पकड़े गए पाकिस्तानी आतंकी ने गाजियाबाद में की थी शादी, भारतीय पासपोर्ट पर की थी विदेश यात्रा
नई दिल्ली, 12 अक्टूबर। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने राजधानी में नाम बदलकर रह रहे एक पाकिस्तानी आतंकी को सोमवार को गिरफ्तार किया था। पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अशरफ को मंगलवार को कोर्ट में पेश किया गया जहां पर उसे 14 दिन की पुलिस रिमांड में भेज दिया गया। पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक से पूछताछ में पुलिस को चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह देश में लगभग एक दशक से ज्यादा समय से भेष बदलकर रह रहा था।

एक दशक से ज्यादा समय से रह रहा
डीसीपी स्पेशल सेल प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि पकड़े गए पाकिस्तानी नागरिक का नाम मोहम्मद अशरफ है। वह भारतीय पहचान का इस्तेमाल करते हुए पिछले एक दशक से ज्यादा समय से देश में रह रहा था। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में सामने आया है कि वह स्लीपर सेल के तौर पर काम कर रहा था और देश में खतरनाक गतिविधियों में शामिल था।
उसने स्पेशल सेल के सामने जम्मू कश्मीर और देश भर में कई आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की बात स्वीकारी है। हाल में उसे आतंकी गतिविधि को अंजाम देने का काम सौंपा गया था जिसकी जगह का खुलासा नहीं हुआ है। डीसीपी प्रमोद कुशवाहा ने बताया कि पूछताछ में उसे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने ट्रेनिंग लेने की जानकारी सामने आई है। साथ ही और जानकारी जुटाई जा रही है।

बिहार में बनाई थी नकली आईडी
डीसीपी ने बताया कि उसने कई सारी फेक आईडी बनाई थी जिसमें से एक अहमद नूरी के नाम पर बनाई थी। उसने भारतीय पासपोर्ट भी बनवा लिया था जिस पर उसने थाइलैंड और सऊदी अरब की यात्रा की थी। उसे पाकिस्तानी एजेंसी आईएसआई से ट्रेनिंग मिली थी और उसे बांग्लादेश के जरिए सिलीगुड़ी बॉर्डर से भेजा गया था। पाकिस्तान के नसीर नाम के शख्स ने उसे टास्क दिया था। हाल के दिनों में वह दिल्ली के आस-पास के इलाके में पीर बाबा के नाम से जाना जा रहा था।
जांच के दौरान स्पेशल सेल को पता चला कि उसने कागजात बनवाने के लिए गाजियाबाद के वैशाली में एक महिला से शादी भी की थी। उसे बिहार से भारतीय पहचान पत्र मिला था।

डेढ़ दशक पहले पहुंचा था दिल्ली
इंडिया टुडे ने शास्त्री नगर के एक निवासी के हवाले से रिपोर्ट किया है कि मोहम्मद अशरफ 14-15 साल पहले वहां पहुंचा था। उस दौरान वह शास्त्री नगर में उजैब के घर 4 महीने तक रुका था जिसे उसने उजैब के पिता नसीम अहमद से किराये पर लिया था। इस दौरान उसने नसीम अहमद से दोस्ती बढ़ाई और उनके पते पर अपने नाम से राशन कार्ड बनवाने के लिए मदद भी मांगी थी।












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