सब्जी के छिलकों से बनेगी खाद! NDMC की ‘गीला कचरा लाओ, खाद ले जाओ' पहल से बदलेगी दिल्ली की सफाई की तस्वीर
NDMC wet waste management Delhi: दिल्ली में कचरे की समस्या को लेकर अक्सर सवाल उठते रहे हैं, लेकिन अब नई दिल्ली नगर परिषद यानी NDMC ने इसका समाधान लोगों की भागीदारी से निकालने की दिशा में एक खास पहल शुरू की है। इस पहल का नाम है 'गीला कचरा लाओ, खाद ले जाओ'। गुरुवार को शुरू हुई यह मुहिम न सिर्फ कचरा प्रबंधन को आसान बनाएगी, बल्कि लोगों को यह भी सिखाएगी कि रोजमर्रा का गीला कचरा किस तरह उपयोगी संसाधन में बदला जा सकता है।
तीन कॉलोनियों से हुई शुरुआत
NDMC ने इस पहल की शुरुआत राजधानी की तीन प्रमुख रिहायशी कॉलोनियों काका नगर, सरोजिनी विहार और पश्चिम किदवई नगर से की है। अधिकारियों के मुताबिक इन इलाकों को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चुना गया है, जहां सामुदायिक स्तर पर विकेंद्रीकृत अपशिष्ट प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका मकसद है कि कचरे का निस्तारण वहीं हो, जहां वह पैदा होता है।

अनुपम कॉलोनी बनाने की दिशा में कदम
NDMC के बयान के अनुसार, यह पहल इन रिहायशी इलाकों को 'अनुपम कॉलोनियां' घोषित करने की दिशा में एक अहम कदम है। योजना के तहत लोगों को गीला कचरा अलग करके लाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इस कचरे को स्थानीय स्तर पर प्रोसेस कर पोषक तत्वों से भरपूर जैविक खाद में बदला जा रहा है। तैयार खाद का इस्तेमाल कॉलोनियों के पार्कों, उद्यानों और हरित क्षेत्रों में किया जाएगा, जिससे कचरा प्रबंधन का पूरा चक्र वहीं पूरा हो सके।
लैंडफिल पर दबाव होगा कम
NDMC के अध्यक्ष केशव चंद्र ने इस पहल को पर्यावरण के लिए जरूरी बताया है। उनका कहना है कि 'गीला कचरा लाओ, खाद ले जाओ' अभियान के जरिए एक ओर जहां लैंडफिल पर जाने वाले कचरे की मात्रा कम होगी, वहीं दूसरी ओर बागवानी और वृक्षारोपण के लिए जैविक खाद भी उपलब्ध होगी। इससे शहर की सफाई व्यवस्था ज्यादा टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बन सकेगी।
अब सब्जी और फलों के छिलके नहीं होंगे बेकार
इस पहल के तहत लोगों से कहा जा रहा है कि वे अपने घरों से निकलने वाले सब्जियों और फलों के छिलके, बचा हुआ खाना और अन्य गीला कचरा अलग रखें। NDMC इस कचरे को इकट्ठा कर वैज्ञानिक तरीके से प्रोसेस करेगी और इसे ऑर्गेनिक खाद में बदल देगी। इससे न सिर्फ कचरे का सही इस्तेमाल होगा, बल्कि घरों से निकलने वाला गीला कचरा सड़कों और डंपिंग साइट्स तक पहुंचने से पहले ही काम का बन जाएगा।
लोगों की भागीदारी सबसे अहम
अधिकारियों का कहना है कि इस पहल की सफलता पूरी तरह नागरिकों की भागीदारी पर निर्भर करती है। अगर लोग गीला और सूखा कचरा अलग करना शुरू कर दें, तो दिल्ली में कचरे की समस्या काफी हद तक कम हो सकती है। NDMC का मानना है कि यह मॉडल आगे चलकर अन्य इलाकों में भी लागू किया जा सकता है।
कुल मिलाकर 'गीला कचरा लाओ, खाद ले जाओ' पहल सिर्फ एक अभियान नहीं, बल्कि सोच बदलने की कोशिश है। अगर यह प्रयोग सफल होता है, तो दिल्ली में कचरा अब बोझ नहीं, बल्कि एक उपयोगी संसाधन बन सकता है।












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