'किराड़ी में अब नहीं होगा जलभराव, 6 महीने में मिलेगा स्थायी समाधान', दिल्ली के मंत्री प्रवेश वर्मा का ऐलान
Parvesh Verma on Kirari Waterlogging: दिल्ली की राजनीति में किराड़ी विधानसभा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। वजह है लंबे समय से चली आ रही जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या, जिस पर अब दिल्ली सरकार ने बड़ा और साफ दावा किया है। दिल्ली के पीडब्ल्यूडी और जल मंत्री प्रवेश वर्मा ने 22 जनवरी को ऐलान किया है कि किराड़ी और आसपास के इलाकों में अगले छह महीनों में हालात पूरी तरह बदल जाएंगे और एक साल के भीतर जलभराव इतिहास बन जाएगा।
सोशल मीडिया पर पिछले दिनों किराड़ी की जलमग्न सड़कों और घरों में घुसते गंदे पानी के वीडियो वायरल हुए थे। इन्हीं तस्वीरों के बीच प्रवेश वर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर न सिर्फ मौजूदा हालात पर सफाई दी, बल्कि पिछली आम आदमी पार्टी सरकार पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि किराड़ी की समस्या रातोंरात पैदा नहीं हुई, बल्कि यह 11 साल की लापरवाही का नतीजा है।

11 साल की अनदेखी का आरोप
प्रवेश वर्मा का कहना है कि 2014 में AAP के विधायक के जीतने के बाद से किराड़ी की हालत लगातार बिगड़ती गई। इलाके की भौगोलिक स्थिति नीची होने के बावजूद न तो सीवर सिस्टम को वैज्ञानिक तरीके से डिजाइन किया गया और न ही ड्रेनेज पर गंभीरता से काम हुआ। उन्होंने दावा किया कि सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक 11 साल में किराड़ी में सीवर मेंटेनेंस पर महज 43 लाख रुपये खर्च किए गए, जबकि यहां करीब 10 लाख लोग रहते हैं।
मंत्री ने यह भी कहा कि कई कॉलोनियां वर्ष 2000 से पहले की हैं, लेकिन आज तक वहां एक समग्र सीवर नेटवर्क नहीं बिछाया गया। जो लाइनें डाली भी गईं, उनकी ढलान और तकनीक इतनी खराब थी कि बरसात में गंदा पानी सड़कों के साथ-साथ लोगों के घरों में घुसने लगा।
व्हाइट पेपर और मास्टर प्लान
दिल्ली सरकार ने किराड़ी जलभराव को लेकर एक व्हाइट पेपर और विस्तृत मास्टर प्लान पेश किया है। इसमें बताया गया है कि पुरानी सरकारों के समय सीवर परियोजनाएं तो मंजूर हुईं, लेकिन समय पर पूरी नहीं की गईं। किराड़ी सीवरेज प्रोजेक्ट दिसंबर 2020 में स्वीकृत हुआ था और लक्ष्य दिसंबर 2024 रखा गया, लेकिन भुगतान न होने और तालमेल की कमी के कारण काम ठप पड़ा रहा।
अब सरकार का दावा है कि सीवर नेटवर्क का काम 70 प्रतिशत से बढ़कर 84 प्रतिशत तक पहुंच चुका है। 54 किलोमीटर नई सीवर लाइनें जोड़ी गई हैं और कई इलाकों में काम तेज कर दिया गया है। संशोधित लक्ष्य जून 2026 रखा गया है, लेकिन चरणबद्ध तरीके से इससे पहले भी लोगों को राहत मिलने की बात कही जा रही है।
छह महीने में क्या बदलेगा?
प्रवेश वर्मा के मुताबिक, सीवर ओवरफ्लो को खत्म करने के लिए जंग स्तर पर काम चल रहा है। जहां जरूरत है, वहां नई लाइनें जमीन के ऊपर स्तर पर डाली जा रही हैं ताकि बरसात में पानी वापस न आए। इसके साथ ही ड्रेनेज क्षमता दोगुनी करने के लिए नए पंपिंग स्टेशन लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि किराड़ी में पांच से छह बड़े नालों पर एक साथ काम शुरू किया गया है। शर्मा कॉलोनी में 9.4 करोड़ रुपये की लागत से स्थानीय विकास परियोजना पर काम चल रहा है, जिसमें नालों की सफाई और आउटफॉल कनेक्टिविटी को सुधारा जा रहा है।
बड़े प्रोजेक्ट, बड़ा खर्च
मंत्री ने बताया कि आई एंड एफसी विभाग के तहत मुंडका हॉल्ट से सप्लीमेंट्री ड्रेन तक नया नाला बनाया जा रहा है, जिसकी लागत करीब 220 करोड़ रुपये है। किराड़ी से रिठाला तक 7.2 किलोमीटर लंबा ट्रंक ड्रेन भी तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा केएसएन ड्रेन और रोहतक रोड ड्रेन के रीमॉडलिंग प्रोजेक्ट्स पर भी काम तेजी से चल रहा है।
यमुना पर भी नजर
प्रवेश वर्मा ने साफ कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ सड़कों से पानी हटाना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि यमुना में एक बूंद भी बिना ट्रीटमेंट का पानी न जाए। इसके लिए सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाई जा रही है और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व ठेकेदारों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
प्रवेश वर्मा का विपक्ष पर पलटवार
मंत्री ने राहुल गांधी से लेकर AAP नेताओं तक पर पुराने वीडियो और तस्वीरें फैलाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अब कागजों पर नहीं, जमीन पर काम दिखेगा। जो हालात 11 साल में नहीं सुधरे, उन्हें ठीक करने की जिम्मेदारी मौजूदा सरकार ने ली है।
अंत में प्रवेश वर्मा ने दावा किया कि आने वाले मानसून में किराड़ी की तस्वीर बदली हुई होगी। जलभराव, जो हर साल लोगों के लिए मुसीबत बनता था, वह जल्द ही बीते दिनों की बात हो जाएगा। किराड़ी अब नारों से नहीं, नतीजों से बदलाव देखेगी।












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