केजरीवाल सरकार में कैसे सच हो रहा है स्वच्छ यमुना का सपना?
यमुना जल को स्वच्छ बनाने के लिए दिल्ली सरकार के कुछ प्रोजेक्ट लगभग पूरे हो चुके हैं। ऐसे में परियोजना पूरा होने से 2 साल पहले ही यमुना जल स्वच्छ दिखने लगेगा।

दिल्ली सरकार यमुना को स्वच्छ बनाने लिए युद्ध स्तर पर कार्य कर रही है। सरकार ने अपने मिशन को पूरा करने के लक्ष्य के लिए साल 2025 तक का समय निर्धारित किया है। लेकिन यमुना की सफाई से जुड़े कुछ ऐसे प्रोजेक्ट हैं, जिनके पूर्ण होते है यमुना जल निर्मल दिखना शुरू हो जाएगा। अनुमान लगाया जा रहा है कि इसी साल के अंत तक इसका असर देखने को मिलेगा। अगर ऐसा होता है तो ये दिल्ली सरकार का दिल्लीवासियों के लिए एक बड़ा तोहफा होगा।
केजरीवाल सरकार दिल्ली शहर के गंदे पानी को यमुना में गिरने रोकने का पुख्ता प्रबंध कर रही है। दिल्ली जलबोर्ड के मुताबिक साल के अंत तक कुछ अहम प्रोजेक्ट्स के पूरा होते ही यमुना पहले की तरह दिखेगी स्वच्छ दिखने लगेगी।
दिल्ली जल बोर्ड ने कहा कि इस साल के अंत तक यमुना में दिल्ली के नाले का गंदा पानी गिरना बंद हो जाएगा। गंदे पानी के प्रबंधन के लिए शहर के भीतर चल रहे अधिकतर प्रोजेक्ट पूरे हो जाएंगे। जिसके बाद यमुना में गंगा पानी बहाने वाले सभी नालों को बंद कर दिया जाएगा। दूषित पानी को वाटर ट्रीटमेंट प्लांट की ओर मोड़ा जाएगा। पानी का ट्रीटमेंट होने के बाद इसे नदीं में छोड़ा जाएगा।
ऐसे होगा वाटर ट्रीटमेंट
वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट को लेकर दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के अधिकारी एलजी विनय सक्सेना को प्रेजेंटेशन भी दे चुके हैं। दिल्ली जल बोर्ड के मुताबिक मोरी गेट नाले के गंदे पानी को यमुना में गिरने से पहले ट्रीट करने के लिए कोरोनेशन पिलर WWTP का निर्माण किया गया है। प्रोजेक्ट के तहत सीवेज पम्पिंग स्टेशन का निर्माण किया जा रहा है। जिसमें मोरी गेट नाले का पानी ट्रीट किया जाएगा।
2023 के अंत तक दिखेगा असर
यमुना वाटर प्रोजेक्ट का असर इसी साल से दिखना शुरू हो जाएगा। साल के अंत तक ये लक्ष्य रखा गया है कि तक यमुना में नाले का गंदा जाने से रोक दिया और इससे पहले वाटर ट्रीटमेंट की व्यवस्था सही कर ली जाए। वाटर ट्रीटमेंट प्रोजेक्ट के मुताबिक दिल्ली में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) दिसंबर से रोजाना 814 मिलियन गैलन एमजीडी (अपशिष्ट जल) का ट्रीटमेंट करने में सक्षम होगा। मौजूद समय में दिल्ली में कुल मिलाकर प्रतिदिन 768 मिलियन गैलन सीवरेज उत्पन्न होता है। गंदे जल के ट्रीटमेंट के लिए दिल्ली में मौजूदा समय में 35 एसटीपी है। जिनकी क्षमता 632 एमजीडी है।
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2025 में पूरा होगा प्रोजेक्ट
यमुना वाटर प्रजेक्ट को पूरा करने के दिल्ली सरकार ने साल 2025 तक का समय निर्धारित किया है। तय समय सीमी के भीतर कार्य पूरा करने का लक्ष्य है। ऐसे मे दिल्ली सरकार शहर साथ यमुना के आसपास से गावों से निकलने वाले गंदे पानी को यमुना में सीधे प्रवाहित होने से रोकने के लिए भी प्लान तैयार किया है।












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