कोरोना मरीजों के लिए 'मसीहा' बने जितेंद्र सिंह शंटी, दवाओं से लेकर अंतिम संस्कार तक कर रहे मदद
नई दिल्ली, अप्रैल 30: देश में कोरोना महामारी का कहर जारी है, जहां पर रोजाना 3000 से ज्यादा मौतें हो रही हैं। जिस वजह से अब श्मशान घाटों में भी लंबी लाइन लग रही है। कई जगहों पर तो परिजन मृतक का अंतिम संस्कार किए बिना ही भाग जा रहे हैं। ऐसे मुश्किल हालात में पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह शंटी जैसे लोग भगवान का दूसरा रूप बनकर लोगों के पास पहुंच रहे हैं। साथ ही दवाइयों से लेकर अंतिम संस्कार तक हर तरह की मदद कर रहे हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक जितेंद्र सिंह शंटी को रोजाना 500 फोन आते हैं। जिसमें दवा, ऑक्सीजन, शवों का अंतिम संस्कार, जैसी कई तरह की मदद मांगी जाती है। आमतौर पर उनका फोन लगातार बजता रहता है, वो कभी बंद नहीं होता है। शुक्रवार को जब वो मीडिया से बात कर रहे थे, तभी उनके पास एक फोन आया। सामने वाले ने बताया कि परिवार में 6 सदस्य हैं और सभी कोरोना पॉजिटिव हैं। इसके अलावा फोन करने वाले के दादा की मौत हो गई थी। फोन पर जवाब देते हुए पूर्व विधायक ने कहा कि आप निश्चिंत रहिए, आप अकेले नहीं हैं, हम लोग वहां पर आ रहे हैं।
शंटी के मुताबिक शुक्रवार को वो उनका 30वां फोन था। उनकी टीम पूर्वी दिल्ली में मृतकों का दाह संस्कार करने में मदद करती है। हाल ही में उनके बेटे और पत्नी की भी रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। इसके अलावा उनके चार कर्मचारी, एक चालक इस महामारी में जान गंवा चुके हैं। फिर भी शंटी अपनी टीम के साथ लोगों की मदद में जुटे हुए हैं। वो रात को 11 बजे तक लोगों का दाह संस्कार करते हैं। लोगों की मदद अच्छे से हो सके, इसके लिए उन्होंने सीमापुरी श्मशान घाट में एक ऑफिस भी खोल रखा है, जहां से वो शहीद भगत सिंह सेवा दल के कार्यकर्ताओं को-ऑर्डिनेट करते हैं। इसके अलावा झिलमिल कॉलोनी में उनके 18 एंबुलेंस और शव वाहन पार्क होते हैं।
शंटी के मुताबिक उन्होंने अप्रैल महीने में 800 से अधिक शवों का अंतिम संस्कार किया है। उन्होंने इस दौरान एक चीज नोट की, मृतकों में ज्यादातर युवा था, जिनकी उम्र करीब 30 साल थी और वो मध्यवर्गीय परिवार से संबंध रखते थे। उनमें से ज्यादातर की मौत ऑक्सीजन की कमी की वजह से हुई है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जब तक हो सकेगा वो लोगों की मदद करते रहेंगे।












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