Delhi High Court ने केजरीवाल का हलफनामा किया रिकॉर्ड, जस्टिस के बच्चों के पैनल काउंसल में होने पर उठाए सवाल

Excise case: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 16 अप्रैल 2026 (गुरुवार) को दिल्ली हाईकोर्ट में शराब नीति मामले में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। उन्‍होंने अदालत से अपना दाखिल हलफनामा रिकॉर्ड पर लेने का अनुरोध किया। इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सहमति जताई बशर्ते उन्हें भी जवाब दाखिल करने का अवसर मिले। केजरीवाल ने भी बाद में रिजॉइंडर फाइल करने की बात कही। इसके बाद दिल्‍ली हाईकोर्ट ने केजरीवाल का हलफनामा रिकॉर्ड पर लिया।

बता दें केजरीवाल ने शराब नीति मामले में अपनी रिहाई संबंधी केस में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की याचिका की सुनवाई से न्यायमूर्ति स्‍वर्णकांत शर्मा को हटाने की मांग की है। इस केस में केजरीवाल ने न्यायमूर्ति स्वर्णकांता शर्मा पर पूर्वाग्रह का आरोप लगाया है, जिसका आधार उनके बच्चों का केंद्र सरकार के पैनल वकील होना बताया है।

Excise case

केजरीवाल ने क्यों उठाई जज को हटाने की मांग?

केजरीवाल ने दावा किया है कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के दोनों बच्चे केंद्र सरकार के पैनल काउंसल हैं।केजरीवाल का दावा है कि न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चों को वही सॉलिसिटर जनरल कार्य आवंटित करते हैं जो सीबीआई का प्रतिनिधित्व करते हुए उनके समक्ष पेश हुए। उनके अनुसार, यह स्थिति न्यायमूर्ति शर्मा में पूर्वाग्रह की उचित आशंका पैदा करती है, अतः उन्हें शराब नीति मामले में सीबीआई की याचिका की सुनवाई से हटना चाहिए।

केजरीवाल ने कोर्ट में दिए ये तर्क?

हलफनामे में तर्क दिया गया है कि पक्षपात साबित करना हमेशा ज़रूरी नहीं। बल्कि, यदि परिस्थितियां ऐसी हों कि सामान्य व्यक्ति को न्याय होता 'दिखाई' न दे, तो भी यह चिंता का विषय है। केजरीवाल ने कहा कि मौजूदा हालात न्यायिक निष्पक्षता पर 'उचित आशंका' पैदा करते हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति न्यायमूर्ति शर्मा में पूर्वाग्रह की उचित आशंका पैदा करती है, अतः उन्हें शराब नीति मामले में सीबीआई की याचिका की सुनवाई से हटना चाहिए।श्

जज के बच्चों को तुषार मेहता देते हैं केस, न्याय कैसे होगा? केजरीवाल ने एफिडेविट में RTI के चौंकाने वाला खुलासा
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क्‍या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 13 अप्रैल को न्यायमूर्ति शर्मा ने केजरीवाल व अन्य आरोपियों द्वारा दायर आवेदनों पर आदेश सुरक्षित रखे थे। ये आवेदन सीबीआई की पुनरीक्षण याचिका की सुनवाई से उनके हटने की मांग कर रहे थे, जो शराब नीति मामले में सभी आरोपियों की रिहाई को चुनौती देती है।

पिछली सुनवाई में क्‍या बोले थे केजरीवाल?

पिछली सुनवाई में, केजरीवाल ने स्वयं मामले की पैरवी करते हुए न्यायाधीशों के परिजनों के किसी पक्षकार से जुड़े होने पर सुनवाई से हटने की स्थापित परंपरा का जिक्र किया था। उन्होंने न्यायमूर्ति शर्मा के बच्चों के केंद्र सरकार से व्यावसायिक जुड़ाव पर सोशल मीडिया चर्चा का भी उल्लेख किया।

सुनवाई के बाद, केजरीवाल ने एक नया हलफनामा दायर कर रिकॉर्ड दिए, जिनमें न्यायमूर्ति शर्मा के बेटे को सुप्रीम कोर्ट के लिए ग्रुप ए पैनल काउंसल और बेटी को ग्रुप सी पैनल काउंसल के तौर पर सूचीबद्ध दिखाया गया।

केजरीवाल ने तर्क दिया था कि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का सीबीआई की ओर से उनकी दोषमुक्ति का विरोध करने के लिए न्यायमूर्ति शर्मा के समक्ष पेश होना, हितों के टकराव का सीधा और गंभीर आभास देता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सॉलिसिटर जनरल को सुनवाई की पहली तारीख पर ही इस पूरे संबंध का खुलासा करना चाहिए था।

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