तिहाड़ जेल के कैदी को हो रहा था पेट में दर्द, जांच में दिखा कुछ ऐसा जिसे देखकर चौंक गए डॉक्टर

नई दिल्ली, 19 जनवरी: दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक कैदी के मोबाइल फोन निगलने का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है। यहां एक कैदी ने अधिकारियों से छिपाने के लिए मोबाइल फोन निगल लिया। बाद में एंडोस्कोपी से इसे निकाला गया। यह मामला 4 जनवरी का है। कैदी के ऐसा करने का खुलासा तब हुआ जब उसने पेट में असहनीय दर्द की शिकायत की। एक्सरे रिपोर्ट में उसके पेट में मोबाइल होने की पुष्टि हुई।

पकड़े जाने के डर से कैंदी ने निगला मोबाइल

पकड़े जाने के डर से कैंदी ने निगला मोबाइल

दरअसल, इस महीने की शुरुआत में तिहाड़ जेल में चेकिंग हुई थी।इस दौरान एक कैदी ने मोबाइल छिपाने के लिए मोबाइल फोन को निगल लिया था। इस घटना के कुछ दिन बाद कैदी ने पेट दर्द की शिकायत की। सामान्य दवाओं से ठीक नहीं होने पर कैदी को इलाज के लिए दिल्ली के जीबी पंत अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां पर एक्सरे में उसके पेट में मोबाइल फोने होने का पता चला।

इस प्रक्रिया से निकाला गया मोबाइल

इस प्रक्रिया से निकाला गया मोबाइल

जीबी पंत अस्पताल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. सिद्धार्थ ने बताया कि बाह्य पदार्थ खाने वाले मरीज को 15 जनवरी को अस्पताल लाया गया था। उसके पेट का एक्स-रे कराया गया जिससे पता चला कि पेट में मोबाइल फोन हो सकता है। एंडोस्कोपी में लगे कैमरा के जरिए उन्होंने फोन की जगह को देख लिया और फिर एक अलग से पाइप लगाकर फोन को धीरे धीरे खींचते हुए बाहर निकाल लिया।

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कीपैड वाला यह फोन 7 सेंटीमीटर लंबा और 3 सेंटीमीटर चौड़ा था। पूरी प्रक्रिया को गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के डॉ. सिद्धार्थ और डॉ. मनीष तोमर के नेतृत्व में जीबी पंत अस्पताल की टीम ने अंजाम दिया। डॉक्टर सिद्धार्थ के मुताबिक मोबाइल फोन को निगलना मुश्किल होता है। आमतौर पर जेल के कैदी इसे अधिकारियों से छिपाने के लिए ऐसा करते हैं। इसे केवल वही लोग निगल सकते हैं जिन्हें ऐसा करने की आदत हो। यह एक तकनीकी प्रक्रिया है और बड़े बैग को बाहर निकालने के लिए कौशल की आवश्यकता होती है।

तिहाड़ में पहले भी ऐसे मामले हो चुके हैं

तिहाड़ में पहले भी ऐसे मामले हो चुके हैं

डॉ. सिद्धार्थ ने आगे कहा कि वह अस्पताल में अब तक ऐसे ही दस मामलों को हैंडल कर चुके हैं। जिस कैदी ने जांच अधिकारियों के डर से मोबाइल फोन निगला उसका नाम संतोष (24) है। तिहाड़ जेल प्रशासन के अनुसार कैदी का स्वास्थ्य पूरी तरह ठीक है। इस घटना के सामने आने के बाद जेलों में अवैध तरीके से मोबाइल फोन पहुंचाने का एक और खुलासा हुआ है। बहरहाल मोबाइल फोन के जेल में पहुंचने की जांच जारी है।

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