लॉकडाउन का पॉजिटिव असर: दिल्ली में रोजाना मौतें कम, श्मशान में सन्नाटा
दिल्ली। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए हुए लॉकडाउन का पॉजिटिव असर दिल्ली में रोजाना होने वाली मौतों पर हुआ है। यहां के श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए लाई जाने वााली लाशों की संख्या में 60 से 70 प्रतिशत तक की कमी आई है। दिल्ली के कई श्मशान घाटों का दौरा करने पर यह जानकारी मिली कि अलग-अलग घाटों पर लाशों के आने में भारी कमी आई है।

दिल्ली के सबसे बड़े श्मशान निगमबोध घाट पर कभी गाड़ी पार्किंग की बहुत समस्या होती थी लेकिन यहां आजकल पार्किंग में सन्नाटा पसरा रहता है। श्मशान घाट के महापुजारी जगदीश शर्मा का कहना है कि यहां रोज आने वाली लाशों की संख्या में साठ प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है। इसी तरह नॉर्थवेस्ट दिल्ली वजीरपुर स्थित घाट पर लाए जाने वाले शवों की संख्या में पचास प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है।

महापुजारी ने कहा कि अब यहां सिर्फ 10-12 लाशें आ रही हैं, पहले 35-40 रोजाना की औसत संख्या थी। दिल्ली के बड़े घाटों में से एक मंगोलपुरी घाट पर लॉकडाउन के बाद आने वाले शवों की संख्या में 60 प्रतिशत से ज्यादा की कमी आई है। यहां के पंडित श्मशान एसोसिएशन से जुड़े हैं। इनका कहना है कि दिल्ली में अब ज्यादातर पाकृतिक मौत वाले शव ही श्मशान घाट लाए जा रहे हैं। इससे यह कहा जा सकता है कि लॉकडाउन के बाद सड़क दुर्घटना, अपराध व अन्य वजहों से होने वाली मौतों में कमी आई है।
दिल्ली में अपराध-हादसे हुए कम
दिल्ली पुलिस ने एक आंकड़ा जारी किया जिसके मुताबिक पिछले साल 15 मार्च से 31 मार्च के बीच की अवधि के मुकाबले इस साल इसी अवधि में अपराधों में पचास प्रतिशत तक की कमी आई है। आंकड़ों में यह भी बताया गया कि इसी अवधि में हुई दुर्घटनाओं में भारी कमी आई है। पिछले साल इसी अवधि में 48 बड़े हादसे हुए थे जबकि इस साल 19 हुए हैं। अपराध और हादसों में गिरावट की प्रमुख वजह लॉकडाउन को माना जा रहा है। 25 मार्च के बाद हुए देशव्यापी लॉकडाउन में लोग घरों में हैं और सड़कों पर सन्नाटा पसरा है। सार्वजनिक परिवहन सेवाएं भी बंद हैं और लोगों के निजी वाहन लेकर निकलने पर भी रोक है जिस वजह से दुर्घटनाओं में कमी आई है।












Click it and Unblock the Notifications