर्ष तक और नियम-कानून के धता बताया गया...मैं ईश्वर से यही कहूंगा कि उनको भी सद्बुद्धि दे....'
पिछले हफ्ते ही चुनाव जीतने के बाद उन्होंने कहा था कि आप सरकार से संबंधित सीएजी (CAG) की लंबित 14 रिपोर्ट को सदन में रखा जाएगा और उसे सार्वजनिक किया जाएगा।
Vijender Gupta Speaker: विपक्ष की आवाज को न तो दबाया जाएगा और न ही कुचला जाएगा- रोहिणी विधायक
ऐसे में सवाल है कि क्या स्पीकर के तौर क्या आम आदमी पार्टी के विधायकों के लिए वह पुरानी बातों को भी ध्यान में रखेंगे? इसी से जुड़े सवाल पर उन्होंने इंडियन एक्सप्रेस से कहा है, 'मैं पूरी प्रतिबद्धता के साथ अपनी ड्यूटी निभाऊंगा। मैं आपको यह भरोसा दे सकता हूं कि दिल्ली विधानसभा में विपक्ष की आवाज को न तो दबाया जाएगा और न ही कुचला जाएगा जैसा कि पिछले कई सालों से होता आ रहा है।'
उन्होंने यह भी कहा है, 'सदन लोकतंत्र का मंदिर है, यह विपक्ष की आवाज को दबाने का मंच नहीं है, खासकर जब मामला जनता के कल्याण से जुड़ा हुआ हो। पहले इसकी अनुमति नहीं थी (आप के कार्यकाल में), लेकिन अब हम वैसा नहीं करेंगे। जनहित से जुड़े सभी बातों पर सदन में चर्चा होगी। नियमों और प्रावधानों के आधार पर ही सत्र बुलाए जाएंगे और शून्य काल भी आयोजित होते रहेंगे।'
Vijender Gupta: 30 नवंबर, 2015 को दिल्ली विधानसभा में विजेंद्र गुप्ता के साथ क्या हुआ था?
30 नवंबर, 2015 को दिल्ली विधानसभा में कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर उसी तरह से सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच हंगामा चल रहा था, जैसा कि देश की विधायिकाओं में अक्सर देखने को मिल जाता है। तत्कालीन स्पीकर राम निवास गोयल ने तब विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता से कहा कि वह 4 बजे तक सदन छोड़कर चले जाएं।
दरअसल, सदन में विवाद कथित रूप से तत्कालीन 'आप'एमएलए अलका लांबा (अब कांग्रेस नेता) पर आपत्तिजनक टिप्पणी के लेकर शुरू हुआ था, जिसका आरोप बीजेपी के एक और विधायक ओपी शर्मा पर लगाया गया था।
जब गुप्ता ने गोयल के फरमान पर अमल करने से इनकार कर दिया तो उन्होंने मार्शल बुला लिए। गुप्ता ने सदन में बेंच और फर्नीचर पकड़ लिया, लेकिन मार्शलों ने उन्हें खींचते हुए सदन से उठाकर बाहर कर दिया। सदन से बाहर होने से पहले उन्होंने स्पीकर पर 'आप' को लेकर भेदभाव करने का आरोप भी लगाया। उनका आरोप था कि 'आप के विधायकों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई।'












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